Lord Shiva

श्री साम्ब सदाशिव अक्षरमाला स्तोत्रम् (मातृक वर्णमालिका स्तोत्रम्)

(Shri Samba Sadashiva Aksharamala Stotram)

Traditional

This profound Stotram is a linguistic masterpiece dedicated to Lord Shiva, where each verse is structured according to the Sanskrit alphabet sequence. By invoking the Lord through the Aksharamala or garland of letters, the devotee aligns their consciousness with the primordial vibrations of the cosmos. It highlights Shiva as the embodiment of beauty, the destroyer of ignorance, and the ultimate protector. Chanting this hymn serves as a meditative practice that purifies the speech and mind, removes karmic obstacles, bestows spiritual wisdom, and fosters deep devotion, ultimately guiding the seeker toward the state of eternal bliss and oneness with Sadashiva.

साम्बसदाशिव साम्बसदाशिव साम्बसदाशिव साम्बशिव ॥
अद्भुतविग्रह अमराधीश्वर अगणितगुणगण अमृतशिव ॥
आनन्दामृत आश्रितरक्षक आत्मानन्द महेश शिव ॥
इन्दुकलाधर इन्द्रादिप्रिय सुन्दररूप सुरेश शिव ॥
ईश सुरेश महेश जनप्रिय केशवसेवितपाद शिव ॥
उरगादिप्रियभूषण शङ्कर नरकविनाश नटेश शिव ॥
ऊर्जितदानवनाश परात्पर आर्जितपापविनाश शिव ॥
ऋग्वेदश्रुतिमौलिविभूषण रविचन्द्राग्नि त्रिनेत्र शिव ॥
ॠपमनादि प्रपञ्चविलक्षण तापनिवारण तत्त्व शिव ॥
लिङ्गस्वरूप सर्वबुधप्रिय मङ्गलमूर्ति महेश शिव ॥
लूताधीश्वर रूपप्रियशिव वेदान्तप्रियवेद्य शिव ॥
एकानेकस्वरूप विश्वेश्वर योगिहृदिप्रियवास शिव ॥
ऐश्वर्याश्रय चिन्मय चिद्घन अच्युतानन्त महेश शिव ॥
ओङ्कारप्रिय उरगविभूषण ह्रीङ्कारादि महेश शिव ॥
औरसलालित अन्तकनाशन गौरिसमेत गिरीश शिव ॥
अम्बरवास चिदम्बरनायक तुम्बुरुनारदसेव्य शिव ॥
आहारप्रिय आदिगिरीश्वर भोगादिप्रिय पूर्ण शिव ॥
कमलाक्षार्चित कैलासप्रिय करुणासागर कान्ति शिव ॥
खड्गशूलमृगढक्काद्यायुध विक्रमरूप विश्वेश शिव ॥
गङ्गागिरिसुतवल्लभ गुणहित शङ्कर सर्वजनेश शिव ॥
घातकभञ्जन पातकनाशन गौरिसमेत गिरीश शिव ॥
ङङाश्रितश्रुतिमौलिविभूषण वेदस्वरूप विश्वेश शिव ॥
चण्डविनाशन सकलजनप्रिय मण्डलाधीश महेश शिव ॥
छत्रकिरीटसुकुण्डलशोभित पुत्रप्रिय भुवनेश शिव ॥
जन्मजरामृतिनाशन कल्मषरहित तापविनाश शिव ॥
झङ्काराश्रय भृङ्गिरिटिप्रिय ओङ्कारेश महेश शिव ॥
ज्ञानाज्ञानविनाशक निर्मल दीनजनप्रिय दीप्त शिव ॥
टङ्काद्यायुधधारण सत्वर ह्रीङ्कारैदि सुरेश शिव ॥
ठङ्कस्वरूपा सहकारोत्तम वागीश्वर वरदेश शिव ॥
डम्बविनाशन डिण्डिमभूषण अम्बरवास चिदीश शिव ॥
ढण्ढण्डमरुक धरणीनिश्चल ढुण्ढिविनायकसेव्य शिव ॥
णलिनविलोचन नटनमनोहर अलिकुलभूषण अमृत शिव ॥
तत्त्वमसीत्यादि वाक्यस्वरूपक नित्यानन्द महेश शिव ॥
स्थावर जङ्गम भुवनविलक्षण भावुकमुनिवरसेव्य शिव ॥
दुःखविनाशन दलितमनोन्मन चन्दनलेपितचरण शिव ॥
धरणीधर शुभ धवलविभास्वर धनदादिप्रियदान शिव ॥
नानामणिगणभूषण निर्गुण नटनजनसुप्रियनाट्य शिव ॥
पन्नगभूषण पार्वतिनायक परमानन्द परेश शिव ॥
फालविलोचन भानुकोटिप्रभ हालाहलधर अमृत शिव ॥
बन्धविनाशन बृहदीशामरस्कन्दादिप्रिय कनक शिव ॥
भस्मविलेपन भवभयनाशन विस्मयरूप विश्वेश शिव ॥
मन्मथनाशन मधुपानप्रिय मन्दरपर्वतवास शिव ॥
यतिजनहृदयनिवासित ईश्वर विधिविष्ण्वादि सुरेश शिव ॥
रामेश्वर रमणीयमुखाम्बुज सोमेश्वर सुकृतेश शिव ॥
लङ्काधीश्वर सुरगणसेवित लावण्यामृतलसित शिव ॥
वरदाभयकर वासुकिभूषण वनमालादिविभूष शिव ॥
शान्तिस्वरूप जगत्त्रय चिन्मय कान्तिमतीप्रिय कनक शिव ॥
षण्मुखजनक सुरेन्द्रमुनिप्रिय षाड्गुण्यादिसमेत शिव ॥
संसारार्णवनाशन शाश्वतसाधुहृदिप्रियवास शिव ॥
हर पुरुषोत्तम अद्वैतामृतपूर्ण मुरारिसुसेव्य शिव ॥
लालितभक्तजनेश निजेश्वर कालिनटेश्वर काम शिव ॥
क्षररूपादिप्रियान्वित सुन्दर साक्षिजगत्त्रय स्वामि शिव ॥
साम्बसदाशिव साम्बसदाशिव साम्बसदाशिव साम्बशिव ॥
इति श्रीसाम्बसदाशिव मातृकावर्णमालिका स्तोत्रम् ।

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