रावेगम्बुन मन्मनोब्जसमुदी-र्णत्वम्बुँ गोल्पोयितिन् ।
देवा! मी करुणाशरत्समयमिन्-तेँ जालुँ जिद्भावना-
सेवं दामरतम्परै मनियॆदन्- श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 1 ॥
र्वाणश्रीँ जॆऱपट्टँ जूचिन विचारद्रोहमो नित्य क
ल्याणक्रीडलँ बासि दुर्दशलपा लै राजलोकाधम
श्रेणीद्वारमु दूऱँजेसि तिपुडो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 2 ॥
कान्त ल्पुत्रुलु नर्धमुन् तनुवु नि क्कम्बञ्चु मोहार्णव
चिभ्रान्तिं जॆन्दि जरिञ्चु गानि परमार्धम्बैन नीयन्दुँ दाँ
जिन्ताकन्तयु जिन्त निल्पँडुगदा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 3 ॥
गानिं बट्टक सन्ततम्बु मदि वेड्कं गॊल्तु नन्तस्सप
त्नानीकम्बुन कॊप्पगिम्पकुमु नन्नापाटीये चालुँ दे
जीनॊल्लं गरि नॊल्ल नॊल्ल सिरुलन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 4 ॥
न्नु विवेकिम्पँ डटञ्चु नेनु नरकार्णोराशिपालैनँ ब
ट्टवु; बालुण्डॊकचोट नाटतमितोड न्नूतँ गूलङ्गँ दं
ड्रि विचारिम्पक युण्डुना कटकटा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 5 ॥
नीमाट न्विननॊल्लकुण्डितिनॊ निन्ने दिक्कुगाँ जूडनो
येमी इट्टिवृधापराधिनगु नन्नी दुःखवाराशिवी
ची मध्यम्बुन मुञ्चि युम्पदगुना श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 6 ॥
नुवु नी विल्लु निधीश्वरुण्डु सखुँ डर्णोराशिकन्याविभुं
डुविशेषार्चकुँ डिङ्क नीकॆन घनुण्डुं गल्गुने नीवु चू
चि विचारिम्पवु लेमि नॆव्वँडुडुपुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 7 ॥
ब्रीतुञ्जेयगलेनु नीकॊऱकु दण्ड्रिञ्जम्पगाँजाल ना
चेतन् रोकट निन्नुमॊत्तवॆऱतुञ्जीकाकु नाभक्ति ये
रीतिन्नाकिँक निन्नु जूडगलुगन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 8 ॥
बेला नामॆड गट्टिनाडविक निन्नेवेलँ जिन्तिन्तु नि
र्मूलम्बैन मनम्बुलो नॆगडु दुर्मोहाब्धिलोँ ग्रुङ्कि यी
शीलामालपु जिन्त नॆट्लुडिपॆदो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 9 ॥
तप्पन् दव्वुल विन्न नन्तक भुजादर्पोद्धतक्लेशमुल्
तप्पुन्दारुनु मुक्तु लौदु रवि शास्त्रम्बुल्महापण्डितुल्
चॆप्पङ्गा दमकिङ्क शङ्क वलॆना श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 10 ॥
गूडुन्नप्पुडु श्रीविलासमुलु पैकॊन्नप्पुडुं गायकुल्
पाडङ्ग विनुनप्पुडुन् जॆलँगु दम्भप्रायविश्राणन
क्रीडासक्तुल नेमि चॆप्पवलॆनो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 11 ॥
जनमात्रुण्डननी महात्मु डननी संसारमोहम्बु पै
कॊननी ज्ञानमु गल्गनी ग्रहगनुल् गुन्दिम्पनी मेलुव
च्चिन रानी यवि नाकु भूषणमुलो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 12 ॥
ने विद्याभ्यसनम्बॊनर्चॆँ गरि चॆञ्चेमन्त्र मूहिञ्चॆ बो
धाविर्भावनिदानमुल् चदुवुलय्या! कावु! मीपादसं
सेवासक्तियॆ काक जन्तुततिकिन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 13 ॥
रायन् रापडॆ ऱॊम्मु मन्मध विहारक्लेशविभ्रान्तिचे
ब्रायं बायॆनु बट्टगट्टॆ दलचॆप्पन् रोत संसारमेँ
जेयञ्जाल विरक्तुँ जेयँगदवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 14 ॥
चन्नो कुञ्चमु मेकपॆण्टिकयॊ यी सन्देहमुल्मान्पि ना
कन्नार न्भवदीयमूर्ति सगुणा कारम्बुगा जूपवे
चिन्नीरेजविहारमत्तमधुपा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 15 ॥
टॆन पॊम्मण्टिनॊ यॆङ्गिलिच्चि तिनु तिण्टेँगानि कादण्टिनो
निनु नॆम्मिन्दग विश्वसिञ्चुसुजनानीकम्बु रक्षिम्पँजे
सिन नाविन्नपमेल गैकॊनवया श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 16 ॥
जालन् जम्पङ्ग नेत्रमु न्दिवियङ्गाशक्तुण्डनेँ गानु ना
शीलं बेमनि चॆप्पनुन्नदिँक नी चित्तम्बु ना भाग्यमो
श्रीलक्ष्मीपतिसेविताङ्घ्रियुगला! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 17 ॥
भोजाक्षीचतुरन्तयानतुरगी भूषादु लात्मव्यधा
बीजम्बुल् तदपेक्ष चालु मरितृप्तिं बॊन्दितिन् ज्ञानल
क्ष्मीजाग्रत्परिणाम मिम्मु दयतो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 18 ॥
रारा रम्मनि यञ्चुँ जॆप्पवु पृधारम्भम्बु लिङ्केटिकिन्!
