श्री शिव उवाच ।
यामासाद्य मया प्राप्तमैश्वर्यपदमुत्तमम् ॥ 1 ॥
कुरुतामर्चनं देव्यास्त्रैलोक्यविजिगीषया ॥ 2 ॥
प्रसन्नो यदि मे देव परमेश पुरातन ।
रहस्यं परमं देव्याः कृपया कथय प्रभो ॥ 3 ॥
विना गन्धं विना पुष्पं विना नित्योदितां क्रियाम् ॥ 4 ॥
विना दानं विना जापं येन काली प्रसीदति ॥ 5 ॥
पृष्टं त्वयोत्तमं प्राज्ञ भृगुवंश समुद्भव ।
भक्तानामपि भक्तोऽसि त्वमेव साधयिष्यसि ॥ 6 ॥
सदा स्तोत्रप्रियामुग्रां कामकौतुकलालसाम् ॥ 7 ॥
माध्वीक मत्स्यमांसानुरागिणीं वैष्णवीं पराम् ॥ 8 ॥
योगप्रभावां योगेशीं योगीन्द्रहृदयस्थिताम् ॥ 9 ॥
तस्याः स्तोत्रं परं पुण्यं स्वयं काल्या प्रकाशितम् ॥ 10 ॥
गोपनीयं प्रयत्नेन पठनीयं परात्परम् ॥ 11 ॥
नश्यन्ति दहने दीप्ते पतङ्गा इव सर्वतः ॥ 12 ॥
तस्य दर्शनमात्रेण वादिनो निष्प्रभां गताः ॥ 13 ॥
राजानोऽपि च दासत्वं भजन्ते किं परे जनाः ॥ 14 ॥
मनसा चिन्तयेत् कालीं महाकालेन चालिताम् ॥ 15 ॥
प्रसन्ना कालिका तस्य पुत्रत्वेनानुकम्पते ॥ 16 ॥
प्रसीदति तथानेन स्तुता काली प्रसीदति ॥ 17 ॥
अस्य श्री दक्षिणकालिका सहस्रनाम स्तोत्रस्य महाकालभैरव ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्मशानकाली देवता धर्मार्थकाममोक्षार्थे पाठे विनियोगः ।
शवारूढां महाभीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीं
चतुर्भुजां खड्गमुण्डवराभयकरां शिवाम् ।
मुण्डमालाधरां देवीं ललाज्जिह्वां दिगम्बरां
एवं सञ्चिन्तयेत्कालीं श्मशानालयवासिनीम् ॥
श्मशानकालिका काली भद्रकाली कपालिनी ।
गुह्यकाली महाकाली कुरुकुल्ला विरोधिनी ॥ 1 ॥
कालभैरवभार्या च कुलवर्त्मप्रकाशिनी ॥ 2 ॥
कस्तूरीरसलिप्ताङ्गी कुञ्जरेश्वरगामिनी ॥ 3 ॥
कामार्ता कामरूपा च कामधेनुः कलावती ॥ 4 ॥
कुलीना कुलवत्यम्बा दुर्गा दुर्गतिनाशिनी ॥ 5 ॥
कृशाङ्गी कुलिशाङ्गी च क्रीङ्कारी कमला कला ॥ 6 ॥
उग्रा उग्रप्रभा दीप्ता विप्रचित्ता महाबला ॥ 7 ॥
ब्राह्मी नारायणी भद्रा सुभद्रा भक्तवत्सला ॥ 8 ॥
वज्राङ्गी वज्रकङ्काली नृमुण्डस्रग्विणी शिवा ॥ 9 ॥
