साम्राज्यदायिनीं देवीं गजलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ १ ॥
प्रभूतैश्वर्यसन्धात्रीं धनलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
पशुसम्पत्स्वरूपां च धान्यलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
यद्भक्तानां विनीतानां धैर्यलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥
सम्भवन्ती च सन्तानलक्ष्मीं देवीं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
अमृतत्वप्रदात्रीं च विद्यालक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
प्रसन्नां स्त्रैणसुलभां आदिलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥
सर्वेश्वरीं श्री विजयलक्ष्मीं देवीं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥
मोक्षलक्ष्मीं महालक्ष्मीं सर्वलक्ष्मीं नमाम्यहम् ॥ ९ ॥
सच्चिदानन्दपूर्णत्वं अष्टलक्ष्मीस्तुतेर्भवेत् ॥ १० ॥
