Lord Sudarshana

सुदर्शन अष्टकम् (वेदान्ताचार्य कृतम्)

(Sudarshana Ashtakam)

Vedanta Desika

Sudarshana Ashtakam is a powerful hymn composed by the great philosopher-saint Vedanta Desika in praise of Lord Sudarshana, the divine discus of Lord Vishnu. The stotra highlights the discus as a manifestation of the Lord's supreme power, capable of destroying sins and protecting devotees from all fears. Traditionally chanted to seek relief from malefic planetary influences and negative energies, this rhythmic composition serves as an invocation of divine grace. Its recitation is believed to grant mental clarity, courage, and spiritual protection, aligning the seeker with the Lord's cosmic order and eternal wisdom.

प्रतिभटश्रेणिभीषण वरगुणस्तोमभूषण
जनिभयस्थानतारण जगदवस्थानकारण ।
निखिलदुष्कर्मकर्शन निगमसद्धर्मदर्शन
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 1 ॥
शुभजगद्रूपमण्डन सुरजनत्रासखण्डन
शतमखब्रह्मवन्दित शतपथब्रह्मनन्दित ।
प्रथितविद्वत्सपक्षित भजदहिर्बुध्न्यलक्षित
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 2 ॥
निजपदप्रीतसद्गण निरुपथिस्फीतषड्गुण
निगमनिर्व्यूढवैभव निजपरव्यूहवैभव ।
हरिहयद्वेषिदारण हरपुरप्लोषकारण
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 3 ॥
स्फुटतटिज्जालपिञ्जर पृथुतरज्वालपञ्जर
परिगतप्रत्नविग्रह परिमितप्रज्ञदुर्ग्रह ।
प्रहरणग्राममण्डित परिजनत्राणपण्डित
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 4 ॥
भुवननेतस्त्रयीमय सवनतेजस्त्रयीमय
निरवधिस्वादुचिन्मय निखिलशक्तेजगन्मय ।
अमितविश्वक्रियामय शमितविश्वग्भयामय
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 5 ॥
महितसम्पत्सदक्षर विहितसम्पत्षडक्षर
षडरचक्रप्रतिष्ठित सकलतत्त्वप्रतिष्ठित ।
विविधसङ्कल्पकल्पक विबुधसङ्कल्पकल्पक
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 6 ॥
प्रतिमुखालीढबन्धुर पृथुमहाहेतिदन्तुर
विकटमालापरिष्कृत विविधमायाबहिष्कृत ।
स्थिरमहायन्त्रयन्त्रित दृढदयातन्त्रयन्त्रित
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 7 ॥
दनुजविस्तारकर्तन दनुजविद्याविकर्तन
जनितमिस्राविकर्तन भजदविद्यानिकर्तन ।
अमरदृष्टस्वविक्रम समरजुष्टभ्रमिक्रम
जय जय श्रीसुदर्शन जय जय श्रीसुदर्शन ॥ 8 ॥
द्विचतुष्कमिदं प्रभूतसारं
पठतां वेङ्कटनायकप्रणीतम् ।
विषमेऽपि मनोरथः प्रधावन्
न विहन्येत रथाङ्गधुर्यगुप्तः ॥ 9 ॥
इति श्री वेदान्ताचार्यस्य कृतिषु सुदर्शनाष्टकम् ।

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