नीर न्मुम्पुमु पाल मुम्पु मिँक निन्ने नम्मिनाँडं जुमी
श्रीरामार्चित पादपद्मयुगला श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 19 ॥
जोकैनट्टि कुठारमुण्ड ननल ज्योतुण्ड नीरुण्डँगा
बाकं बॊप्प घटिञ्चि चेतिपुनुकन् भक्षिम्पकाबोयचेँ
जेकॊं टॆङ्गिलिमांसमिट्लु दगुना श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 20 ॥
ग्राजीवम्बुनँ गाञ्चॆ दुःखमु कुरुक्ष्मापालुँ डामाटने
याजिं गूलॆ समस्तबन्धुवुलतो ना राजशब्धम्बु ची
छी जन्मान्तरमन्दु नॊल्लनुजुमी श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 21 ॥
नाजातिक्रिय लेर्पडुन् सुखमु मान्यश्रेणि कॆट्लब्बु रू
पाजीवालिकि नेदि दिक्कु धृतिनी भक्तुल् भवत्पादनी
रेजम्बुल् भजियिन्तु रेतॆऱँगुनन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 22 ॥
करिकर्णान्तमु लॆण्डमावुल ततुल् खद्योत्कीटप्रभल्
सुरवीधीलिखिताक्षरम्बु लसुवुल् ज्योत्स्नापःपिण्डमुल्
सिरुलन्देल मदान्धुलौदुरु जनुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 23 ॥
रन्नलम्मुलु तल्लिदण्ड्रुलु गुरुन्दापत्सहायुन्दु ना
यन्ना! यॆन्नडु नन्नु संस्कृतिविषादाम्भोधि दाटिञ्चि य
छ्चिन्नानन्दसुखाब्धिँ देल्चॆदॊ कदे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 24 ॥
क्षेपं बब्बिन राजकीटमुल नेसेविम्प्ँगानोप ना
शापाशम्बुलँ जुट्टि त्रिप्पकुमु संसारार्धमै बण्टुगाँ
जेपट्टं दय गल्गेनेनि मदिलो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 25 ॥
नी पल्लॆम्बु प्रसादमुं गॊनिकदा ने बिड्डनैनाँड न
न्नीपाटिं गरुणिम्पु मोँप निँक नीनॆव्वारिकिं बिड्डगाँ
जेपट्टं दगुँ बट्टि मानँ दगदो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 26 ॥
सुम्मी! नी मदिँ दल्लिदण्ड्रुलनटञ्चु न्जूडँगाँबोकु ना
किम्मैँ दल्लियुँ दण्ड्रियुन् गुरुँडु नीवे काक संसारपुं
जिम्मञ्जीकण्टि गप्पिन न्गडवु नन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 27 ॥
कॊडुकुल् पुट्टरॆ कौरवेन्द्रुन कनेकुल् वारिचे नेगतुल्
वडसॆं बुत्रुलु लेनि या शुकुनकुन् बाटिल्लॆने दुर्गतुल्!
चॆडुने मोक्षपदं मपुत्रकुनकुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 28 ॥
त्यहमुं बेर्कॊनुत्तमोत्तमुल बाधम्बॆट्टगानोपुने?
