Lord Krishna

श्री कृष्णाष्टोत्तर शत नामावलि

(Shri Krishnashtottara Shatanavali)

From Brahmanda Purana

This sacred composition, extracted from the Brahmanda Purana, comprises one hundred and eight auspicious names of Lord Krishna. Each name serves as a meditative focal point, capturing the multifaceted divinity of the Supreme Being as the protector, the beloved cowherd, and the ultimate philosopher of the Gita. Chanting these names is believed to cleanse the mind of worldly impurities and foster deep spiritual devotion. Regular recitation offers practitioners inner tranquility, removal of obstacles, and the grace of Lord Krishna, ultimately guiding the devotee toward liberation and a heightened sense of cosmic connection.

ॐ कृष्णाय नमः
ॐ कमलानाथाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः
ॐ सनातनाय नमः
ॐ वसुदेवात्मजाय नमः
ॐ पुण्याय नमः
ॐ लीलामानुष विग्रहाय नमः
ॐ श्रीवत्स कौस्तुभधराय नमः
ॐ यशोदावत्सलाय नमः
ॐ हरये नमः ॥ 10 ॥
ॐ चतुर्भुजात्त चक्रासिगदा शङ्खान्द्युदायुधाय नमः
ॐ देवकीनन्दनाय नमः
ॐ श्रीशाय नमः
ॐ नन्दगोप प्रियात्मजाय नमः
ॐ यमुना वेगसंहारिणे नमः
ॐ बलभद्र प्रियानुजाय नमः
ॐ पूतना जीवितहराय नमः
ॐ शकटासुर भञ्जनाय नमः
ॐ नन्दव्रज जनानन्दिने नमः
ॐ सच्चिदानन्द विग्रहाय नमः ॥ 20 ॥
ॐ नवनीत विलिप्ताङ्गाय नमः
ॐ नवनीत नटाय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ नवनीत नवाहाराय नमः
ॐ मुचुकुन्द प्रसादकाय नमः
ॐ षोडशस्त्री सहस्रेशाय नमः
ॐ त्रिभङ्गि मधुराकृतये नमः
ॐ शुकवाग मृताब्धीन्दवे नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
ॐ योगिनां पतये नमः ॥ 30 ॥
ॐ वत्सवाटचराय नमः [वत्सवादहराय]
ॐ अनन्ताय नमः
ॐ देनुकासुर भञ्जनाय नमः
ॐ तृणीकृत तृणावर्ताय नमः
ॐ यमलार्जुन भञ्जनाय नमः
ॐ उत्तालतालभेत्रे नमः
ॐ तमाल श्यामलाकृतये नमः
ॐ गोपगोपीश्वराय नमः
ॐ योगिने नमः
ॐ कोटिसूर्य समप्रभाय नमः ॥ 40 ॥
ॐ इलापतये नमः
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः
ॐ यादवेन्द्राय नमः
ॐ यदूद्वहाय नमः
ॐ वनमालिने नमः
ॐ पीतवाससे नमः
ॐ पारिजातापहारकाय नमः
ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः
ॐ गोपालाय नमः
ॐ सर्वपालकाय नमः ॥ 50 ॥
ॐ अजाय नमः
ॐ निरञ्जनाय नमः
ॐ कामजनकाय नमः
ॐ कञ्जलोचनाय नमः
ॐ मधुघ्ने नमः
ॐ मधुरानाथाय नमः
ॐ द्वारकानायकाय नमः
ॐ बलिने नमः
ॐ वृन्दावनान्त सञ्चारिणे नमः
ॐ तुलसीदाम भूषणाय नमः ॥ 60 ॥
ॐ श्यमन्तक मणेर्हर्त्रे नमः
ॐ नरनारायणात्मकाय नमः
ॐ कुब्जाकृष्णाम्बरधराय नमः
ॐ मायिने नमः
ॐ परमपूरुषाय नमः
ॐ मुष्टिकासुर चाणूर मल्लयुद्ध विशारदाय नमः
ॐ संसारवैरिणे नमः
ॐ कंसारये नमः
ॐ मुरारये नमः
ॐ नरकान्तकाय नमः ॥ 70 ॥
ॐ अनादि ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ कृष्णाव्यसन कर्शकाय नमः
ॐ शिशुपाल शिरश्छेत्रे नमः
ॐ दुर्योधन कुलान्तकाय नमः
ॐ विदुराक्रूर वरदाय नमः
ॐ विश्वरूप प्रदर्शकाय नमः
ॐ सत्यवाचे नमः
ॐ सत्य सङ्कल्पाय नमः
ॐ सत्यभामारताय नमः
ॐ जयिने नमः ॥ 80 ॥
ॐ सुभद्रा पूर्वजाय नमः
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ भीष्ममुक्ति प्रदायकाय नमः
ॐ जगद्गुरवे नमः
ॐ जगन्नाथाय नमः
ॐ वेणुनाद विशारदाय नमः
ॐ वृषभासुर विध्वंसिने नमः
ॐ बाणासुर करान्तकाय नमः
ॐ युधिष्ठिर प्रतिष्ठात्रे नमः
ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः ॥ 90 ॥
ॐ पार्थसारथये नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ गीतामृत महोदधये नमः
ॐ कालीय फणिमाणिक्य रञ्जित श्रीपदाम्बुजाय नमः
ॐ दामोदराय नमः
ॐ यज्ञ्नभोक्र्ते नमः
ॐ दानवेन्द्र विनाशकाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः
ॐ पन्नगाशन वाहनाय नमः ॥ 100 ॥
ॐ जलक्रीडासमासक्त गोपीवस्त्रापहारकाय नमः
ॐ पुण्यश्लोकाय नमः
ॐ तीर्थपादाय नमः
ॐ वेदवेद्याय नमः
ॐ दयानिधये नमः
ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः
ॐ सर्वग्रहरूपिणे नमः
ॐ परात्पराय नमः ॥ 108 ॥
इति श्री कृष्णाष्टोत्तर शतनामावलीस्समाप्ता ॥

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