Lord Vayu

मध्व नाम (श्रीपादराज विरचित)

(Madhva Nama)

Sripadaraja

Madhva Nama is a profound devotional composition authored by the great Haridasa saint Sripadaraja. The stotra serves as a dedicated tribute to Sri Madhvacharya, revered by followers of the Dvaita philosophy as the third avatar of Vayu. Through poetic verses set to raga Saurashtra, the composition highlights the supreme role of Vayu as the primary mediator between the individual soul and Lord Vishnu. Reciting this hymn is believed to cleanse the mind of ignorance, strengthen devotion to the Supreme Being, and bestow the grace of the Guru, ultimately guiding the devotee toward spiritual liberation.

(राग – सौराष्ट्र, आदिताल)
जय जय जगत्राण जगदॊलगॆ सुत्राण
अखिलगुण सद्धाम मध्वनाम ॥ प ॥
आव कच्छप रूपदिन्दलण्डोदकव
ओवि धरिसिद शेषमूरुतियनु
आववन बलिविडिदु हरिय सुररैय्दुवरु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥ 1 ॥
आववनु देहदॊलगिरलु हरि नॆलसिहनु
आववनु तॊलगॆ हरि ता तॊलगुव
आववनु देहदा ऒल हॊरगॆ नियामकनु
आ वायु नम्म कुलगुरुरायनु ॥ 2 ॥
करुणाभिमानि सुररु देहव बिडलु
कुरुड किवुड मूकनॆन्दॆनिसुव
परम मुख्य प्राण तॊलगला देहवनु
अरितु पॆणनॆन्दु पेलुवरु बुधजन ॥ 3 ॥
सुररॊलगॆ नररॊलगॆ सर्वभूतगलॊलगॆ
परतरनॆनिसि नियामिसि नॆलसिह
हरियनल्लदॆ बगॆय अन्यरनु लोकदॊलु
गुरुकुलतिलक मुख्य पवमाननु ॥ 4 ॥
त्रेतॆयलि रघुपतिय सेवॆ माडुवॆनॆन्दु
वातसुत हनुमन्तनॆन्दॆनिसिद
पोत भावदि तरणि बिम्बक्कॆ लङ्घिसिद
ईतगॆणॆयारु मूलोकदॊलगॆ ॥ 5 ॥
तरणिगभिमुखनागि शब्दशास्त्रव पठिसि
उरवणिसि हिन्दुमुन्दागि नडॆद
परम पवमान सुत उदयास्त शैलगल
भरदियैदिदगीतगुपमॆ उण्टे ॥ 6 ॥
अखिल वेदगल सार पठिसिदनु मुन्नल्लि
निखिल व्याकरणगल इव पेलिद
मुखदल्लि किञ्चिदपशब्द इवगिल्लॆन्दु
मुख्यप्राणननु रामननुकरिसिद ॥ 7 ॥
तरणिसुतननु काय्दु शरधियनु नॆरॆदाटि
धरणिसुतॆयल कण्डु धनुजरॊडनॆ
भरदि रणवनॆ माडि गॆलिदु दिव्यास्त्रगल
उरुहि लङ्कॆय बन्द हनुमन्तनु ॥ 8 ॥
हरिगॆ चूडामणियनित्तु हरिगल कूडि
शरधियनु कट्टि बलु रक्कसरनु
ऒरसि रणदलि दशशिरन हुडिगुट्टिद
मॆरॆद हनुमन्त बलवन्त धीर ॥ 9 ॥
उरगबन्धकॆ सिलुकि कपिवररु मैमरॆयॆ
तरणिकुलतिलकनाज्ञॆय तालिद
गिरिसहित सञ्जीवनव कित्तु तन्दित्त
हरिवरगॆ सरियुण्टॆ हनुमन्तगॆ ॥ 10 ॥
विजय रघुपति मॆच्चि धरणिसुतॆयलिगीयॆ
भजिसि मौक्तिकद हारवनु पडॆद
अजपदवियनु राम कॊडॆवॆनॆनॆ हनुमन्त
निज भकुतियनॆ बेडि वरव पडॆद ॥ 11 ॥
आ मारुतनॆ भीमनॆनिसि द्वापरदल्लि
सोमकुलदलि जनिसि पार्थनॊडनॆ
भीम विक्रम रक्कसर मुरिदॊट्टिद
आ महिम नम्म कुलगुरुरायनु ॥ 12 ॥
करदिन्द शिशुभावनाद भीमन बिडलु
