Lord Venkateswara

श्री वेङ्कटेश्वर अष्टोत्तर शत नामावलि

(Sri Venkateswara Ashtottara Shatanamavali)

From Brahmanda Purana

This sacred text consists of one hundred and eight names of Lord Venkateswara, the presiding deity of the Tirumala Tirupati Temple. Originating from the Brahmanda Purana, this stotra is a powerful tool for devotees seeking the grace of Lord Vishnu in his manifestation as the protector of the Kali Yuga. Chanting these names with sincerity is believed to purify the mind, eliminate ego, and grant the practitioner spiritual liberation and material prosperity. It serves as a meditative bridge, allowing the devotee to contemplate the divine attributes and infinite mercy of the Lord of the Seven Hills.

ॐ श्री वेङ्कटेशाय नमः
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ॐ लक्ष्मीपतये नमः
ॐ अनामयाय नमः
ॐ अमृताशाय नमः
ॐ जगद्वन्द्याय नमः
ॐ गोविन्दाय नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ प्रभवे नमः
ॐ शेषाद्रिनिलयाय नमः (10)
ॐ देवाय नमः
ॐ केशवाय नमः
ॐ मधुसूदनाय नमः
ॐ अमृताय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ कृष्णाय नमः
ॐ श्रीहरये नमः
ॐ ज्ञानपञ्जराय नमः
ॐ श्रीवत्सवक्षसे नमः
ॐ सर्वेशाय नमः
ॐ गोपालाय नमः
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
ॐ गोपीश्वराय नमः
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः
ॐ व्तॆकुण्ठ पतये नमः
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ सुधातनवे नमः
ॐ यादवेन्द्राय नमः
ॐ नित्य यौवनरूपवते नमः
ॐ चतुर्वेदात्मकाय नमः (30)
ॐ विष्णवे नमः
ॐ अच्युताय नमः
ॐ पद्मिनीप्रियाय नमः
ॐ धरापतये नमः
ॐ सुरपतये नमः
ॐ निर्मलाय नमः
ॐ देवपूजिताय नमः
ॐ चतुर्भुजाय नमः
ॐ चक्रधराय नमः
ॐ त्रिधाम्ने नमः (40)
ॐ त्रिगुणाश्रयाय नमः
ॐ निर्विकल्पाय नमः
ॐ निष्कलङ्काय नमः
ॐ निरान्तकाय नमः
ॐ निरञ्जनाय नमः
ॐ विराभासाय नमः
ॐ नित्यतृप्ताय नमः
ॐ निर्गुणाय नमः
ॐ निरुपद्रवाय नमः
ॐ गदाधराय नमः (50)
ॐ शार्-ङ्गपाणये नमः
ॐ नन्दकिने नमः
ॐ शङ्खधारकाय नमः
ॐ अनेकमूर्तये नमः
ॐ अव्यक्ताय नमः
ॐ कटिहस्ताय नमः
ॐ वरप्रदाय नमः
ॐ अनेकात्मने नमः
ॐ दीनबन्धवे नमः
ॐ आर्तलोकाभयप्रदाय नमः (60)
ॐ आकाशराजवरदाय नमः
ॐ योगिहृत्पद्ममन्दिराय नमः
ॐ दामोदराय नमः
ॐ जगत्पालाय नमः
ॐ पापघ्नाय नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
ॐ शिंशुमाराय नमः
ॐ जटामकुट शोभिताय नमः
ॐ शङ्खमद्योल्लस-न्मञ्जुकिङ्किण्याढ्यकरण्डकाय नमः (70)
ॐ नीलमोघश्याम तनवे नमः
ॐ बिल्वपत्रार्चन प्रियाय नमः
ॐ जगद्व्यापिने नमः
ॐ जगत्कर्त्रे नमः
ॐ जगत्साक्षिणे नमः
ॐ जगत्पतये नमः
ॐ चिन्तितार्थप्रदाय नमः
ॐ जिष्णवे नमः
ॐ दाशार्हाय नमः
ॐ दशरूपवते नमः (80)
ॐ देवकी नन्दनाय नमः
ॐ शौरये नमः
ॐ हयग्रीवाय नमः
ॐ जनार्दनाय नमः
ॐ कन्याश्रवणतारेज्याय नमः
ॐ पीताम्बरधराय नमः
ॐ अनघाय नमः
ॐ वनमालिने नमः
ॐ पद्मनाभाय नमः
ॐ मृगयासक्त मानसाय नमः (90)
ॐ अश्वारूढाय नमः
ॐ खड्गधारिणे नमः
ॐ धनार्जन समुत्सुकाय नमः
ॐ घनसार लसन्मध्यकस्तूरी तिलकोज्ज्वलाय नमः
ॐ सच्चितानन्दरूपाय नमः
ॐ जगन्मङ्गल दायकाय नमः
ॐ यज्ञरूपाय नमः
ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
ॐ चिन्मयाय नमः
ॐ परमेश्वराय नमः (100)
ॐ परमार्थप्रदायकाय नमः
ॐ शान्ताय नमः
ॐ श्रीमते नमः
ॐ दोर्दण्ड विक्रमाय नमः
ॐ परात्पराय नमः
ॐ परस्मै ब्रह्मणे नमः
ॐ श्रीविभवे नमः
ॐ जगदीश्वराय नमः (108)
इति श्रीवेङ्कटेश्वराष्टोत्तर शतनामावलिः सम्पूर्णः

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