रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता॥
जय शीतला माता...॥
कृष्णचन्द्र की टोपी, मेरो मन भायो॥
जय शीतला माता...॥
ऋद्धि-सिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता॥
जय शीतला माता...॥
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता॥
जय शीतला माता...॥
सूरज ताल बजावे, नारद मुनि गाता॥
जय शीतला माता...॥
करे भक्त जन आरति, लखि लखि हरषाता॥
जय शीतला माता...॥
मनवांछित फल पावे, संकट कट जाता॥
जय शीतला माता...॥
अंधे को मिले नैना, कोढ़ी तन पाता॥
जय शीतला माता...॥
कहत 'शिवानन्द' स्वामी, मनवांछित फल पाता॥
जय शीतला माता...॥
