(विष्णुयामले देवीश्वरसंवादे)
॥ श्रीदेव्युवाच ॥
बालात्रिपुरसुन्दर्याः मन्त्रनामसहस्रकम् ॥ १ ॥
कृपया केवलं नाथ तन्ममाख्यातुमर्हसि ॥ २ ॥
॥ ईश्वर उवाच ॥
गोपनीयं प्रयत्नेन शृणु तत्त्वं महेश्वरि ॥ ३ ॥
॥ विनियोगः ॥
॥ करन्यासः ॥
क्लीं तर्जनीभ्यां नमः ।
सौः मध्यमाभ्यां नमः ।
ऐं अनामिकाभ्यां नमः ।
क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
सौः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
॥ हृदयादिन्यासः ॥
क्लीं शिरसे स्वाहा ।
सौः शिखायै वषट् ।
ऐं कवचाय हुम् ।
क्लीं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
सौः अस्त्राय फट् ।
॥ ध्यानम् ॥
सौवर्णाम्बरधारिणीं वरसुधाधौतान्तरङ्गोज्ज्वलाम् ।
वन्दे पुस्तकपाशसाङ्कुशजपस्रग्भासुरोद्यत्करां
तां बालां त्रिपुरां भजे त्रिनयनां षट्चक्रसञ्चारिणीम् ॥
॥ अथ स्तोत्रम् ॥
मनोज्ञा सुमना रम्या शोभना ललिता शिवा ॥ १ ॥
कल्याणी कमला हृद्या पेशला हृदयङ्गमा ॥ २ ॥
रामा भव्यवती भव्या कमनीयाऽतिकोमला ॥ ३ ॥
मनोन्मनी महामाया मातङ्गी मदिराप्रिया ॥ ४ ॥
महेश्वरी महानन्दा महानन्दविधायिनी ॥ ५ ॥
आनन्दकन्दा विजया विश्वेशी विश्वरूपिणी ॥ ६ ॥
कामेश्वरी कामकला कामिनी कामवर्धिनी ॥ ७ ॥
अणुरूपा महारूपा भूतेशी भुवनेश्वरी ॥ ८ ॥
चैतन्यरूपिणी नित्या नित्यानित्यस्वरूपिणी ॥ ९ ॥
उन्मादिनी महामारी सुप्रसन्ना सुरार्चिता ॥ १० ॥
योगीश्वरी योगमाता हंसिनी कलहंसिनी ॥ ११ ॥
विन्ध्याद्रिनिलया सूक्ष्मा हेमपद्मनिवासिनी ॥ १२ ॥
विद्रुमाभा विशालाक्षी विशिष्टा विश्वनायिका ॥ १३ ॥
विश्वोत्पत्तिर्विश्वमाया विश्वाराध्या विकस्वरा ॥ १४ ॥
मालिनी मोदिनी मान्या मदहस्ता मदालया ॥ १५ ॥
मदात्मिका मदावासा मधुबिन्दुकृताधरा ॥ १६ ॥
सिन्दूररक्ता रक्ताक्षी त्रिनेत्रा त्रिगुणात्मिका ॥ १७ ॥
अरुणा तरुणार्काभा भामिनी वह्निवासिनी ॥ १८ ॥
सिद्धार्थदायिनी विद्या सिद्धाढ्या सिद्धसम्मता ॥ १९ ॥
त्वरिता सत्वरा तुर्या त्वरयित्री त्वरात्मिका ॥ २० ॥
भगोदरी भगक्लिन्ना भगिनी भगमालिनी ॥ २१ ॥
भगात्मिका भगावासा भगा भगनिपातिनी ॥ २२ ॥
भगनिष्यन्दिनी भर्गा भगाभा भगगर्भिणी ॥ २३ ॥
भगमाता भगकृता भगगुह्या भगेश्वरी ॥ २४ ॥
भगविद्या भगक्लिन्ना भगलिङ्गा भगद्रवा ॥ २५ ॥
कमला हंसिनी काला करुणा करुणावती ॥ २६ ॥
रसात्मिका रसावासा रसस्यन्दा रसावहा ॥ २७ ॥
विद्या विधात्री विविधा विश्वदा त्रिविधा विधा ॥ २८ ॥
चतुराङ्गी चतुर्बाहुश्चतुरा चारुहासिनी ॥ २९ ॥
मन्त्रात्मिका मन्त्रमाता मन्त्रगम्या सुमन्त्रका ॥ ३० ॥
वज्रेश्वरी वज्रहस्ता पुराणी पुरवासिनी ॥ ३१ ॥
इक्षुचापा महापाशा शुभदा प्रियवादिनी ॥ ३२ ॥
