ईश्वर उवाच
धूम्राक्षमथिनी धन्या धन्यस्थाननिवासिनी ॥ 1 ॥
अघोरमन्त्रसम्प्रीता अघोरमन्त्रपूजिता ॥ 2 ॥
वृद्धा विरूपा विधवा विद्या च विरलद्विजा ॥ 3 ॥
कराली च करालास्या कङ्काली शूर्पधारिणी ॥ 4 ॥
क्षुत्पिपासार्दिता नित्या ललज्जिह्वा दिगम्बरी ॥ 5 ॥
विमुक्तकुन्तला कीर्त्या कैलासस्थानवासिनी ॥ 6 ॥
विवर्णा चञ्चला दुष्टा दुष्टविध्वंसकारिणी ॥ 7 ॥
चण्डवेगा चण्डगतिश्चण्डमुण्डविनाशिनी ॥ 8 ॥
कृष्णा कपर्दिनी कुल्ला कृष्णारूपा क्रियावती ॥ 9 ॥
चतुर्भुजा ललज्जिह्वा शत्रुसंहारकारिणी ॥ 10 ॥
दुराराध्या दुराचारा दुर्जनप्रीतिदायिनी ॥ 11 ॥
कलहा च कलिप्रीता कलिकल्मषनाशिनी ॥ 12 ॥
महादेवप्रिया मेधा महासङ्कटनाशिनी ॥ 13 ॥
भैरवी भुवना भीमा भारती भुवनात्मिका ॥ 14 ॥
त्रिलोकेशी त्रिकालज्ञा त्रिस्वरूपा त्रयीतनुः ॥ 15 ॥
इति धूमामहत् स्तोत्रं नाम्नामष्टशतात्मकम् ॥ 16 ॥
कारागारे रिपुग्रस्ते महोत्पाते महाभये ॥ 17 ॥
गुह्याद्गुह्यतरं गुह्यं गोपनीयं प्रयत्नतः ॥ 18 ॥
