त्रिभुवनजनयित्रीं दुष्टधीनाशयित्रीम् ।
जनकधरणिपुत्रीं दर्पिदर्पप्रहन्त्रीं
हरिहरविधिकर्त्रीं नौमि सद्भक्तभर्त्रीम् ॥
प्रोन्मील्य शनकैरक्षी वेपमानो महाभुजः ॥ १ ॥
भीतः कृताञ्जलिपुटः प्रोवाच परमेश्वरीम् ॥ २ ॥
न जाने त्वां महादेवि यथावद्ब्रूहि पृच्छते ॥ ३ ॥
व्याजहार रघुव्याघ्रं योगिनामभयप्रदा ॥ ४ ॥
अनन्यामव्ययामेकां यां पश्यन्ति मुमुक्षवः ॥ ५ ॥
शाश्वती सर्वविज्ञाना सर्वमूर्तिप्रवर्तिका ॥ ६ ॥
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे पदमैश्वरम् ॥ ७ ॥
कोटिसूर्यप्रतीकाशं विष्वक्तेजोनिराकुलम् ॥ ८ ॥
दंष्ट्राकरालं दुर्धर्षं जटामण्डलमण्डितम् ॥ ९ ॥
प्रशाम्यत्सौम्यवदनमनन्तैश्वर्यसम्युतम् ॥ १० ॥
किरीटिनं गदाहस्तं नूपुरैरुपशोभितम् ॥ ११ ॥
शङ्खचक्रकरं काम्यं त्रिनेत्रं कृत्तिवाससम् ॥ १२ ॥
सर्वशक्तिमयं शान्तं सर्वाकारं सनातनम् ॥ १३ ॥
सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ॥ १४ ॥
दृष्ट्वा च तादृशं रूपं दिव्यं माहेश्वरं पदम् ॥ १५ ॥
आत्मन्याधाय चात्मानमोङ्कारं समनुस्मरन् ॥ १६ ॥
शान्ता माहेश्वरी नित्या शाश्वती परमाक्षरा ॥ १७ ॥
अनादिरव्यया शुद्धा देवात्मा सर्वगोचरा ॥ १८ ॥
महामाहेश्वरी शक्ता महादेवी निरञ्जना ॥ १९ ॥
जानकी मिथिलानन्दा राक्षसान्तविधायिनी ॥ २० ॥
उमा सर्वात्मिका विद्या ज्योतीरूपाऽयुताक्षरी ॥ २१ ॥
व्योममूर्तिर्व्योममयी व्योमाधाराऽच्युता लता ॥ २२ ॥
नन्दप्रथमजा नाभिरमृतस्यान्तसंश्रया ॥ २३ ॥
प्राणेश्वरी प्राणरूपा प्रधानपुरुषेश्वरी ॥ २४ ॥
सर्वकार्यनियन्त्री च सर्वभूतेश्वरेश्वरी ॥ २५ ॥
आकाशयोनिर्योगस्था सर्वयोगेश्वरेश्वरी ॥ २६ ॥
बालिका तरुणी वृद्धा वृद्धमाता जरातुरा ॥ २७ ॥
संसारयोनिः सकला सर्वशक्तिसमुद्भवा ॥ २८ ॥
प्राणशक्तिः प्राणविद्या योगिनी परमा कला ॥ २९ ॥
अनाद्यनन्तविभवा परात्मा पुरुषो बली ॥ ३० ॥
शब्दयोनिः शब्दमयी नादाख्या नादविग्रहा ॥ ३१ ॥
पुराणी चिन्मयी पुंसामादिः पुरुषरूपिणी ॥ ३२ ॥
जन्ममृत्युजरातीता सर्वशक्तिसमन्विता ॥ ३३ ॥
क्षेत्रज्ञा शक्तिरव्यक्तलक्षणा मलवर्जिता ॥ ३४ ॥
महामाया समुत्पन्ना तामसी पौरुषं ध्रुवा ॥ ३५ ॥
स्वकार्या कार्यजननी ब्रह्मास्या ब्रह्मसंश्रया ॥ ३६ ॥
वैराग्यैश्वर्यधर्मात्मा ब्रह्ममूर्तिर्हृदिस्थिता ॥ ३७ ॥
