शक्ति भक्ति-सुख-दात्री,
जय भारत-माता॥
गुण-गण-भूति-वहा।
ऋषि-मुनि-पूजित-पादा,
गौरव-शान्ति-सुधा॥
ज्ञान-भानु-हृत-शोका।
अरि-दल-दलन-सुपूता,
आत्म-त्याग-कृत-तोषा॥
वरदा भूतियुता।
संसृति शोक-निरोद्धी,
करुणामय हृदया॥
परिहृत निज शुचि-गेहा।
क्रान्ति-सुधा रस-स्फीता,
कति न स्वर्गमुपनीता॥
शान्तिपरैरभिनन्द्या।
गरिमाऽहृत भव-भूति,
मुक्ता-मणि-गण-सूति॥