दहनुं गप्पङ्गञ्जालुने शलभसन्तानम्बु नी सेवँ जे
सि हतक्लेसुलु गारुगाक मनुजुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 29 ॥
यडुगम्बोयिन मोदु नीदु पदपद्माराधकश्रेणियु
न्नॆडकु न्निन्नु भजिम्पङ्गाँगनियु नाकेला परापेक्ष को
रॆडि दिङ्केमि भवत्प्रसादमॆ तगुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 30 ॥
मुदितल् चित्रदुकूलमु ल्परिमलम्बु ल्मोक्षमीँजालुने?
मदिलो वीनि नपेक्षसेसि नृपधामद्वारदेशम्बुँ गा
चि दिनम्बुल् वृधपुत्तुरज्ञुलकटा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 31 ॥
पासी पायरु पुत्रमित्रजन सम्पद्भ्रान्ति वाञ्छालतल्
कोसी कोयदु नामनं बकट नीकुं ब्रीतिगा सत् क्रियल्
चेसी चेयदु दीनि त्रुल्लणपवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 32 ॥
निन्ने निष्ठ भजिञ्चॆद न्निरुपमोन्निद्रप्रमोदम्बु ना
कॆन्नण्डब्बॆडु न्न्तकालमिँक नेनिट्लुन्न नेमय्यॆडिं?
जिन्नम्बुच्चक नन्नु नेलुकॊलवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 33 ॥
न्नॆवैद्युण्डु चिकित्सँ ब्रोवँगलँडो येमन्दु रक्षिञ्चुनो
ए वेल्पुल् कृपँजूतुरो यनुचु निन्निन्तैनँ जिन्तिम्पँडा
जीवच्छ्राध्धमुँ जेसिकॊन्न यतियुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 34 ॥
ननमध्योपल वेदिकाग्रमुन नानन्दम्बुनं बङ्कजा
नननिष्थ न्नुनुँ जूडँ गन्ननदिवो सौख्यम्बु लक्ष्मीविला
सिनिमायानटनल् सुखम्बु लगुने श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 35 ॥
द्भालव्रातमु निच्चिपुच्चुटनु सम्बन्धम्बु गाविञ्चि या
मालर्मम्बुन बान्धवं बनॆडि प्रेमं गॊन्दऱं द्रिप्पँगाँ
सीलन्सील यमर्चिन ट्लॊसँगितो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 36 ॥
ड नुपायम्बु घटिम्पु मागतुल रॆण्ट न्नेर्पु लेकुन्न ले
दनि नाकिप्पुड चॆप्पु चेयँगल कार्यम्बुन्न संसेवँ जे
सि निनुं गाञ्चॆदँगाक कालमुननो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 37 ॥
य्युदयास्ताचलसन्धि नाज्ञ नॊकँ डायुष्मन्तुण्डै वीरिय
भ्युदयं बॆव्वरु चॆप्पँगा विनरॊ यल्पुल्मत्तुलै येल च
च्चॆदरो राजुल मञ्चु नक्कटकटा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 38 ॥
द्याजातक्षम सत्यभाषणमु विद्वन्मित्रसंरक्षयुन्
सौगन्यम्बु कृतम्बॆऱुङ्गटयु विश्वासम्बु गाकुन्न दु
र्बीजश्रेष्थुलु गाँ गतम्बु गलदे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 39 ॥
चिन पुण्यात्मुलु नेनु नॊक्कसरिवो चिन्तिञ्चि चूडङ्ग नॆ
ट्लनिनं गीटफणीन्द्रपोतमदवे दण्डोग्रहिंसाविचा
रिनि गाङ्गाँ निनु गानँगाक मदिलो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 40 ॥
टविकत्वम्बुँ प्रियम्बुलै भुगहशुण्डालातवीचारुलन्
भवदुःखम्बुलँ बापु टॊप्पुँ जॆलँदिम्बाटिञ्चि कैवल्यमि-
च्चि विनोदिञ्चुट केमि कारणमया श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 41 ॥
ट्टमु सिध्धिञ्चिन नास दीऱदु निरूढक्रोधमुन् सर्वलो-
कमुल न्म्रिङ्गिन मान दिन्दुँ गल सौ-ख्यं बॊल्ल नीसेवँ जे-
सि महापातकवारिराशिँ गडतुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 42 ॥
मनुमानम्बिँक लेदु नम्ममनि तारावेल नारेवुनन्
मुनुँगम्बोवुचु बास सेयुट सुमी मुम्माटिकिं जूडगाँ
जॆनटु ल्गानरु दीनिभावमिदिवो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 43 ॥
