Lord Rama

पाहि रामप्रभो

(Pahi Ramaprabho)

Bhadrachala Ramadasa

Pahi Ramaprabho is a soul-stirring Kirtana composed by the legendary devotee Bhadrachala Ramadasa, also known as Kancharla Gopanna. Dedicated to the Lord of Bhadrachalam, this composition exemplifies the profound surrender and unconditional love of a true Bhakta. Through its rhythmic structure and evocative lyrics, the devotee pleads for the protection and grace of Lord Rama, the consort of Sita. Chanting this stotra is believed to dissolve the ego, cultivate deep inner devotion, and grant the seeker spiritual solace, mental clarity, and the compassionate guidance of the Supreme Lord in navigating the challenges of life.

रागम्: मध्यमावति

तालम्: झम्प
पाहिरामप्रभो पाहिरामप्रभो
पाहिभद्राद्रि वैदेहिरामप्रभो ॥ पाहिरामप्रभो ॥
श्रीमन्महागुणस्तोमाभिराम मी
नामकीर्तनलु वर्णिन्तु रामप्रभो ॥ 1 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सुन्दराकार हृन्मन्दिरोद्धार सी
तेन्दिरा संयुतानन्द रामप्रभो ॥ 2 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
इन्दिरा हृदयारविन्दादिरूढ
सुन्दाराकार आनन्द रामप्रभो ॥ 3 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
ऎन्दुनेजूड मीसुन्दराननमु
कन्दुनो कन्नुलिम्पॊन्द रामप्रभो ॥ 4 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पुण्यचारित्रलावण्य कारुण्य गां
भीर्य दाक्षिण्य श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 5 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कन्दर्पजनक नायन्दु रञ्जिल सदा
नन्दुडवै पूजलन्दु रामप्रभो ॥ 6 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
इम्पुगा जॆवुलकु न्विन्दुगा नीकथल्‌
कन्दुगा मिम्मु सॊम्पॊन्द रामप्रभो ॥ 7 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वन्दनमुचेसि मुनुलन्दरु घनुलैरि
विन्दवैनट्टि गोविन्द रामप्रभो ॥ 8 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
बृन्दारकादि सद्बृन्दार्चितावतार
विन्द मुनि सन्दर्शितानन्द रामप्रभो ॥ 9 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
तल्लिविनीवॆ मातण्ड्रिविनीवॆ मा
धातवुनीवॆ माभ्रात रामप्रभो ॥ 10 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पल्लवाधरलैन गॊल्लभामलगूडि
युल्लमलरङ्ग रञ्जिल्लु रामप्रभो ॥ 11 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मल्लरङ्गम्बुनन्दॆल्ल मल्लुलजीरि
यल्ल कंसुनि जम्पु मल्ल रामप्रभो ॥ 12 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कॊल्ललुग नीमाय वॆल्लिविरियग जेय
सल्लापमुन क्रीडसल्पु रामप्रभो ॥ 13 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
तम्मुडुनु नीवु पार्श्वम्मुलञ्जेरि वि
ल्लम्मुलॆक्कॆडि निल्चुटिम्मु रामप्रभो ॥ 14 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
क्रम्मुकॊनिशात्रवुलु हुम्मनुचुवच्चॆदरु
इम्मैनबाणमुलिम्मु रामप्रभो ॥ 15 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
रम्मु नाकभयम्मु निम्मु नीपादमुल्‌
नम्मिनानय्य श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 16 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कण्टि मी शङ्खम्मु कण्टि मी चक्रमु
कण्टि मी पादमुल्गण्टि रामप्रभो ॥ 17 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
विण्टि महिम वॆन्नण्टि तम्मुडु नीवु
जण्टरावय्य नावॆण्ट रामप्रभो ॥ 18 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मेमु नीवारमैनामु रक्षिम्पुम
