Lord Bhairava

श्री स्वर्णाकर्षण भैरव अष्टोत्तर शत नामावलि

(Shri Swarnakarshana Bhairava Ashtottara Shata Namavali)

Traditional

This sacred text lists the one hundred and eight names of Swarnakarshana Bhairava, an auspicious form of Lord Shiva known as the attractor of gold and wealth. Chanting these names is believed to alleviate poverty, bestow financial stability, and dissolve karmic debts. As the manifestation who sustains the universe through material and spiritual prosperity, Bhairava protects his devotees from misfortune. Engaging with this namavali with devotion clears obstacles, invites divine grace, and fosters a harmonious balance between worldly success and ultimate liberation, making it a powerful practice for those seeking both material abundance and spiritual enlightenment.

ॐ भैरवेशाय नमः .
ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मने नमः
ॐ त्रैलोक्यवन्धाय नमः
ॐ वरदाय नमः
ॐ वरात्मने नमः
ॐ रत्नसिंहासनस्थाय नमः
ॐ दिव्याभरणशोभिने नमः
ॐ दिव्यमाल्यविभूषाय नमः
ॐ दिव्यमूर्तये नमः
ॐ अनेकहस्ताय नमः ॥ 10 ॥
ॐ अनेकशिरसे नमः
ॐ अनेकनेत्राय नमः
ॐ अनेकविभवे नमः
ॐ अनेककण्ठाय नमः
ॐ अनेकांसाय नमः
ॐ अनेकपार्श्वाय नमः
ॐ दिव्यतेजसे नमः
ॐ अनेकायुधयुक्ताय नमः
ॐ अनेकसुरसेविने नमः
ॐ अनेकगुणयुक्ताय नमः ॥20 ॥
ॐ महादेवाय नमः
ॐ दारिद्र्यकालाय नमः
ॐ महासम्पद्प्रदायिने नमः
ॐ श्रीभैरवीसंयुक्ताय नमः
ॐ त्रिलोकेशाय नमः
ॐ दिगम्बराय नमः
ॐ दिव्याङ्गाय नमः
ॐ दैत्यकालाय नमः
ॐ पापकालाय नमः
ॐ सर्वज्ञाय नमः ॥ 30 ॥
ॐ दिव्यचक्षुषे नमः
ॐ अजिताय नमः
ॐ जितमित्राय नमः
ॐ रुद्ररूपाय नमः
ॐ महावीराय नमः
ॐ अनन्तवीर्याय नमः
ॐ महाघोराय नमः
ॐ घोरघोराय नमः
ॐ विश्वघोराय नमः
ॐ उग्राय नमः ॥ 40 ॥
ॐ शान्ताय नमः
ॐ भक्तानां शान्तिदायिने नमः
ॐ सर्वलोकानां गुरवे नमः
ॐ प्रणवरूपिणे नमः
ॐ वाग्भवाख्याय नमः
ॐ दीर्घकामाय नमः
ॐ कामराजाय नमः
ॐ योषितकामाय नमः
ॐ दीर्घमायास्वरूपाय नमः
ॐ महामायाय नमः ॥ 50 ॥
ॐ सृष्टिमायास्वरूपाय नमः
ॐ निसर्गसमयाय नमः
ॐ सुरलोकसुपूज्याय नमः
ॐ आपदुद्धारणभैरवाय नमः
ॐ महादारिद्र्यनाशिने नमः
ॐ उन्मूलने कर्मठाय नमः
ॐ अलक्ष्म्याः सर्वदा नमः
ॐ अजामलवद्धाय नमः
ॐ स्वर्णाकर्षणशीलाय नमः
ॐ दारिद्र्य विद्वेषणाय नमः ॥ 60 ॥
ॐ लक्ष्याय नमः
ॐ लोकत्रयेशाय नमः
ॐ स्वानन्दं निहिताय नमः
ॐ श्रीबीजरूपाय नमः
ॐ सर्वकामप्रदायिने नमः
ॐ महाभैरवाय नमः
ॐ धनाध्यक्षाय नमः
ॐ शरण्याय नमः
ॐ प्रसन्नाय नमः
ॐ आदिदेवाय नमः ॥ 70 ॥
ॐ मन्त्ररूपाय नमः
ॐ मन्त्ररूपिणे नमः
ॐ स्वर्णरूपाय नमः
ॐ सुवर्णाय नमः
ॐ सुवर्णवर्णाय नमः
ॐ महापुण्याय नमः
ॐ शुद्धाय नमः
ॐ बुद्धाय नमः
ॐ संसारतारिणे नमः
ॐ प्रचलाय नमः ॥ 80 ॥
ॐ बालरूपाय नमः
ॐ परेषां बलनाशिने नमः
ॐ स्वर्णसंस्थाय नमः
ॐ भूतलवासिने नमः
ॐ पातालवासाय नमः
ॐ अनाधाराय नमः
ॐ अनन्ताय नमः
ॐ स्वर्णहस्ताय नमः
ॐ पूर्णचन्द्रप्रतीकाशाय नमः
ॐ वदनाम्भोजशोभिने नमः ॥ 90 ॥
ॐ स्वरूपाय नमः
ॐ स्वर्णालङ्कारशोभिने नमः
ॐ स्वर्णाकर्षणाय नमः
ॐ स्वर्णाभाय नमः
ॐ स्वर्णकण्ठाय नमः
ॐ स्वर्णाभाम्बरधारिणे नमः
ॐ स्वर्णसिंहानस्थाय नमः
ॐ स्वर्णपादाय नमः
ॐ स्वर्णभपादाय नमः
ॐ स्वर्णकाञ्चीसुशोभिने नमः ॥ 100 ॥
ॐ स्वर्णजङ्घाय नमः
ॐ भक्तकामदुधात्मने नमः
ॐ स्वर्णभक्ताय नमः
ॐ कल्पवृक्षस्वरूपिणे नमः
ॐ चिन्तामणिस्वरूपाय नमः
ॐ बहुस्वर्णप्रदायिने नमः
ॐ हेमाकर्षणाय नमः
ॐ भैरवाय नमः ॥ 108 ॥
॥ इति श्री स्वर्णाकर्षण भैरव अष्टोत्तर शतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥

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