भवदङ्घ्रिस्तुतिचेतँगाक विलसद्बालक्षुधाक्लेशदु
ष्टविधुल्मानुनॆ चूड मेँकमॆडचण्टन्दल्लि कारुण्यद्ब
ष्थिविशेषम्बुन निच्चि चण्टँबलॆ नो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 44 ॥
बवु शत्रुं डतिमित्रुँडौ विषमु दिव्याहारमौ नॆन्नँगा
नवनीमण्डलिलोपलन् शिव शिवे त्याभाषणोल्लासिकिन्
शिव नी नाममु सर्ववश्यकरमौ श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 45 ॥
लेवो येऱुलँ बल्लवास्तरणमुल् लेवो सदा यात्मलो
लेवो नीवु विरक्तुल न्मनुप जालिं बॊन्दि भूपालुरन्
सेवल् सेयँगँ बोदु रेलॊकॊ जनुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 46 ॥
सिन कर्मम्बुल प्रोवु लॆन्नि गलवो चिन्तिञ्चिनन् गान नी
जननम्बे यनि युन्न वाड निदिये चालिम्पवे निन्नुँ गॊ
ल्चिन पुण्यम्बुनकुं गृपारतुँडवै श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 47 ॥
पनदुःखादुलँ बॊन्दकुण्ड ननुकम्पादृष्टि वीक्षिञ्चि या
वॆनुकन् नीपदपद्ममुल् दलँचुचुन् विश्वप्रपञ्चम्बुँ बा
सिन चित्तम्बुन नुण्डँजेयङ्गदवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 48 ॥
डलियो पादकराक्षियुग्मम्बुलु षट्कञ्जम्बुलो मोमु दा
जलजम्बो निटलम्बु चन्द्रकलयो सङ्गम्बु योगम्बॊ गा
सिलि सेविन्तुरु कान्तलन् भुवि जनुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 49 ॥
ल्कलशब्धध्वनु लञ्चिताम्बर मलङ्कारम्बु दीप्तु ल्मॆऱुं
गुलु नैवेद्यमु माधुरी महिमगाँ गॊल्तुन्निनुन् भक्तिरं
जिल दिव्यार्चन गूर्चि नेर्चिन क्रियन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 50 ॥
ब्धालङ्कारविशेषभाषल कलभ्यम्बैन नीरूपमुं
जालुँजालुँ गवित्वमुल्निलुचुने सत्यम्बु वर्णिञ्चुचो
ची! लज्जिम्परुगाक मादृशकवुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 51 ॥
लेलॆम्मन्न नरण्टिपण्ड्लुँ गॊनि तेलेकुन्न नेनॊल्लनं
टे लालिम्परे तल्लिदण्ड्रुलपु डट्ले तॆच्चि वात्सल्य ल
क्ष्मीलीलावचनम्बुलं गुडुपरा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 52 ॥
बु लटञ्चुं दॆवुलञ्चु दिष्ट्मनुचुन् भूतम्बुलञ्चु न्विषा
दुलटञ्चु न्निमिषार्ध जीवनमुलञ्चुं ब्रीतिँ बुट्टिञ्चि यी
सिलुगुल् प्राणुलकॆन्नि चेसितिवया श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 53 ॥
गलसीमम्बुन दण्ड नासिकतुदन् गन्धप्रसारम्बु लो
पल नैवेद्यमुँ जेर्चु ने मनुज्ँ डाभक्तुण्डु नीकॆप्पुडुं
जॆलिकाडै विहरिञ्चु रौप्यगिरिपै श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 54 ॥
वेल न्वारि भजिम्पँ जालिपड काविर्भूत मोदम्बुनं
गालम्बॆल्ल सुखम्बु नीकु निँक भक्तश्रेणि रक्षिम्पके
श्रीलॆव्वारिकिँ गूडम्बॆट्टॆदवया श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 55 ॥
न्नलन्तलबॆट्टिन नी पदाब्धमुलँ बायञ्जाल नेमिच्चिनं
गलधौताचल मेलु टम्बुनिधिलोँ गापुण्डु टब्जम्बु पैँ
जॆलुवॊप्पुन् सुखियिम्पँ गाञ्चुट सुमी श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 56 ॥
बुलितोलु न्भसितम्बुँ बाँपतॊदवुल् पोकुण्डँ दोँबुट्लकै
तॊलि नेवारलतोडँ बुट्टक कलादुल्गल्गॆ मेलय्यॆना
सिलुवुलूरमुचेसिकॊं टॆऱिङ्गिये श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 57 ॥
मति नूहिञ्चि शरीर मस्थिरमु ब्रह्मम्बॆन्न सत्यम्बु गां
चिति मञ्चुन् सभलन् वृधावचनमु ल्चॆप्पङ्गने कानि नि