न्नामु जागेल श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 19 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नामनोवीधिनि प्रेमतोनुण्डु मी
भूमिजासहित जय रामचन्द्रप्रभो ॥ 20 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मी महत्त्वम्मु विन मनमन्दु प्रेम
वेमरुन्‌ बुट्टु श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 21 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्यामसुन्दर कोमलं जानकीमनः
कामुकं त्वं भजे रामचन्द्रप्रभो ॥ 22 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कामितार्थमुलिच्चु नी महत्वमु विन्न
ना मॊरालिञ्चु नास्वामि रामप्रभो ॥ 23 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कामितप्रभुडवै प्रेमतो रक्षिञ्चु
स्वामि साकेतपुरि रामचन्द्रप्रभो ॥ 24 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
अन्न रावन्न नीकन्न नामीद नॆन
रुन्न वारेरि नायन्न रामप्रभो ॥ 25 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
निन्नॆगाकनु मरे यन्युलगानन्‌
गन्नतण्ड्रिविग मायन्न रामप्रभो ॥ 26 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वॆन्नदॊङ्गिलि तिन्न चिन्नकृष्णम्म नि
न्नॆन्नगा वशमॆ रावन्न रामप्रभो ॥ 27 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
ऎन्नॆन्नो जन्ममुल नॆत्तजालनु इक
निन्नॆ नॆम्मदिनि वर्णिन्तु रामप्रभो ॥ 28 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
ऎन्निविधमुलनैन निन्नॆ नम्मिन वानि
मन्निञ्चि दयचेयुमन्न रामप्रभो ॥ 29 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पन्नगाधिपशायि भावनातीत आ
पन्न नामनवि विनवन्न रामप्रभो ॥ 30 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मेटिवाक्यम्बु मीसाटिदैवम्बु मु
म्माटिकिनि भुविलेदु मेटि रामप्रभो ॥ 31 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पाडुदुनु मिम्मु गॊनियाडुदुनु मोदमुन
वेडुचुन्नानु गापाडु रामप्रभो ॥ 32 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वेडुकोगानॆ नीजोडुकाडुनु नीवु
कूडि रारय्य नातोड रामप्रभो ॥ 33 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नेडु नाकोर्कॆ लीडेरगाजेसि का
पाडरा करिनेलु जाड रामप्रभो ॥ 34 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मूडुमूर्तुल कात्ममूलमै चॆन्नॊन्दु
वाडवनि श्रुतुलु निन्नाडु रामप्रभो ॥ 35 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
चूडु मीभक्तुलनु गूडु मीरिपुल गो
राडु मीवल्ल गोविन्द रामप्रभो ॥ 36 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पुण्डरीकाक्ष मार्ताण्डवंशोद्भवा
खण्डलस्तुत्य कोदण्ड रामप्रभो ॥ 37 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कुण्डलिशयन भूमण्डलोद्धरण पा
षण्डजनहरण कोदण्डरामप्रभो ॥ 38 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
निण्डुदयतोड नायण्ड बायकनु नी
वुण्डि गापाडु कोदण्डरामप्रभो ॥ 39 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
जातकौतूहलं चक्षुकृत्यारमां
पूतसीतापते दात रामप्रभो ॥ 40 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पातकुललो मॊदटि पातकुड नावण्टि
पातकुनि कावुटे ख्याति रामप्रभो ॥ 41 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
भूतनाथुनि विल्लु ख्यातिगा खण्डिञ्चि
सीतगैकॊन्न विख्यात रामप्रभो ॥ 42 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पूतनाकल्मषोद्धूत पॆ\न्‌शत्रु सं
हारि श्रीसीतासमेत रामप्रभो ॥ 43 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
जातिनीतुलुलेक भूतलम्बुन दिरुगु
घातकुल बरिमार्चु नेत रामप्रभो ॥ 44 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
