Lord Vishnu

ॐ जय जगदीश हरे

(Om Jai Jagadish Hare)

Shardhanand

Om Jai Jagadish Hare is one of the most revered Hindu aarti hymns dedicated to Lord Vishnu, the preserver of the universe. Though traditionally attributed to Shardhanand, it is sung daily in households and temples globally. This prayer praises the Lord as the protector and fulfiller of devotee aspirations. By chanting these verses with devotion, practitioners seek liberation from sorrow, the attainment of spiritual wisdom, and the removal of physical and mental afflictions. It serves as a powerful meditative tool that brings inner peace, fosters a deep personal connection with the Divine, and invites prosperity and harmony into the devotee's life.

ॐ जय जगदीश हरे

स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के सङ्कट,

दास जनों के सङ्कट,

क्षण में दूर करे,

ॐ जय जगदीश हरे ॥ 1 ॥
जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का
स्वामी दुख बिनसे मन का
सुख सम्मति घर आवे,
सुख सम्मति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 2 ॥
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी .
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 3 ॥
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तरयामी
स्वामी तुम अन्तरयामी
परब्रह्म परमेश्वर,
परब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 4 ॥
तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता
स्वामी तुम पालनकर्ता,
मैं मूरख खल कामी
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्तार
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 5 ॥
तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति,
किस विध मिलूं दयामय,
किस विध मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 6 ॥
दीनबन्धु दुखहर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी तुम मेरे
अपने हाथ उठावो,
अपनी शरण लगावो
द्वार पडा तेरे
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 7 ॥
विषय विकार मिटावो,
पाप हरो देवा,
स्वामी पाप हरो देवा,
श्रद्धा भक्ति बढावो,
श्रद्धा भक्ति बढावो,
सन्तन की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे ॥ 8 ॥

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