आ परात्मुनकु नित्यानपायिनियैन मा पालि अलमेलुमङ्गम्मकू (1)
शरणन्न दासुलकु वरमित्तुननि बिरुदु धरियिञ्चियुन्न पर दैवमुनकू
मरुव वलदी बिरुदु निरतमनि पतिनि एमरनीयनलमेलु मङ्गम्मकू (2)
आनन्द निलयमन्दनिशम्बु वसियिञ्चि दीनुलनु रक्षिञ्चु देवुनकुनू
कानुकल नॊनगूर्चि घनमुगा विभुनि सन्मानिञ्चु अलमेलु मङ्गम्मकू (3)
परमॊसग ना वन्तु नरुलकनि वैकुण्ठमरचेत चूपु जगदात्मुनकुनू
सिरुलॊसग तन वन्तु सिद्धमनि नायकुनि उरमुपै कॊलुवुन्न शरधिसुतकू (4)
तॆलिवितो मुडुपुलिटु तॆम्मु तॆम्मनि परुष नलिगिञ्चि गैकॊनॆडि अच्युतुनकू
ऎलमि पाकम्बु जेयिञ्चि अन्दरकन्न मलयकॆपुडॊसगॆ महामातकू (5)
मरियु चित्रविचित्र मण्टपावलुलकुनु तिरुवीधुलकु दिव्य तीर्थमुलकू
परग कनगोपुर प्राकारततुलकुनु चिरमुलैतगु कनक शिखरमुलकू (6)
तरचैन धर्मसत्रमुलकुनु फलपुष्प भरित शृङ्गारवन पङ्क्तुलकुनू
मुरुवॊप्पु उग्राणमुलकु बॊक्कसमुलकु सरसम्बुलगु पाकशाललकुनू (7)
अहि वैरि मुख्यवाहनमुलकु गॊडुगुलकु रहिनॊप्पु मकरतोरणमुलकुनू
बहुविध ध्वजमुलकु पटु वाद्य विततुलकु विहित सत्कल्याण वेदिकलकू (8)
दर चक्र मुख्य साधनमुलकु, मणिमयाभरण दिव्याम्बर प्रततुलकुनू
करचरण मुख्याङ्ग गण सहितमै शुभकरमैन दिव्य मङ्गल मूर्तिकि (9)
कलित सुज्ञानादि कल्याण गुणमुलकु, बलमॊप्पुनमित प्रभावमुनकुनू
वलगॊनिन सकलपरिवार देवतलकुनु, चॆलगि पनुलॊनरिञ्चु सेवकुलकू (10)
अलरगा ब्रह्मोत्सवादुलै सन्ततमु वलनॊप्पु नित्योत्सवम्बुलकुनू
पॊलुपॊन्दु विश्वप्रभुत्वुल्लम्बुनकु नलुवॊन्दु वर विमानम्बुलकुनू (11)
अरय तरिगॊण्ड नरहरियगुचु नन्दरिकि वरमुलॊसगे श्रीनिवासुनकुनू
मुरियुचुनु विश्वतोमुखुनिट्लु भरियिञ्चि सिरुल वॆलयुचुनुण्डु शेषाद्रिकी (12)
श्री वेङ्कटेश्वर शरणं मम ॥