ऎप्पुडुनु गण्टिकि रॆप्पवलॆ गाचि न
न्नॊप्पुगागावु मायप्प रामप्रभो ॥ 45 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
एदया नीदया योदयाम्भोनिधी
यादिलेदय्य नामीद रामप्रभो ॥ 46 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
घोरराक्षस गर्वहार विश्वम्भरो
द्धार गुणसान्द्रविस्तार रामप्रभो ॥ 47 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मोदमुन नीवु नन्नादुकोवय्य गो
दावरी तीर भद्राद्रि रामप्रभो ॥ 48 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नीदु बाणम्बुलनु नादुशत्रुलबट्टि
बाधिम्पकुन्नावदेमि रामप्रभो ॥ 49 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
आदिमध्यान्त बहिरान्तरात्मुडवनुचु
वादिन्तुने जगन्नाथ रामप्रभो ॥ 50 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
चालदेमि पदाब्जमुलसाटि यीपदु
नाल्गुलोकम्बुल गूडि रामप्रभो ॥ 51 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
एल यीलागु जागेल जेसॆदवु म
म्मेलुकोवय्य मापालि रामप्रभो ॥ 52 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पालुवॆन्नलु म्रुच्चिलिन्तिवनि यशोद
रोटगट्टिन मायचालु रामप्रभो ॥ 53 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कॊल्ललुग व्रेपल्लॆ पल्लवाधरुलतो
नल्लबिल्लिगनु रञ्जिल्ल रामप्रभो ॥ 54 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वालि नॊक्कम्मुनन्‌ गूलवेसिन शौर्य
शालियौ निनुदलतु जाल रामप्रभो ॥ 55 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सालभञ्जिकल निर्मूलम्बु चेयगा
जालितिवि गोपालबाल रामप्रभो ॥ 56 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
तालवृक्षमु लॊक्ककोल धरगूलगा
लीलनेसिन बाहुशालि रामप्रभो ॥ 57 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
(शिलयैन यहल्य श्रीपादमुलु
सोक नॆलतयै मिमु मदितलचॆ ॥ 58 ॥
पाहिरामप्रभो ॥)
विनवय्य मनवि गैकॊनवय्य तप्पुलन्‌
गनकय्य सम्मतिन्गॊनुचु रामप्रभो ॥ 59 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
दानधर्मम्बुलुन्‌ दपजपम्बुलु नीदु
नामकीर्तनकु सरिरावु रामप्रभो ॥ 60 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मानावमानमुलु महिनि नीवै युण्ड
माकेल मदिनि ईचिन्त रामप्रभो ॥ 61 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
ज्ञानयोगाभ्यासमन्दु नुण्डॆडिवारि
कानन्दमयुडवैनावु रामप्रभो ॥ 62 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
भानुवंशमुनन्दु मानवाधिपुडवै
दानवुल बरिमार्चिनावु रामप्रभो ॥ 63 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
अणुरेणु परिपूर्णुडौ हृदयवास ना
मनवि विनु देवकीतनय रामप्रभो ॥ 64 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मान्यमै आश्रितवदान्यमै सुजन स
न्मान्यमै वॆलुगु मूर्धन्य रामप्रभो ॥ 65 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नित्यमै सत्यमै निर्मलम्बै महिनि
दिव्यवंशोत्तंसमैन रामप्रभो ॥ 66 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सेव्यमै मीपदद्भाव्यमै सज्जन
श्राव्यमै युण्डुनो दिव्य रामप्रभो ॥ 67 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
गट्टिगा नीवुन\न्‌ पट्टुगा विहितमौ
नट्टुगा मम्मु चेपट्टु रामप्रभो ॥ 68 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
दिट्टयगु ताटकिनिगॊट्टि वेगमॆ गाधि
पट्टि यागमु गाचिनट्टि रामप्रभो ॥ 69 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
चुट्टुकॊनि कालिङ्गु डट्टहासमुचेय
पट्टुकॊनि तलनॆक्किनट्टि रामप्रभो ॥ 70 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सन्ततमु नन्नु रक्षिन्तुवनि नम्मि मि
