Goddess Raja Rajeshwari

श्री राज राजेश्वरी अष्टकम्

(Shri Raja Rajeshwari Ashtakam)

Adi Shankaracharya

Attributed to Adi Shankaracharya, this powerful stotra invokes Goddess Raja Rajeshwari, the supreme sovereign of the universe who embodies the divine feminine energy. The verses poetically list her various manifestations, highlighting her role as the bestower of material prosperity and spiritual liberation. Reciting this hymn with devotion is believed to grant grace, dissolve inner obstacles, and bestow the blessings of royalty and wisdom. By meditating on her luminous form as the Chidrupa or pure consciousness, the devotee aligns their inner spirit with the cosmic power of the Great Goddess, seeking protection and ultimate bliss.

अम्बा शाम्भवि चन्द्रमौलिरबलाऽपर्णा उमा पार्वती
काली हैमवती शिवा त्रिनयनी कात्यायनी भैरवी
सावित्री नवयौवना शुभकरी साम्राज्यलक्ष्मीप्रदा
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 1 ॥
अम्बा मोहिनि देवता त्रिभुवनी आनन्दसन्दायिनी
वाणी पल्लवपाणि वेणुमुरलीगानप्रिया लोलिनी
कल्याणी उडुराजबिम्बवदना धूम्राक्षसंहारिणी
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 2 ॥
अम्बा नूपुररत्नकङ्कणधरी केयूरहारावली
जातीचम्पकवैजयन्तिलहरी ग्रैवेयकैराजिता
वीणावेणुविनोदमण्डितकरा वीरासनेसंस्थिता
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 3 ॥
अम्बा रौद्रिणि भद्रकाली बगला ज्वालामुखी वैष्णवी
ब्रह्माणी त्रिपुरान्तकी सुरनुता देदीप्यमानोज्ज्वला
चामुण्डा श्रितरक्षपोषजननी दाक्षायणी पल्लवी
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 4 ॥
अम्बा शूल धनुः कुशाङ्कुशधरी अर्धेन्दुबिम्बाधरी
वाराही मधुकैटभप्रशमनी वाणीरमासेविता
मल्लद्यासुरमूकदैत्यमथनी माहेश्वरी अम्बिका
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 5 ॥
अम्बा सृष्टविनाशपालनकरी आर्या विसंशोभिता
गायत्री प्रणवाक्षरामृतरसः पूर्णानुसन्धीकृता
ओङ्कारी विनुतासुतार्चितपदा उद्दण्डदैत्यापहा
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 6 ॥
अम्बा शाश्वत आगमादिविनुता आर्या महादेवता
या ब्रह्मादिपिपीलिकान्तजननी या वै जगन्मोहिनी
या पञ्चप्रणवादिरेफजननी या चित्कलामालिनी
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 7 ॥
अम्बापालित भक्तराजदनिशं अम्बाष्टकं यः पठेत्
अम्बालोककटाक्षवीक्ष ललितं चैश्वर्यमव्याहतम्
अम्बा पावनमन्त्रराजपठनादन्ते च मोक्षप्रदा
चिद्रूपी परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥ 8 ॥

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