रक्तचन्दनसिक्ताङ्गी सिन्दूरारुणमस्तका ॥ 10 ॥
महादंष्ट्रा महामाया सुदती युगदन्तुरा ॥ 11 ॥
शारदेन्दुप्रसन्नास्या स्फुरत्स्मेराम्बुजेक्षणा ॥ 12 ॥
प्रफुल्लपद्मवदना स्मितास्या प्रियभाषिणी ॥ 13 ॥
सुमतिः कुमतिश्चण्डा चण्डमुण्डातिवेगिनी ॥ 14 ॥
प्रेतदेहाकर्णपूरा प्रेतपाणिसुमेखला ॥ 15 ॥
पुण्यालया पुण्यदेहा पुण्यश्लोका च पावनी ॥ 16 ॥
पुण्यनाम्नी भीतिहरा वरदा खड्गपाणिनी ॥ 17 ॥
दक्षिणा श्यामला श्यामा शान्ता पीनोन्नतस्तनी ॥ 18 ॥
घोररावा शिवासङ्गा निःसङ्गा मदनातुरा ॥ 19 ॥
अतिमत्ता महामत्ता सर्वाकर्षणकारिणी ॥ 20 ॥
चतुर्भुजा दशभुजा अष्टादशभुजा तथा ॥ 21 ॥
जगद्बन्धुर्जगद्धात्री जगदानन्दकारिणी ॥ 22 ॥
नागयज्ञोपवीताङ्गी नागिनी नागशायिनी ॥ 23 ॥
मोहरात्री महारात्री दारुणामासुरासुरी ॥ 24 ॥
राक्षसी डाकिनी वेदमयी वेदविभूषणा ॥ 25 ॥
चिन्त्याऽचिन्त्या स्वधा स्वाहा निद्रा तन्द्रा च पार्वती ॥ 26 ॥
गङ्गा काशी शची सीता सती सत्यपरायणा ॥ 27 ॥
वाणी बुद्धिर्महालक्ष्मी लक्ष्मीर्नीलसरस्वती ॥ 28 ॥
नदी सिन्धुः सर्वमयी तारा शून्यनिवासिनी ॥ 29 ॥
सदानन्दमयी सत्या सर्वानन्दस्वरूपिणी ॥ 30 ॥
रङ्किणी टङ्किणी चित्रा विचित्रा चित्ररूपिणी ॥ 31 ॥
शाकिनी हाकिनी क्षान्ता राकिणी रुधिरप्रिया ॥ 32 ॥
उपेन्द्राणी महेशानी ज्योत्स्ना चेन्द्रस्वरूपिणी ॥ 33 ॥
शक्तिः सूक्तिर्मतिमती भुक्तिर्मुक्तिः पतिव्रता ॥ 34 ॥
सर्वज्ञा सिद्धिदा सिद्धा भाव्या भव्या भयापहा ॥ 35 ॥
तमिस्रा यामिनीस्था च स्थिरा धीरा तपस्विनी ॥ 36 ॥
त्रपा त्रपावती लज्जा निर्लज्जा ह्रीं रजोवती ॥ 37 ॥
गरिष्ठा दुष्टसंहर्त्री विशिष्टा श्रेयसी घृणा ॥ 38 ॥
वागीश्वरी श्रीर्यमुना यज्ञकर्त्री यजुःप्रिया ॥ 39 ॥
कलकण्ठी कम्बुकण्ठी वेणुवीणापरायणा ॥ 40 ॥
मधुमती कुण्डलिनी ऋद्धिः सिद्धिः शुचिस्मिता ॥ 41 ॥
शङ्खिनी चक्रिणी कृष्णा गदिनी पद्मिनी तथा ॥ 42 ॥
पिनाकधारिणी धूम्रा शरभी वनमालिनी ॥ 43 ॥
जटिनी बिम्बिनी नीला लावण्याम्बुधिचन्द्रिका ॥ 44 ॥
