जय माधव, जय श्रीपति,
जय जय जय विष्णो॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
जय मन्द-स्मित-शोभे, जय अद्भुत शान्ते॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
जय कमलालयवासिनि गरुडासनचारिन्॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
दिव्यानन्द-विलासिनि जय सुखमयमूर्ति॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
तुम लोक-त्रय-जननी, तुम सबके धाता॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
परमानन्द-विधाता तुम हो वनमाली॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
चेतन और अचेतनके अन्तर्यामी॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
जय लक्ष्मी-नारायण नव-मंगल-दाता॥
जय लक्ष्मी-विष्णो...॥