म्मॆन्तुरा जानकीकान्त रामप्रभो ॥ 71 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पन्तमुन मी पादचिन्तनमु चेय ना
वन्तलन्नियु मानुटॆन्त रामप्रभो ॥ 72 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
विन्तगादय्य नेनिन्तनाडिनदि ना
पन्तमुन मिम्मु भाविन्तु रामप्रभो ॥ 73 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
शान्तमूर्तिनि रमाकान्तुडवनि चाल
सन्तसम्बुन निन्नु नॆन्तु रामप्रभो ॥ 74 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
अक्षयम्बैन नीकुक्षिलो लोकमुल
रक्षिञ्चितिवि लक्ष्मीवक्ष रामप्रभो ॥ 75 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
दन्तिवत्सल भक्तचिन्तामणी विश्व
मन्तयुनु नीवु रक्षिञ्चु रामप्रभो ॥ 76 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पक्षिवाहन शत्रुनिक्षेपणा नन्नु
रक्षिञ्चु मोक्षप्रदात रामप्रभो ॥ 77 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
रक्षिञ्चि सज्जनुल वीक्षिञ्चि दुर्जनुल
राक्षसुल शिक्षिञ्चिनावु रामप्रभो ॥ 78 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
रक्षकुडवै जगद्रक्षणमुचेयगा
राक्षसुल शिक्षिञ्चिनावु रामप्रभो ॥ 79 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
लक्ष्मीकटाक्ष वीक्षणधार वृष्टि मा
कक्षयम्बुग कटाक्षिञ्चु रामप्रभो ॥ 80 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
रावया अभयम्बु लीवया नास्वामी
नीवया गति देवराय रामप्रभो ॥ 81 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कावु कावुमटञ्चु काकासुरुडुराग
काचि रक्षिञ्चिनावय्य रामप्रभो ॥ 82 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
देवदेवोत्तमा देवेन्द्रसन्नुता
काववेनन्नु श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 83 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
भावजजनक ना बाधलन्नियुमान्पि
ये विधम्बुनैन नेलु रामप्रभो ॥ 84 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीवैष्णवुलपालि चिन्तामणिवि चाल
सेवगैकॊनि करुणचेयु रामप्रभो ॥ 85 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
भावमुन मिमुभक्ति सेविञ्चु जनुलकु
कैवल्यमॊसगु श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 86 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
गोपालुरनु गूडि यावुलनु मेपि
आपदोद्धारकुडवैन रामप्रभो ॥ 87 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नापालि श्रीराम भूपालका ननु
कापाडराव गोपाल रामप्रभो ॥ 88 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सारमौशौर्य विस्तारमौ सुन्दरा
कारसद्भक्तमन्दार रामप्रभो ॥ 89 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
शरणागतत्राण बिरुदाङ्कितम्बैन
वरमु नाकॊसगु येमरक रामप्रभो ॥ 90 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीराम रामेति श्रेष्ठमन्त्रमु सारॆ
सारॆकुनु विन्तगा जदुव रामप्रभो ॥ 91 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीराम नीनाम चिन्तनामृतपान
सारमे नादुमदि गोरु रामप्रभो ॥ 92 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
चेरि मीपाद पद्माराधनमु चेय
कोरिनानय्य श्रीरामचन्द्रप्रभो ॥ 93 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
घोरराक्षसगर्वहारि विश्वम्भरा
भूरिगुणसान्द्र विस्तार रामप्रभो ॥ 94 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मारीचमायानिवार शरसन्धान
धारुणीतनया विहार रामप्रभो ॥ 95 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
परवासुदेव यक्षयपात्र मॊसगि न
न्नरसि पोषिम्पगदवय्य रामप्रभो ॥ 96 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
परधनम्बुनु परस्त्रील नपेक्षिञ्चु