गिरवडिदु शतशृङ्गवॆन्दॆनितु
हरिगल हरिगलिं करिगल करिगलिं
अरॆव वीररिगॆ सुर नररु सरिये ॥ 13 ॥
कुरुप गरलवनिक्कॆ नॆरॆ उण्डु तेगि
हसिदुरगगल म्यालॆ बिडलदनॊरसिद
अरगिनरमनॆयल्लि उरियनिक्कलु वीर
धरिसि जाह्नविगॊय्द तन्ननुजर ॥ 14 ॥
अल्लिर्द बक हिडिम्बकरॆम्ब रक्कसर
निल्लदॊरसिद लोककण्टकरनु
बल्लिदसुरर गॆलिदु द्रौपदिय कैविडिदु
ऎल्ल सुजनरिगॆ हरुषव तोरिद ॥ 15 ॥
राजकुल वज्रनॆनिसिद मागधन सीलि
राजसूयागवनु माडिसिदनु
आजियॊलु कौरवर बलव सवरुवॆनॆन्दु
मूजगवरियॆ कङ्कण कट्टिद ॥ 16 ॥
दानवर सवरबेकॆन्दु ब्याग
माननिधि द्रौपदिय मनदिङ्गितवनरितु
काननव पॊक्कु किम्मारादिगल मुरिदु
मानिनिगॆ सौगन्धिकवनॆ तन्द ॥ 17 ॥
दुरुल कीचकनु ता द्रौपदिय चॆलुविकॆगॆ
मरुलागि करकरिय माडलवना
गरडि मनॆयलि बरसि अवनन्वयव
कुरुपनट्टिद मल्लकुलव सदॆद ॥ 18 ॥
कौरवर बल सवरि वैरिगल नॆग्गॊत्ति
ओरन्तॆ कौरवन मुरिदु मॆरॆद
वैरि दुश्शासन्न रणदल्लि ऎडगॆडहि
वीर नरहरिय लीलॆय तोरिद ॥ 19 ॥
गुरुसुतनु सङ्गरदि नारायणास्त्रवनु
उरवणिसि बिडलु शस्त्रव बिसुटरु
हरिकृपॆय पडॆदिर्द भीम हुङ्कारदिं
हरिय दिव्यास्त्रवनु नॆरॆ अट्टिद ॥ 20 ॥
चण्ड विक्रमनु गदॆगॊण्डु रणदि भू
मण्डलदॊलिदिरान्त खलरनॆल्ला
हिण्डि बिसुटिह वृकोदरन प्रतापवनु
कण्डु निल्लुवरारु त्रिभुवनदॊलु ॥ 21 ॥
दानवरु कलियुगदॊलवतरिसि विबुधरॊलु
वेनन मतवनरुहलदनरितु
ज्ञानि ता पवमान भूतलदॊलवतरिसि
माननिधि मध्वाख्यनॆन्दॆनिसिद ॥ 22 ॥
अर्भकतनदॊलैदि बदरियलि मध्वमुनि
निर्भयदि सकल शास्त्रव पठिसिद
उर्वियॊलु मायॆ बीरलु तत्त्वमार्गवनु
ओर्व मध्वमुनि तोर्द सुजनर्गॆ ॥ 23 ॥
सर्वेश हरि विश्व ऎल्ल ता पुसियॆम्ब
दुर्वादिगल मतव नॆरॆ खण्डिसि
सर्वेश हरि विश्व सत्यवॆन्दरुहिदा
शर्वादि गीर्वाण सन्ततियलि ॥ 24 ॥
बदरिकाश्रमकॆ पुनरपियैदि व्यासमुनि
पदकॆरगि अखिल वेदार्थगलनु
पदुमनाभन मुखदि तिलिदु ब्रह्मत्व
यैदिद मध्वमुनिरायगभिवन्दिपॆ ॥ 25 ॥
जय जयतु दुर्वादिमततिमिर मार्ता0ड
जयजयतु वादिगजपञ्चानन
जयजयतु चार्वाकगर्वपर्वतकुलिश
जयजयतु जगन्नाथ मध्वनाथ ॥ 26 ॥
तुङ्गकुल गुरुवरन हृत्कमलदलि निलिसि
भङ्गविल्लदॆ सुखव सुजनकॆल्ल
हिङ्गदॆ कॊडुव नम्म मध्वान्तरात्मक
रङ्गविठलनॆन्दु नॆरॆ सारिरै ॥ 27 ॥
फलश्रुति (जगन्नाथदास विरचित)
सोम सूर्योपरागदि गोसहस्रगल
भूमिदेवरिगॆ सुरनदिय तटदि
श्रीमुकुन्दार्पणवॆनुत कॊट्ट फलमक्कु
ई मध्वनाम बरॆदोदिदर्गॆ ॥ 1 ॥
पुत्ररिल्लदवरु सत्पुत्ररैदुवरु
सर्वत्रदलि दिग्विजयवहुदु सकल
शत्रुगलु कॆडुवरपमृत्यु बरलञ्जुवुदु
सूत्रनामकन संस्तुति मात्रदि ॥ 2 ॥
श्रीपादराय पेलिद मध्वनाम सं
तापकलॆदखिल सौख्यवनीवुदु
श्रीपति जगन्नाथविठलन तोरि भव
कूपारदिन्द कडॆ हायिसुवुदु ॥ 3 ॥

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