पठनाच्छ्रवणाद्यस्य नरो मोक्षमवाप्नुयात् ॥ १ ॥
सर्वमन्त्रमयं साक्षाच्छृणु पर्वतनन्दिनि ॥ २ ॥
अणिमादिसिद्धिदात्री शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३ ॥
आद्या आनन्ददात्री च शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ४ ॥
इच्छामयी जगन्मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ५ ॥
उर्वीश्वरी जगन्मातर्लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥
औदार्यगुणसम्पन्ना लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ७ ॥
कृष्णचित्तहरा कर्त्री शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ८ ॥
करुणार्णवसम्पूर्णा शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ९ ॥
खञ्जरीटगतिश्चैव शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १० ॥
गोलोकवासिनी मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ११ ॥
गन्धपुष्पधरा मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १२ ॥
घोरपापहरा चैव शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १३ ॥
चतुराननपूज्या च शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १४ ॥
चन्द्रार्कनखरज्योतिर्लक्ष्मि देवि नमाम्यहम् ॥ १५ ॥
चराचरेश्वरी लक्ष्मि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १६ ॥
छिद्रौघहारिणी मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १७ ॥
जयप्रदा जानकी च शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १८ ॥
जीवात्मनां च त्वं मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ १९ ॥
झर्झरप्रियवाद्या च शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २० ॥
ढक्कादिवाद्यप्रणया डम्फवाद्यविनोदिनी ।
डमरुप्रणया मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २१ ॥
त्रिलोकजननी लक्ष्मि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २२ ॥
त्रिगुणधारिणी मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २३ ॥
त्रिकालज्ञा त्राणकर्त्री शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २४ ॥
द्वारकावासिनी मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २५ ॥
दिव्याभरणभूषाङ्गी शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २६ ॥
दयामयी दयाध्यक्षी शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २७ ॥
धर्मदा धैर्यदा मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २८ ॥
नवयौवनचार्वङ्गी शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ २९ ॥
नितम्बिनी नलिनाक्षी लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ३० ॥
निर्विकारा नित्यरूपा लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ३१ ॥
पराशक्तिः पराभक्तिर्लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ३२ ॥
परमार्थप्रदा लक्ष्मि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३३ ॥
पद्मरागधरा त्वं हि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३४ ॥
प्रणवरूपिणी मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३५ ॥
फणिशायिप्रिया मातः शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३६ ॥
विश्वाराध्या विश्वबाह्या लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ३७ ॥
वरदा वाक्यसिद्धा च शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ३८ ॥
विद्युद्गौरी महादेवि लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ३९ ॥
भवार्णवत्राणकर्त्री लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४० ॥
भयदाऽभयदात्री च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४१ ॥
मोक्षदा मानदात्री च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४२ ॥
मुखराप्राणहन्त्री च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४३ ॥
युग्मश्रीफलवृक्षा च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४४ ॥
यशोदासुतपत्नी च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४५ ॥
राकेन्दुकोटिसौन्दर्या लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४६ ॥
राज्यदा राज्यहन्त्री च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४७ ॥
ललना प्रीतिदात्री च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४८ ॥
विन्ध्याचलवासिनी च लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ४९ ॥
शुभदा शीलसम्पन्ना लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ५० ॥
षोडशी वयसा त्वं हि लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ५१ ॥
संसारतारिणी देवि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ५२ ॥
सुरेश्वरी सिद्धिदात्री शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ५३ ॥
सीतापतिप्रिया देवि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ५४ ॥
हरिपादप्रिया देवि शिरसा प्रणमाम्यहम् ॥ ५५ ॥
क्षीणमध्या च क्षेत्राङ्गी लक्ष्मि देवि नमोऽस्तु ते ॥ ५६ ॥
पठितव्यं प्रयत्नेन त्रिसन्ध्यं च दिने दिने ॥ ५७ ॥
वाञ्छाकल्पलता साक्षाद्भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी ॥ ५८ ॥
इष्टसिद्धिर्भवेत्तस्य सत्यं सत्यं हि पार्वति ॥ ५९ ॥
तं च दृष्ट्वा भवेन्मूको वादी सत्यं न संशयः ॥ ६० ॥
राजानो वशमायान्ति तं दृष्ट्वा गिरिनन्दिनि ॥ ६१ ॥
भूतप्रेतग्रहा यक्षा राक्षसाः पन्नगादयः ।
विद्रवन्ति भयार्ता वै स्तोत्रस्यापि च कीर्तनात् ॥ ६२ ॥
प्रणमन्ति सदा भक्त्या तं दृष्ट्वा पाठकं मुदा ॥ ६३ ॥
राज्यार्थी लभते राज्यं स्तवराजस्य कीर्तनात् ॥ ६४ ॥
महापापोपपापं च तरन्ति स्तवकीर्तनात् ॥ ६५ ॥
अष्टसिद्धिमवाप्नोति लक्ष्मीस्तोत्रस्य कीर्तनात् ॥ ६६ ॥
पठनात् स्मरणात् सत्यं वच्मि ते गिरिनन्दिनि ॥ ६७ ॥
भक्त्या सम्पूजयेद्यस्तु गन्धपुष्पाक्षतैस्तथा ॥ ६८ ॥
योषिद्वामभुजे धृत्वा सर्वसौख्यमयी भवेत् ॥ ६९ ॥
शत्रवो मित्रतां यान्ति स्तवस्यास्य प्रसादतः ॥ ७० ॥
वैकुण्ठे च वसेन्नित्यं सत्यं वच्मि सुरेश्वरि ॥ ७१ ॥