नरुकब्बुने मोक्षमरय रामप्रभो ॥ 97 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कामादिदुर्गुण स्तोमम्बुलडग मी
नामामृतमॆ दिक्कु रामचन्द्रप्रभो ॥ 98 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
दुष्टुलगु दानवुल नष्टम्बुगा जेयगा
बुट्टितिवि कौसल्य पट्टि रामप्रभो ॥ 99 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कष्टपडलेनय्य पट्टाभिराम ना
किष्टसम्पदलिच्चि येलु रामप्रभो ॥ 100 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
केशवायनिन भवपाशमुलॊलगु स
र्वेशकोटि शशिप्रकाश रामप्रभो ॥ 101 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
नारायणा नीदु नामामृतं बॆपुडु
पारायणमु चेतु नेनु रामप्रभो ॥ 102 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
माधवायनियु सम्मोदमुन निनुगॊल्चु
साधुसज्जनदयाम्भोधि रामप्रभो ॥ 103 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
गोविन्द गोविन्द गोपालकृष्णयनि
गोपकुलु गॊनियाडु गोपरामप्रभो ॥ 104 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
विष्णुना सर्ववर्धिष्णुना तत्त्व भू
यिष्णुना निर्मितं कृष्ण रामप्रभो ॥ 105 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीधरा श्रीकरा श्रीनारसिंह गं
गाधर स्तोत्र यानन्द रामप्रभो ॥ 106 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
मत्स्यमै जलधिलो जॊच्चि सोमकुद्रुञ्चि
तॆच्चि वेदमु लजुनकिस्ति रामप्रभो ॥ 107 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कूर्मरूपमु नॊन्दि कॊण्डमूपुनदाल्चि
कूर्मितो नमृतम्बुगूर्चि रामप्रभो ॥ 108 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वराहरूपमुन वसुधगॊम्मुननॆत्ति
सुरल रक्षिञ्चु दाशरथि रामप्रभो ॥ 109 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
शरणन्न प्रह्लादु गरुणिञ्चि रक्षिम्प
नरसिंहमूर्तिवैनट्टि रामप्रभो ॥ 110 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
वामनत्वमुन भूदानमडिगियु बलिनि
भूमिक्रिन्दनडञ्चि पॊल्चु रामप्रभो ॥ 111 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
परशुरामुडनङ्ग नरपालकुलनॆल्ल
नरसिपॊरिकॊन्न दाशरथि रामप्रभो ॥ 112 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीराममूर्तिवै यारावणुनि तलल्‌
धारुणिन्‌ पडगूर्चिनावु रामप्रभो ॥ 113 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
हलधरुडवै धरास्थलिपालकुलनॆल्ल
बॊरिपुच्चि वॆलुगुमापालि रामप्रभो ॥ 114 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
सिद्धसन्नुत मनोबद्धुण्डवै नीवु
बौद्धुण्डवैति प्रबुद्ध रामप्रभो ॥ 115 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
कलिकिरूपमुदाल्चि कलियुगम्बुन नीवु
वॆलसितिवि भद्राद्रिनिलय रामप्रभो ॥ 116 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
अव्ययुडवैन नीयवतारमुल जूचि
दिव्युलैनारु मुनुलय्य रामप्रभो ॥ 117 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
श्रीरामनाममे वेलस्मरियिन्तु
स्वामि दयचेयु सम्पदनु रामप्रभो ॥ 118 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
अप्प शेषशयन यॆप्पुडु निनु मरुव
नॊप्पुगा ब्रोवु वरदप्प रामप्रभो ॥ 119 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
तॆप्परम्बुलुदीर्चि यिप्पुडेमरक नन्‌
द्रिप्पु बॆट्टक चेपट्टु रामप्रभो ॥ 120 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पट्टाभिराम नीपादपद्माश्रयुल
पालिम्पुमा भद्रशैलि रामप्रभो ॥ 121 ॥
पाहिरामप्रभो ॥
पट्टाभिराम निनु प्रभुडवनि नम्मितिनि
कष्टपॆट्टकनु चेपट्टु रामप्रभो ॥ 122 ॥
पाहिरामप्रभो ॥

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