महिषासुरसंहन्त्री वासिनी रक्तदन्तिका ॥ 45 ॥
रक्तप्रिया मांसरुचिर्वासवासक्तमानसा ॥ 46 ॥
शवासना चितान्तस्था माहेशी वृषवाहिनी ॥ 47 ॥
वामदेवी महादेवी गौरी सर्वज्ञभाविनी ॥ 48 ॥
सुभ्रुर्विलासिनी ब्रह्मवादिनी ब्राह्मणी मही ॥ 49 ॥
अमोघाऽरुन्धती तीक्ष्णा भोगवत्यनुवादिनी ॥ 50 ॥
मानदा मानिनी मान्या माननीया मदोद्धता ॥ 51 ॥
सुमध्याऽनन्तगुणिनी सर्वलोकोत्तमोत्तमा ॥ 52 ॥
सुखदा शुभदा सत्या सभासङ्क्षोभकारिणी ॥ 53 ॥
कौमारी कुलजा कुन्ती कुलस्त्री कुलपालिका ॥ 54 ॥
सगुणा निर्गुणा धृष्टा निष्ठा काष्ठा प्रतिष्ठिता ॥ 55 ॥
उर्वी गुर्वी गुरुश्रेष्ठा सगुणा त्रिगुणात्मिका ॥ 56 ॥
कामदेवकला रामाऽभिरामा शिवनर्तकी ॥ 57 ॥
कार्तिकी कीर्तिका कृत्या अयोध्या विषमा समा ॥ 58 ॥
त्रैलोक्यजननी हृष्टा निर्मांसा मनोरूपिणी ॥ 59 ॥
अवन्ती मथुरा माया त्रैलोक्यपावनीश्वरी ॥ 60 ॥
क्षेमङ्करी शङ्करी च सर्वसम्मोहकारिणी ॥ 61 ॥
अद्वैता भोगिनी पूज्या युवती सर्वमङ्गला ॥ 62 ॥
भयङ्करी पापहरा निष्कलङ्का वशङ्करी ॥ 63 ॥
सहस्रसूर्यसङ्काशा चन्द्रकोटिसमप्रभा ॥ 64 ॥
सर्वाचारवती सर्वदेवकन्याधिदेवता ॥ 65 ॥
इज्या पूज्या विभा भूतिः सत्कीर्तिर्ब्रह्मरूपिणी ॥ 66 ॥
मनस्विनी देवमाता यशस्या ब्रह्मचारिणी ॥ 67 ॥
आधाररूपिणी ध्येया मूलाधारनिवासिनी ॥ 68 ॥
वावदूका निम्ननाभिः सत्या सन्ध्या दृढव्रता ॥ 69 ॥
ज्वलिनी ज्वालिनी शैलतनया विन्ध्यवासिनी ॥ 70 ॥
प्रगल्भा वारुणी छाया शशिनी विस्फुलिङ्गिनी ॥ 71 ॥
इच्छासिद्धिर्विसिद्धा च वशित्वोर्ध्वनिवासिनी ॥ 72 ॥
मनोहरा चिता दिव्या देव्युदारा मनोरमा ॥ 73 ॥
सुषुम्नेडा भोगवती गान्धारी नरकान्तका ॥ 74 ॥
अमृता तुलसी वृन्दा कैटभी कपटेश्वरी ॥ 75 ॥
उग्रतारा यशोदाख्या दैवकी देवमानिता ॥ 76 ॥
कुलवागीश्वरी वाणी मातृका द्राविणी द्रवा ॥ 77 ॥
दूती प्राणेश्वरी गुप्ता बहुला चमरी प्रभा ॥ 78 ॥
द्रविणी गोपनी माया कामबीजेश्वरी क्रिया ॥ 79 ॥
अमेयविक्रमा क्रूरा सम्पत्शाला त्रिलोचना ॥ 80 ॥
तपिनी तापिनी विश्वा भोगदा धारिणी धरा ॥ 81 ॥