र्जितचित्तस्थिर सौख्यमुल् दॆलियरो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 58 ॥
ततमुं गूटिकिनै चरिम्प विनलेदा 'यायु रन्नं प्रय
च्छति' यञ्चुन्मॊऱवॆट्टगा श्रुतुलु संसारान्धकाराभि दू
षितदुर्मार्गुल् गानँ गानम्बडवो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 59 ॥
नतँ डादर्पकु वेग नॊत्त गवयं बाम्बोतुनुं दाँकि यु
ग्रतँ बोराडङ्गनुन्न युन्नडिमि लेँगल्वोलॆ शोकानल
स्थितिपालै मॊऱपॆट्टुनन् मनुपवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 60 ॥
नन्ता दुःखपरम्परानिवितमॆ मेनन्ता भयभ्रान्तमे
यन्तानन्तशरीरशोषणमॆ दुर्व्यापारमे देहिकिन्
जिन्तन् निन्नुँ दलञ्चि पॊन्दरु नरुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 61 ॥
शान्तिन् बॊन्दितिँ जालुँजालु बहुराजद्वारसौख्यम्बुलन्
शान्तिं बॊन्दॆदँ जूपु ब्रह्मपदराजद्वारसौख्यम्बु नि
श्चिन्तन् शान्तुँड नौदु नी करुणचे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 62 ॥
बुत्री पुत्र कलत्र रक्षण कलाबुध्धिन् नृपाला(अ)धमन्
बात्रं बञ्चु भजिम्पँबोदु रितियुन् भाष्यम्बॆ यिव्वारिचा
रित्रं बॆन्नँडु मॆच्च नॆञ्च मदिलो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 63 ॥
पकलाश्रेणि विवेकसाधनमुलॊप्पन् बूनि यानन्दता
रकदुर्गाटविलो मनोमृगमुगर्वस्फूर्ति वारिञ्चुवा
रिकिँगा वीडु भवोग्रबन्धलतिकल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 64 ॥
म्मु कवित्वम्बुलु नाकुँ जॆन्दनिवि येमो यण्टिवा नादुजि
ह्वकु नैसर्गिक कृत्य मिन्तिय सुमी प्रार्धिञ्चुटे कादु को
रिकल न्निन्नुनुगान नाकु वशमा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 65 ॥
त्सुकतं देरँगँ बोवु नच्चट महा दुःखम्बु सिद्धिञ्चुँ; ग
र्मकलाभाषलकॆल्लँ ब्रापुलगु शास्त्रम्बु ल्विलोकिञ्चुवा
रिकि नित्यत्वमनीष दूरमगुँजू श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 66 ॥
लॊकॊ तामॆन्नँडुँ जावरो तमकुँ बोवो सम्पदल् पुत्रमि
त्रकलत्रादुलतोड नित्य सुखमन्दं गन्दुरो युन्नवा
रिकि लेदो मृति यॆन्नँडुं गटकट श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 67 ॥
डेकार्पण्यपु माटलाड नरुगं डॆव्वारितो वेषमुल्
गैकोडे मतमुल् भजिम्पँ डिलनेकष्टप्रकारम्बुलन्
जीकाकै चॆडिपोँदु जीवनदशन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 68 ॥
मातण्ड्रान सहिम्परादु प्रतिकर्मम्बिञ्चुके जेयगाँ
बोते दोसमु गान मानि यतिनै पोँगोरिनन् सर्वदा
चेतःक्रोधमु मान दॆट्लु नडुतुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 69 ॥
वदरन् संशयभीकराटवुलं द्रोवलप्पि वर्तिम्पँगा
मदनक्रोधकिरातुलन्दुँ गनि भीमप्रौढिचेँ दाँकिनं
जॆदरुं जित्तमु चित्तगिम्पँगदवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 70 ॥
बूसिन्देण्टिदि पूँत लेण्टिवि मदा(अ)पूतम्बु ली देहमुल्
मूसिन्देण्टिदि मूँतलेण्टिवि सदामूढत्वमे कानि ताँ
जेसिन्देण्टिदि चेन्तलेँटिवि वृधा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 71 ॥
काशीवल्लभुँ गॊल्वम्बोदुनॊ महा कालेशुँ बूजिन्तुनो
नाशीलं बणुवैन मेरु वनुचुन् रक्षिम्पवे नी कृपा
श्री शृङ्गारविलासहासमुलचे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 72 ॥
दयतोँ गॊम्मनवच्चु सेवकुनि यर्धप्राणदेहादुल
न्नियु ना सॊम्मनवच्चुँगानि सिरुलन्निन्दिञ्चि निन्नात्मनि