सुखदा शुभदा सत्या शुभा सङ्क्षोभकारिणी ॥ ३८ ॥
ईश्वराणी च शर्वाणी शङ्करार्धशरीरिणी ॥ ३९ ॥
माहेश्वरी समुत्पन्ना भुक्तिमुक्तिफलप्रदा ॥ ४० ॥
ब्रह्मेन्द्रोपेन्द्रनमिता शङ्करेच्छानुवर्तिनी ॥ ४१ ॥
सकृद्विभाविता सर्वा समुद्रपरिशोषिणी ॥ ४२ ॥
गुणाढ्या योगदा योग्या ज्ञानमूर्तिविकासिनी ॥ ४३ ॥
सरोजनिलया शुभ्रा योगनिद्रा सुदर्शना ॥ ४४ ॥
वासवी वरदा वाच्या कीर्तिः सर्वार्थसाधिका ॥ ४५ ॥
गुह्यविद्याऽऽत्मविद्या च सर्वविद्याऽऽत्मभाविता ॥ ४६ ॥
नाभिः सुनाभिः सुकृतिर्माधवी नरवाहिनी ॥ ४७ ॥
शोभा वंशकरी लीला मानिनी परमेष्ठिनी ॥ ४८ ॥
महानुभावमध्यस्था महामहिषमर्दिनी ॥ ४९ ॥
कान्ता चित्राम्बरधरा दिव्याभरणभूषिता ॥ ५० ॥
निर्यन्त्रा मन्त्रवाहस्था नन्दिनी भद्रकालिका ॥ ५१ ॥
वृषासनगता गौरी महाकाली सुरार्चिता ॥ ५२ ॥
विरूपाक्षी लेलिहाना महासुरविनाशिनी ॥ ५३ ॥
विचित्ररत्नमुकुटा प्रणतर्धिविवर्धिनी ॥ ५४ ॥
विरूपा च सुरूपा च भीमा मोक्षप्रदायिनी ॥ ५५ ॥
निर्गुणा नित्यविभवा निःसारा निरपत्रपा ॥ ५६ ॥
दीक्षा विद्याधरी दीप्ता महेन्द्रविनिपातिनी ॥ ५७ ॥
सर्वेश्वरप्रिया तार्क्षी समुद्रान्तरवासिनी ॥ ५८ ॥
कामधेनुर्वेदगर्भा धीमती मोहनाशिनी ॥ ५९ ॥
ज्वालामालासहस्राढ्या देवदेवी मनोन्मनी ॥ ६० ॥
महाभगवती भव्या वसुदेवसमुद्भवा ॥ ६१ ॥
ज्ञान ज्ञेया जरातीता वेदान्तविषया गतिः ॥ ६२ ॥
योगमाया विभावज्ञा महामोहा महीयसी ॥ ६३ ॥
बीजाङ्कुरसमुद्भूतिर्महाशक्तिर्महामतिः ॥ ६४ ॥
विकृतिः शाङ्करी शास्त्री गन्धर्वयक्षसेविता ॥ ६५ ॥
महारात्री शिवानन्दा शची दुःस्वप्ननाशिनी ॥ ६६ ॥
गुहाम्बिका गुहोत्पत्तिर्महापीठा मरुत्सुता ॥ ६७ ॥
जगद्योनिर्जगन्माता जगन्मृत्युर्जरातिगा ॥ ६८ ॥
तपस्विनी समाधिस्था त्रिनेत्रा दिविसंस्थिता ॥ ६९ ॥
संसारतारिणी विद्या ब्रह्मवादिमनोलया ॥ ७० ॥
हिरण्मयी महारात्रिः संसारपरिवर्तिका ॥ ७१ ॥
उन्मीलनी सर्वसहा सर्वप्रत्ययसाक्षिणी ॥ ७२ ॥
सुसौम्या चन्द्रवदना ताण्डवासक्तमानसा ॥ ७३ ॥
जगत्प्रिया जगन्मूर्तिस्त्रिमूर्तिरमृताश्रया ॥ ७४ ॥
चक्रहस्ता विचित्राङ्गी स्रग्विणी पद्मधारिणी ॥ ७५ ॥
विद्येश्वरप्रिया विद्या विद्युज्जिह्वा जितश्रमा ॥ ७६ ॥
सहस्ररश्मि पद्मस्था महेश्वरपदाश्रया ॥ ७७ ॥
महादेवाश्रया मान्या महादेवमनोरमा ॥ ७८ ॥
विश्वेश्वरी विमानस्था विशोका शोकनाशिनी ॥ ७९ ॥