बीजरूपा महामुद्रा योगिनी योनिरूपिणी ॥ 82 ॥
वज्रेश्वरी च जयिनी सर्वद्वन्द्वक्षयङ्करी ॥ 83 ॥
दुराशया दुराधारा दुर्जया दुर्गरूपिणी ॥ 84 ॥
हंसेश्वरी त्रिकोणस्था शाकम्भर्यनुकम्पिनी ॥ 85 ॥
महाविद्येश्वरी श्वेता भेरुण्डा कुलसुन्दरी ॥ 86 ॥
भक्तानन्दमयी भक्तभाविका भक्तशङ्करी ॥ 87 ॥
सर्वसम्भोगभवना सर्वसौख्यनिरूपिणी ॥ 88 ॥
कुमारीभक्तिसुखिनी कुमारीरूपधारिणी ॥ 89 ॥
कुमारीसेवकासङ्गा कुमारीसेवकालया ॥ 90 ॥
श्मशानभैरवी कालभैरवी पुरभैरवी ॥ 91 ॥
सुधानन्दभैरवी च उन्मादानन्दभैरवी ॥ 92 ॥
ज्ञानानन्दभैरवी च अमृतानन्दभैरवी ॥ 93 ॥
त्रिपुरा परमेशानी सुन्दरी पुरसुन्दरी ॥ 94 ॥
महासप्तदशी चैव षोडशी त्रिपुरेश्वरी ॥ 95 ॥
नवचक्रेश्वरी चक्रेश्वरी त्रिपुरमालिनी ॥ 96 ॥
सिन्दूरपूररुचिरा श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरी ॥ 97 ॥
जवायावकसिन्दूररक्तचन्दनधारिणी ॥ 98 ॥
चामरी बालकुटिलनिर्मला श्यामकेशिनी ॥ 99 ॥
रत्नकुण्डलसंयुक्तस्फुरद्गण्डमनोरमा ॥ 100 ॥
मुक्ताविद्रुममाणिक्यहाराढ्यस्तनमण्डला ॥ 101 ॥
बीजपूरस्फुरद्बीजदन्तपङ्क्तिरनुत्तमा ॥ 102 ॥
मातङ्गकुम्भवक्षोजा लसत्कोकनदेक्षणा ॥ 103 ॥
पद्मरागाङ्गदज्योतिर्दोश्चतुष्कप्रकाशिनी ॥ 104 ॥
नागेन्द्रदन्तनिर्माणवलयाङ्कितपाणिनी ॥ 105 ॥
पट्टाम्बरपरीधाना कलमञ्जीरशिञ्जिनी ॥ 106 ॥
विचित्ररत्नपृथिवीकल्पशाखितलस्थिता ॥ 107 ॥
षट्चक्रभेदनकरी परमानन्दरूपिणी ॥ 108 ॥
ब्रह्मरूपा शिवक्रोडा नानासुखविलासिनी ॥ 109 ॥
शिवा शैवा च रुद्राणी तथैव शिववादिनी ॥ 110 ॥
डाकिनी योगिनी चैव तथोपयोगिनी मता ॥ 111 ॥
अलम्बुषा वेगवती क्रोधरूपा सुमेखला ॥ 112 ॥
पिङ्गला ब्रह्मदूती च सुषुम्ना चैव गन्धिनी ॥ 113 ॥
भगरूपा भगस्थात्री भगिनी भगरूपिणी ॥ 114 ॥
लिङ्गाख्या चैव लिङ्गेशी त्रिपुरा भैरवी तथा ॥ 115 ॥
लिङ्गमाना लिङ्गभवा लिङ्गलिङ्गा च पार्वती ॥ 116 ॥
गृध्ररूपा शिवारूपा चक्रिणी चक्ररूपधृक् ॥ 117 ॥
लिङ्गस्था लिङ्गनी लिङ्गरूपिणी लिङ्गसुन्दरी ॥ 118 ॥
लिङ्गनामसदानन्दा भगनामसदागतिः ॥ 119 ॥