ष्क्रियतं गानँगरादु पण्डितुलकुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 73 ॥
जेयुं गायजुँ जम्पिरो कपटलक्ष्मी मोहमुं बासिरो
यायुर्दयभुजङ्गमृत्युवु ननायासम्बुनन् गॆल्चिरो
श्रेयोदायक् लौदु रॆट्टु लितरुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 74 ॥
द विनिर्मिञ्चॆद वेल जन्तुवुल नेतत्क्रीडले पातक
व्यवहारम्बलु सेयुनेमिटिकि मायाविद्यचे ब्रॊद्दुपु
च्चि विनोदिम्पँग दीन नेमि फलमो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 75 ॥
वॆनुकन् मुन्दट वच्चु दुर्मरणमुल् वीक्षिम्प भीतय्यॆडुन्
ननु नेँजूडग नाविधुललञ्चियुन् नाके भयं बय्यॆडुं
जॆनकुञ्जीँकटियायॆँ गालमुनकुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 76 ॥
ग रहस्यम्बुलु वेद शास्त्रमुलु वक्काणिञ्चितिन् शङ्कवो
दरयं गुम्मडिकायलोनि यवगिञ्जन्तैन नम्मिच्ञ्चि सु
स्थिरविज्ञानमु त्रोवँ जॆप्पँगदवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 77 ॥
र्मदुलै यिप्पुडु वारॆ धर्ममु लॊनर्पं दम्मु दैवम्बु न
व्वडॆ रानुन्न दुरात्मुलॆल्ल दमत्रोवं बोवरे एल चे
सॆदरो मीँदु दलञ्चिचूड कधमुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 78 ॥
वीसम्बैननु वॆण्टवच्चुनॊ जगद्विख्यातिँ गाविञ्चुनो
दोसम्बु ल्बॆडँ बॊपुनो वलसिनन्दोड्तो मिमुं जूपुनो
छी! संसारदुराश येलुदुपवो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 79 ॥
पक नीडन्वॆदकुं जलिं जडिचि कुम्पट्लॆत्तुकोँजूचु वा
नकु निण्डिण्ड्लुनु दूऱु नीतनुवु दीनन्वच्चु सौख्यम्बु रो
सि कडासिम्परुगाक मर्त्वुलकट श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 80 ॥
गाडा मुङ्गिलि वारणासि! कडुपे कैलासशैलम्बु मी
पादध्यानमु सम्भविञ्चुनपुडे भाविम्प नज्ञानल
क्ष्मीदारिद्र्युलु गारॆ लोकु लकटा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 81 ॥
ग महोद्योगमु सेयनॆम्मनमुदॊङ्गं बट्टि वैराग्यपा
शमुलं जुट्टि बिगिमञ्चि नीदुचरण स्तम्भञ्जुनं गट्टिवै
चि मुदं बॆप्पुडुँ गल्गँजेय गडवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 82 ॥
ला धीचातुरिँ जेसॆँ जेसिन गुलामापाटने पोक क्षु
द्बाधादुल् गलिगिम्पनेल यदि कृत्यम्बैन दुर्मार्गुलं
जी! धात्रीशुलँ जेयनेँटि ककटा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 83 ॥
बडयन्नेरक पॆक्कुदैवमुलकुं बप्पुल् प्रसादम्बुलं
गुडुमुल् दोसॆलु सारॆसत्तुलडुकुल् गुग्गिल्लुनुं बेट्टुचुं
जॆडि यॆन्दुं गॊऱगाकपोदु रकटा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 84 ॥
मत्तत्वम्बु तदङ्कुरं ऐनृतमुल् माऱाकु लत्यन्तदु
द्वृत्तुल् पुव्वुलुँ बण्ड्लु मन्मधमुखा विर्भूतदोषम्बुलुं
जित्ताध्युन्नतनिम्बभूजमुनकुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 85 ॥
म्मा पाठम्मॊनरिन्तुनन्न यतँडुन् मञ्जुप्रबन्धम्बु नि
ष्टापूर्तिं बठियिञ्चुचुन्न यतँडुन् सद्बान्धवुल् गाक ची
ची! पृष्ठागतबान्धवम्बु निजमा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 86 ॥
दम्पुल्वॆट्टि कलङ्कमु ल्नऱकि बन्धक्लेशदोषम्बुलं
जिम्पुल्सेसि वयोविलासमुलु सङ्क्षेपिञ्चि भूतम्बुलं
जॆम्पल्वेयक निन्नुँ गाननगुना श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 87 ॥
यी जन्मम्बु तरिम्पँजेयगल मिम्मे प्रॊद्दु सेविञ्चु नि
र्व्याजाचारमु सौख्यमो तॆलियलेरौ मानवु ल्पापरा