शतानन्दा सतां कीर्तिः सर्वभूतशयस्थिता ॥ ८० ॥
ब्रह्मर्षिर्ब्रह्महृदया ब्रह्मविष्णुशिवप्रिया ॥ ८१ ॥
क्षोभिका रौद्रिकाऽभेद्या भेदाभेदविवर्जिता ॥ ८२ ॥
गुह्यशक्तिर्गुणातीता सर्वदा सर्वतोमुखी ॥ ८३ ॥
सर्ववित्सर्वतोभद्रा गुह्यातीता गुहावलिः ॥ ८४ ॥
कपिला कपिलाकान्ता कनकाभा कलान्तरा ॥ ८५ ॥
पोषणी परमैश्वर्यभूतिदा भूतिभूषणा ॥ ८६ ॥
नर्मोदया भानुमती योगिज्ञेया मनोजवा ॥ ८७ ॥
सुमन्त्रा मन्त्रिणी पूर्णा ह्लादिनी क्लेशनाशिनी ॥ ८८ ॥
वेदशक्तिर्वेदमाता वेदविद्याप्रकाशिनी ॥ ८९ ॥
विश्वावस्था वीरमुक्तिर्विद्युन्माला विहायसी ॥ ९० ॥
भारती परमानन्दा परापरविभेदिका ॥ ९१ ॥
अचिन्त्याऽचिन्त्यमहिमा दुर्लेखा कनकप्रभा ॥ ९२ ॥
त्रिविक्रमपदोद्भूता धनुष्पाणिः शिरोहया ॥ ९३ ॥
भ्रान्तिः प्रभावती दीप्तिः पङ्कजायतलोचना ॥ ९४ ॥
सत्क्रिया गिरिजा नित्यशुद्धा पुष्पनिरन्तरा ॥ ९५ ॥
हिरण्यवर्णा रजनी जगन्मन्त्रप्रवर्तिका ॥ ९६ ॥
रत्नमाला रत्नगर्भा पृथ्वी विश्वप्रमाथिनी ॥ ९७ ॥
धुन्वती दुष्प्रकम्पा च सूर्यमाता दृषद्वती ॥ ९८ ॥
कल्याणी कमला रामा पञ्चभूतवरप्रदा ॥ ९९ ॥
कालरात्रिर्महावेगा वीरभद्रहितप्रिया ॥ १०० ॥
कराला पिङ्गलाकारा नामवेदा महानदा ॥ १०१ ॥
शङ्खिनी पद्मिनी साङ्ख्या साङ्ख्ययोगप्रवर्तिका ॥ १०२ ॥
शुम्भारिः खेचरी खस्था कम्बुग्रीवा कलिप्रिया ॥ १०३ ॥
ऐश्वर्यरत्ननिलया विरक्ता गरुडासना ॥ १०४ ॥
सङ्कल्पसिद्धा साम्यस्था सर्वविज्ञानदायिनी ॥ १०५ ॥
नित्यदृष्टिः स्मृतिर्व्याप्तिः पुष्टिस्तुष्टिः क्रियावती ॥ १०६ ॥
लोहिता सर्वमाता च भीषणा वनमालिनी ॥ १०७ ॥
नृसिंही दैत्यमथिनी शङ्खचक्रगदाधरा ॥ १०८ ॥
महाज्वाला महामूर्तिः सुमूर्तिः सर्वकामधुक् ॥ १०९ ॥
भ्रूमध्यनिलयाऽपूर्वा प्रधानपुरुषा बली ॥ ११० ॥
अष्टादशभुजा नाट्या नीलोत्पलदलप्रभा ॥ १११ ॥
वैराग्यज्ञाननिरता निरालोका निरिन्द्रिया ॥ ११२ ॥
स्थानेश्वरी निरानन्दा त्रिशूलवरधारिणी ॥ ११३ ॥
गणात्मिका गिरेः पुत्री निशुम्भविनिपातिनी ॥ ११४ ॥
अनन्तवर्णानन्यस्था शङ्करी शान्तमानसा ॥ ११५ ॥
गोश्रीर्गव्यप्रिया गौरी गणेश्वरनमस्कृता ॥ ११६ ॥
सर्ववादाश्रया साङ्ख्या साङ्ख्ययोगसमुद्भवा ॥ ११७ ॥
बिन्दुनादसमुत्पत्तिः शम्भुवामा शशिप्रभा ॥ ११८ ॥
महाश्रीः श्रीसमुत्पत्तिस्तमःपारे प्रतिष्ठिता ॥ ११९ ॥
