आध्यात्मिक कृतियनकी रानी,
विजय-विभूति-मुक्तिकी दानी,
मुद-मंगलमय सुपुनीताकी॥
समराङ्गणमें सुर-नर-मुनि सभीसों वंदित,
पाप-पुण्य-कुञ्जर-चीताकी॥
आरति श्रीभगवद्गीताकी...॥
दुरित द्वैत दुख दूरि नसावनि,
अद्वैतामृत-धार बहावनि,
भव-दस्कन्ध सती सीताकी॥
आरति श्रीभगवद्गीताकी...॥
अनासक्त शुभ काज करावन,
मन-वच-कर्म संत-मन-भावन,
भक्ति-ज्ञान-जुग-जग-जीताकी॥
आरति श्रीभगवद्गीताकी...॥
विमल विवेक विश्व-विस्तारिणि,
सुमति-सुधर्म-सुराज्य प्रचारिणि,
'दामोदर' अनुपम गीताकी॥
आरति श्रीभगवद्गीताकी...॥