जीजातातिमदान्धबुद्धु लगुचुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 88 ॥
पन्नु ल्गन्ननिधान मय्यॆडि धनभ्रान्तिन् विसर्जिम्पले
कुन्ना रॆन्नँडु निन्नु गण्डु रिक मर्त्वुल् गॊल्वरेमो निनुन्
विन्नं बोवक यन्यदैवरतुलन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 89 ॥
गिन्ने ब्रह्मकपाल मुग्रमगु भोगे कण्ठहारम्बु मेल्
निन्नीलागुन नुण्टयुं दॆलिसियुन् नीपादपद्मम्बु चे
र्चॆन् नारयणुँ डॆट्लु मानसमुँ दा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 90 ॥
दोरन्त्स्थलि बग्गनं बॊडुचुचुन् दुर्भाषलाड न्मऱिन्
वारिं ब्रार्धनचेसि राजुलकु सेवल्सेयँगाँबोरुल
क्ष्मीराज्यम्बुनु गोरि नीमरिजनुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 91 ॥
चीरानीकमु वीधुलं दॊरुकरो शीतामृतस्वच्छवाः
पूरं बेरुलँ बाऱदो तपसुलम्ब्रोवङ्ग नीवोपवो
चेरं बोवुदुरेल रागुल जनुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 92 ॥
नियमं बॆन्तो फलम्बु नन्तियॆकदा नीवीय पिण्डॆन्तो अं
तियका निप्पटियुं दलम्पननु बुद्धिं जूड; नेलब्बुनि
ष्क्रियतन् निन्नु भजिम्प किष्टसुखमुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 93 ॥
कारोकारमकारयुक्तमगु नोङ्काराभिधानम्बु चॆ
न्नारुन् विश्व मनङ्गँ दन्महिमचे नानादबिन्दुल् सुख
श्री रञ्जिल्लँ गडङ्गु नीवदॆ सुमी श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 94 ॥
लोभम्बेटिकि वारि कोर्कुलु कृपलुत्वम्बुनं दीर्मरा
दा भव्यम्बुँ दलञ्चि चूडु परमार्धं बिच्चि पॊम्मन्न नी
श्री भाण्डरमुलोँ गॊऱन्तपडुना श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 95 ॥
'मुदियङ्गा मुदियङ्गँ बुट्टु घनमौ मोहम्बु लोभम्बु' न
न्नदि सत्यम्बु कृपं दलम्प नॊकवुण्यात्मुण्डु निन्नात्म गॊ
ल्चि दिनम्बुन् मॊऱवॆट्टँगाँ गटगटा! श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 96 ॥
लोलाजालकचित्रगुप्तमुखव ल्मीकोग्रजिह्वाद्भुत
व्यलव्यालविरोधि मृत्युमुखदंष्ट्रा(अ)हार्य वज्रम्बु दि
क्चेलालङ्कृत! नीदुनाम मरयन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 97 ॥
मदिकिं बथ्यमु गादु सर्वमुनकुन् मध्यस्थुँडै सत्यदा
नदयादुल् गल राजु नाकॊसँगु मेनव्वानि नी यट्लचू
चि दिनम्बुन् मुदमॊन्दुदुन् गडपटन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 98 ॥
भीतिं बॊन्दँगनेल चावुनकुँगाँ बॆण्ड्लामुबिड्डल् हित
व्रातम्बुन् बलविम्प जन्तुवुलकुन् वालायमैयुण्डङ्गाँ
जेतोवीधि नरुण्डु निन्गॊलुवँडो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 99 ॥
ख्यातिं बॊन्दुट कॊण्डॆकाँडवुट हिंसारम्भकुण्डौट मि
ध्यातात्पर्यमुलाडुटन्नियुँ बरद्रव्यम्बुनाशिञ्चि यी
श्री ता नॆन्नियुगम्बु लुण्डँगलदो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 100 ॥
ल्पडितिं गान ग्रहिम्परानि निनु नॊल्लञ्जालँ बॊम्मञ्चु निल्
वॆलन्द्रोचिनँ जूरुपट्टुकॊनि ने व्रेलाडुदुं गोर्किँ गो
रॆडि यर्धम्बुलु नाकु नेल यिडवो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 101 ॥
व्यसनमुल् साधितपञ्चवर्णरसमुल् वैराग्यवन्तुल् नितां
तसुखस्वान्तुलु सत्यभाषणलु नुद्यद्रत्नरुद्राक्षरा
जिसमेतुल् तुदनॆव्वरैन गॊलुतुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 102 ॥
वॆलिवाड न्मऱि बाँपनिल्लुगलदावेसालुगा नक्कटा!