आत्मविद्या महाविद्या ब्रह्मविद्या विवस्वती ॥ ३३ ॥
आत्मिका ज्ञाननिलया निर्भेदा निर्वृतिप्रदा ॥ ३४ ॥
श्रीफला श्रीप्रदा शिष्या श्रीमयी शिवरूपिणी ॥ ३५ ॥
महोदया महारूपा मही माही कलामयी ॥ ३६ ॥
सूर्यमण्डलमध्यस्था स्थिरा शङ्करवल्लभा ॥ ३७ ॥
सुधाप्रदा सुधाधारा सुश्रीः सम्पत्तिरूपिणी ॥ ३८ ॥
इच्छाशक्तिर्महाशक्तिः क्रियाशक्तिः प्रियङ्करी ॥ ३९ ॥
सकला रसना सारा सारगम्या सरस्वती ॥ ४० ॥
श्रीमती श्रीकरी व्योम्नी शिवयोनिः शिवेक्षणा ॥ ४१ ॥
बृहती ब्राह्मणी ब्राह्मी ब्रह्माणी ब्रह्मरूपिणी ॥ ४२ ॥
अद्वयाऽऽनन्दसम्बोधा वरा सौभाग्यरूपिणी ॥ ४३ ॥
बोधिका कमला रौद्री द्राविणी क्षोभिणी मतिः ॥ ४४ ॥
कुलोत्तीर्णा कुलवती बोधा वाग्वादिनी सती ॥ ४५ ॥
विश्वात्मिका विश्वयोनिः विश्वासक्ता विनायका ॥ ४६ ॥
सन्मन्त्ररूपिणी हृष्टा शाङ्करी सुरशङ्करी ॥ ४७ ॥
सुवर्णा वर्णसत्कीर्तिः सवर्णा वर्णरूपिणी ॥ ४८ ॥
शाम्भवी सच्चिदानन्दा सच्चिदानन्दरूपिणी ॥ ४९ ॥
भ्रूमध्याऽखिलनिष्ठाद्या निर्गुणा गुणवर्धिनी ॥ ५० ॥
विभूतिर्भुतिदा भूतिः सम्भूतिर्भूतिकारिणी ॥ ५१ ॥
भवानी भावगा भावा भावना भावनात्मिका ॥ ५२ ॥
सूक्ष्मरूपा परानन्दा स्वात्मस्था विश्वदा शिवा ॥ ५३ ॥
शरण्या तरुणार्काभा मदा रक्ता मनस्विनी ॥ ५४ ॥
अचिन्त्या शक्तिश्चिन्त्यार्था चिन्त्याऽचिन्त्यस्वरूपिणी ॥ ५५ ॥
आप्यायिनी परानन्दा कूटस्थाऽऽवासरूपिणी ॥ ५६ ॥
खेचरी खेचरीमुद्रा खेचरीयोगरूपिणी ॥ ५७ ॥
सुधाप्रदा सुधाधारा सुधारूपा सुधामयी ॥ ५८ ॥
माङ्गल्या मङ्गलकरी महामाङ्गल्यदेवता ॥ ५९ ॥
स्वप्रकाशा महाभूषा भामिनी भवरूपिणी ॥ ६० ॥
अर्थाऽवसाननिलया नारायणमनोहरा ॥ ६१ ॥
अनुत्तरा महाराध्या दुष्प्रापा दुरतिक्रमा ॥ ६२ ॥
स्वधा स्वाहा सुधा मेधा मधुरा मधुमन्दिरा ॥ ६३ ॥
सुवर्चला सुराराध्या शुद्धसत्त्वा सुरार्चिता ॥ ६४ ॥
कामेश्वरी कामवती कामिनी कामरूपिणी ॥ ६५ ॥
विष्णुपत्नी विशुद्धार्था विश्वरूपेशवन्दिता ॥ ६६ ॥
सुशीलाढ्या शैलवती शैलस्था शैलरूपिणी ॥ ६७ ॥
नित्या निर्वेदखट्वाङ्गी जननी जनरूपिणी ॥ ६८ ॥
साकिनी सारसंहृद्या सर्वोत्तीर्णा सदाशिवा ॥ ६९ ॥
शिवदूती शिवा शिष्टा शिवज्ञा शिवरूपिणी ॥ ७० ॥
विश्वम्भरा विनीतेष्टा विधात्री विधिवल्लभा ॥ ७१ ॥
विश्वाक्षरा सरसिका विश्वस्थाऽतिविचक्षणा ॥ ७२ ॥
हाकिनी हारिणी सौम्या रोहिणी रोगनाशनी ॥ ७३ ॥
श्रीमाता श्रीकरी श्रेयः श्रेयसी च सुरेश्वरी ॥ ७४ ॥
रुद्रात्मिका रुद्रमाता रुद्रगम्या रजस्वला ॥ ७५ ॥
कृपादेहाऽरुणा नाथा सुधाबिन्दुसमाश्रिता ॥ ७६ ॥
मायावती घोरमुखी वादिनी दीपिनी शिवा ॥ ७७ ॥
उत्सुकाऽनुत्सुका हृष्टा ह्रीङ्कारी चक्रनायिका ॥ ७८ ॥
गरुडा गारुडी ज्येष्ठा सकला ब्रह्मचारिणी ॥ ७९ ॥