शान्त्यतीता मलातीता निर्विकारा निराश्रया ॥ १२० ॥
दैत्यदानवनिर्मात्री काश्यपी कालकर्णिका ॥ १२१ ॥
नारायणी नवोद्भूता कौमुदी लिङ्गधारिणी ॥ १२२ ॥
परान्तजातमहिमा वडवा वामलोचना ॥ १२३ ॥
मनस्विनी मन्युमाता महामन्युसमुद्भवा ॥ १२४ ॥
अशोच्या भिन्नविषया हिरण्यरजतप्रिया ॥ १२५ ॥
विभ्राजमाना दुर्ज्ञेया ज्योतिष्टोमफलप्रदा ॥ १२६ ॥
दीर्घा ककुद्मिनी विद्या शान्तिदा शान्तिवर्धिनी ॥ १२७ ॥
त्रिशक्तिजननी जन्या षडूर्मिपरिवर्जिता ॥ १२८ ॥
सङ्कर्षणा जगद्धात्री कामयोनिः किरीटिनी ॥ १२९ ॥
प्रद्युम्नदयिता दान्ता युग्मदृष्टिस्त्रिलोचना ॥ १३० ॥
वृषावेशा वियन्मात्रा विन्ध्यपर्वतवासिनी ॥ १३१ ॥
चाणूरहन्त्री तनया नीतिज्ञा कामरूपिणी ॥ १३२ ॥
अयोध्यानिलया वीरा महाकालसमुद्भवा ॥ १३३ ॥
आप्यायन्ती वहन्ती च पावनी पोषणी खिला ॥ १३४ ॥
करीषिणी स्वधा वाणी वीणावादनतत्परा ॥ १३५ ॥
अरुन्धती हिरण्याक्षी मणिदा श्रीवसुप्रदा ॥ १३६ ॥
वरारोहा वरार्हा च वपुःसङ्गसमुद्भवा ॥ १३७ ॥
श्रीधरी श्रीकरी कम्प्रा श्रीधरा ईशवीरणी ॥ १३८ ॥
निहन्त्री दैत्यसिंहानां सिंहिका सिंहवाहिनी ॥ १३९ ॥
बलज्ञा बलदा वामा लेलिहानाऽमृतस्रवा ॥ १४० ॥
वज्रदंष्ट्रा वज्रजिह्वा वैदेही वज्रविग्रहा ॥ १४१ ॥
गान्धर्वी गारुडी चान्द्री कम्बलाश्वतरप्रिया ॥ १४२ ॥
कर्णिकारकरा कक्षा कंसप्राणापहारिणी ॥ १४३ ॥
प्रत्यक्षदेवता दिव्या दिव्यगन्धा दिवापरा ॥ १४४ ॥
इष्टा विशिष्टा शिष्टेष्टा शिष्टा शिष्टप्रपूजिता ॥ १४५ ॥
सुरेन्द्रमाता सुद्युम्ना सुषुम्णा सूर्यसंस्थिता ॥ १४६ ॥
धर्मशास्त्रार्थकुशला धर्मज्ञा धर्मवाहना ॥ १४७ ॥
धर्मशक्तिर्धर्ममयी विधर्मा विश्वधर्मिणी ॥ १४८ ॥
धर्मोपदेशा धर्मात्मा धर्मलभ्या धराधरा ॥ १४९ ॥
सर्वशक्तिविनिर्मुक्ता सर्वशक्त्याश्रयाश्रया ॥ १५० ॥
प्रधानपुरुषाशानी महापुरुषसाक्षिणी ॥ १५१ ॥
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा सीतां हृष्टतनूरुहाम् ॥ १५३ ॥
पठेद्वा पाठयेद्वापि स याति परमं पदम् ॥ १५४ ॥
शूद्रः सद्गतिमाप्नोति धनधान्यविभूतयः ॥ १५५ ॥
मारीभये राजभये तथा चोराग्निजे भये ॥ १५६ ॥
अनावृष्टिभये विप्र सर्वशान्तिकरं परम् ॥ १५७ ॥
यत्रैतत्पठ्यते सम्यक् सीतानामसहस्रकम् ॥ १५८ ॥
महापापातिपापानि विलयं यान्ति सुव्रत ॥ १५९ ॥