नलि ना रॆण्डु गुणम्बु लॆञ्चि मदिलो नन्नेमि रोयङ्ग नी
चॆलुवम्बैन गुणम्बु लॆञ्चुकॊनवे श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 103 ॥
कड नेँडादिकॊ यॆन्नँडो यॆऱुँ ग मीकायम्बु लीभूमिपैँ
बडगा नुन्नवि धर्ममार्गमॊकटिं बाटिम्प री मानवुल्
चॆडुगुल् नीपदभक्तियुं दॆलियरो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 104 ॥
ततु ले लॆक्क विलासिनीजनसुवस्रव्रात भूषाकला
पतनूजादिक मेमिदुर्लभमु नी पादम्मु लर्चिञ्चुचो
जितपङ्केरुहपादपद्मयुगला श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 105 ॥
श्चलबक्तिप्रपत्तिचे नरुँडु पूजल् सेयँगा धन्युँडौ
निल गङ्गाजलचन्द्रखण्डमुल दानिन्दुं दुदिं गाञ्चु नी
चॆलुवं बन्तयु नी महत्त्व मिदिगा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 106 ॥
विमलम्मुल् कमलाभमुल् जितलसद्विद्युल्लतालास्यमुल्
सुमनोबाणजयप्रदम्मुलनुचुन् जूचुन् जनम्बूनिहा
रिमृगाक्षीनिवहम्मुकन्नुगवलन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 107 ॥
द्घटवच्चन्द्रशिलाजपाकुसुमरु क्साङ्गत्यवत्तञ्चुवा
क्पटिमल् नेर्तुरु चित्सुखं बनुभविम्पन् लेक दुर्मेधनुल्
चिटुकन्नं दलपोयँजूतु रधमुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 108 ॥
चनुना नी पादपद्मसेवकुलँ दुच्छं बाडु दुर्मार्गुलं
बॆनुपन् नीकुनु नीदुभक्तततिकिन् भेदम्बु गानङ्ग व
च्चॆनॊ लेकुण्डिन नूऱकुण्डगलवा श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 109 ॥
श्वरुनिन् गाल्चिन फाललोचनशिखा वर्गम्बु चल्लाऱॆनो
परनिन्दापरुलन् वधिम्प विदियुन् भाष्यम्बॆ वारेमि चे
सिरि नीकुन् बरमोपकार मरयन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 110 ॥
नरनाधाश्रय मोडबेरमुनु बॆन्मन्त्रम्बु सिद्धिञ्चिनन्
अरयन् दॊड्डफलम्बु गल्गुनदिगा काकार्यमे तप्पिनन्
सिरियुं बोवुनु ब्राणहानियु नगुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 111 ॥
प्रुन कुद्वाहमु जेसि सत्कृतिकिँ बात्रुण्डै तटाकम्बु ने
र्पुनँ द्रव्विञ्चि वनम्बु वॆट्टि मननी पोलेडु नीसेवँ जे
सिन पुण्यात्मुँडु पोवु लोकमुनकुन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 112 ॥
नतँडे मेटि कवित्ववैखरिनि सद्यःकाव्यनिर्मात तत्
प्रतिभ ल्मञ्चिनि तिट्टुपद्यमुलु चॆप्पुं दातँडैनन् ममुं
ग्रितमे चूचॆनु बॊम्मटञ्चु रधमुल् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 113 ॥
जेकॊण्टिन् बिरुदम्बु कङ्कणमु मुञ्जेँ गट्टितिं बट्टितिन्
लोकुल् मॆच्च व्रतम्बु नातनुवु कीलुल् नेर्पुलुं गावु छी
छी कालम्बुलरीति दप्पॆडु जुमी श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 114 ॥
रच्चल्सेयक यार्जवम्बु कुजन व्रातम्बुचेँ ग्राङ्गि भू
भृच्चण्डालुरँ गॊल्चि वारु दनुँ गोपिम्मन् बुधुं डार्तुँडै
चिच्चारं जमु रॆल्लँ जल्लुकॊनुनो श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 115 ॥
कान्तासङ्घमु रोयनप्पुडे जरक्रान्तम्बु गानप्पुडे
विन्तल्मेन जरिञ्चनप्पुडॆ कुरुल्वॆल्लॆल्ल गानप्पुडे
चिन्तिम्पन्वलॆ नीपदाम्बुजमुलन् श्री कालहस्तीश्वरा! ॥ 116 ॥