भगलिङ्गामृतप्रीता भगलिङ्गस्वरूपिणी ॥ 120 ॥
स्वयम्भूकुसुमप्रीता स्वयम्भूकुसुमार्चिता ॥ 121 ॥
स्वयम्भूपुष्पघटिता स्वयम्भूपुष्पधारिणी ॥ 122 ॥
स्वयम्भूपुष्पनिरता स्वयम्भूकुसुमग्रहा ॥ 123 ॥
स्वयम्भूपुष्पनिचिता स्वयम्भूकुसुमप्रिया ॥ 124 ॥
स्वयम्भूकुसुमानन्दलहरीस्निग्धदेहिनी ॥ 125 ॥
स्वयम्भूपुष्पनिलया स्वयम्भूपुष्पवासिनी ॥ 126 ॥
स्वयम्भूपुष्पकरिणी स्वयम्भूपुष्पवाणिका ॥ 127 ॥
स्वयम्भूकुसुमज्ञाना स्वयम्भूपुष्पभागिनी ॥ 128 ॥
स्वयम्भूकुसुमोत्साहा स्वयम्भूपुष्परूपिणी ॥ 129 ॥
स्वयम्भूकुसुमाराध्या स्वयम्भूकुसुमोद्भवा ॥ 130 ॥
स्वयम्भूपूजकप्राज्ञा स्वयम्भूहोतृमातृका ॥ 131 ॥
स्वयम्भूपूजकग्रस्ता स्वयम्भूपूजकप्रिया ॥ 132 ॥
स्वयम्भूप्रदसर्वस्वा स्वयम्भूप्रदपुत्रिणी ॥ 133 ॥
सर्वकालोद्भवप्रीता सर्वकालोद्भवात्मिका ॥ 134 ॥
कुण्डपुष्पसदाप्रीता कुण्डपुष्पसदारतिः ॥ 135 ॥
स्वयम्भूर्वा शिवा धात्री पावनी लोकपावनी ॥ 136 ॥
अश्विनी कृत्तिका पुष्या तेजस्का चन्द्रमण्डला ॥ 137 ॥
वरदाऽभयदा चैव मुक्तिबन्धविनाशिनी ॥ 138 ॥
दुःखदा सुखदा मोक्षा मोक्षदार्थप्रकाशिनी ॥ 139 ॥
शुक्राधारा शुक्ररूपा शुक्रसिन्धुनिवासिनी ॥ 140 ॥
शुक्रपूज्या शुक्रहोमसन्तुष्टा शुक्रवत्सला ॥ 141 ॥
शुक्रस्था शुक्रिणी शुक्रसंस्पृहा शुक्रसुन्दरी ॥ 142 ॥
महाशुक्रा शुक्रभवा शुक्रवृष्टिविधायिनी ॥ 143 ॥
शुक्रानन्दकरी शुक्रसदानन्दाभिधायिका ॥ 144 ॥
शुक्रपूजकसर्वस्वा शुक्रनिन्दकनाशिनी ॥ 145 ॥
शारदा साधकप्राणा साधकासक्तमानसा ॥ 146 ॥
साधकानन्दसन्तोषा साधकानन्दकारिणी ॥ 147 ॥
त्रिकूटस्था पञ्चकूटा सर्वकूटशरीरिणी ॥ 148 ॥
इति श्रीकालिकानामसहस्रं शिवभाषितम् ॥ 149 ॥
पूजाकाले निशीथे च सन्ध्ययोरुभयोरपि ॥ 150 ॥
यः पठेत् पाठयेद्वापि शृणोति श्रावयेदपि ॥ 151 ॥
श्रद्धयाऽश्रद्धया वापि यः कश्चिन्मानवः स्मरेत् ॥ 152 ॥
वन्ध्या वा काकवन्ध्या वा मृतवत्सा च याङ्गना ॥ 153 ॥
यं यं कामयते कामं पठन् स्तोत्रमनुत्तमम् ।
देवीपादप्रसादेन तत्तदाप्नोति निश्चितम् ॥ 154 ॥