भद्रिणी रुद्रचामुण्डा ह्रीङ्कारी सौभगा ध्रुवा ॥ ८० ॥
पानानुरक्ता पानस्था भीमरूपा भयापहा ॥ ८१ ॥
महोत्सुका क्रतुप्रीता कङ्काली कालदर्पिता ॥ ८२ ॥
योग्यार्णवा नागबुद्धिर्वीरपाना नवात्मिका ॥ ८३ ॥
आदिसत्त्वा ध्यानसत्त्वा श्रीकण्ठस्वान्तमोहिनी ॥ ८४ ॥
आकाशलिङ्गसम्भूता परामृतरसात्मिका ॥ ८५ ॥
विद्यातनुर्मन्त्रतनुश्चण्डा मुण्डा सुदर्पिता ॥ ८६ ॥
शृङ्गारपीठनिलया काली मातङ्गकन्यका ॥ ८७ ॥
पादुकाक्रमसन्तृप्ता भैरवस्थाऽपराजिता ॥ ८८ ॥
भ्रमराम्बा शिखरिका ब्रह्मविष्ण्वीशतर्पिता ॥ ८९ ॥
सन्तानानन्दिनी बीजचक्रा परमकारुणी ॥ ९० ॥
शाकम्भरी सम्भवित्री स्कन्दाऽऽनन्दी मदार्पिता ॥ ९१ ॥
चर्चिता चर्चितपदा चारुखट्वाङ्गधारिणी ॥ ९२ ॥
उषा सङ्कर्षिणी धात्री चोमा कात्यायनी शिवा ॥ ९३ ॥
योगलक्ष्मीर्भोगलक्ष्मीः राज्यलक्ष्मीः कपालिनी ॥ ९४ ॥
क्षेत्रात्मिका महाधात्री बलिनी केतुमालिनी ॥ ९५ ॥
मन्दारमन्दिरा तीव्रा ग्राहिणी सर्वभक्षिणी ॥ ९६ ॥
सुवर्णिका कालदूती देवी कालस्वरूपिणी ॥ ९७ ॥
उग्रात्मिका पद्मवती धूर्जटी चक्रधारिणी ॥ ९८ ॥
दक्षा दाक्षायणी दीक्षा मदना मदनातुरा ॥ ९९ ॥
वसुधा वसुधाछाया वसुधामा सुधामयी ॥ १०० ॥
खण्डिनी योगिनी तुष्टिः नादिनी भेदिनी नटी ॥ १०१ ॥
भापीठस्था भवद्रूपा महाश्रीर्धूम्रलोचना ॥ १०२ ॥
सावित्री सत्कृतिः कर्त्री क्षमा माया महोदया ॥ १०३ ॥
निर्मला गिरिजा शब्दा शर्वाणी शर्मदायिनी ॥ १०४ ॥
अव्यक्तरूपिणी व्यक्ता योगिनी पीठरूपिणी ॥ १०५ ॥
तपिनी तापिनी दीक्षा शोधिनी शिवदायिनी ॥ १०६ ॥
अर्चिष्मती द्युतिमती कौलिनी कव्यवाहिनी ॥ १०७ ॥
विद्याधरी लोकधात्री सर्वा सारस्वरूपिणी ॥ १०८ ॥
त्रिकोणनिलया त्रिस्था त्रयीमाता त्रयीतनुः ॥ १०९ ॥
त्रिवर्णा त्रिपुरा त्रिश्रीः त्रिमूर्तिस्त्रिदशेश्वरी ॥ ११० ॥
त्रिदिवा त्रिदिवेशानी त्रिस्था त्रिपुरदाहिनी ॥ १११ ॥
ऐङ्काराख्या वामदेवी खण्डिनी चण्डदण्डिनी ॥ ११२ ॥
वज्रिणी द्राविणी जैत्री श्रीमती गोमती ध्रुवा ॥ ११३ ॥
त्रिधात्मा त्रिदशा त्र्यक्षा त्रिघ्नी त्रिपुरमालिनी ॥ ११४ ॥
कुमारी कुण्डली धात्री बाला भक्तेष्टदायिनी ॥ ११५ ॥
सौगन्धिनी सरिद्वेणी पद्मरागकिरीटिनी ॥ ११६ ॥
सिद्धा श्रीत्रिपुरावासा बालात्रिपुरसुन्दरी ॥ ११७ ॥
कथितं देवदेवेशि सर्वमङ्गलदायकम् ॥ ११८ ॥
सर्वाश्रयकरं देवि सर्वानन्दकरं वरम् ॥ ११९ ॥
सर्वदा श्रीकरं देवि सर्वयोगीश्वरीमयम् ॥ १२० ॥
सर्वदौर्भाग्यशमनं सर्वदुःखनिवारणम् ॥ १२१ ॥
परसैन्यस्तम्भकरं शत्रुस्तम्भनकारणम् ॥ १२२ ॥
महोत्पातप्रशमनं महाज्वरनिवारणम् ॥ १२३ ॥
एवमेतस्य मन्त्रस्य प्रभावो वर्णितुं मया ॥ १२४ ॥
यः पठेत्सङ्गमे नित्यं सर्वदा मन्त्रसिद्धिदम् ॥ १२५ ॥
