कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज॥
आदिशक्ति सब जग की त्राता॥
एहि ते भयउ नाम विख्याता॥
अस्तुति करहिं देव नर- नारी॥
हाथहिं मुद्गर गदा विराजै॥
अमित तेज प्रकटत है भाला॥
शोभा निरखि सकल जन मोहै॥
भक्तन की तुम हो वरदानी॥
सुर नर नाग करत सब वन्दन॥
वेद पुराण सन्त अस भाखै॥
जाके किये होत दुख- नाशा॥
पीतवसन देवी पहिरावै॥
अबिर गुलाल सुपारी चन्दन॥
सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना॥
प्रेम- सहित तब करै आरती॥
पुरवहु मातु मनोरथ मोरे॥
करहु कृपा मोपर जनजानी॥
तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु॥
अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं॥
सो नर मनवांछित फल पावै॥
ताके वश सचराचर होई॥
भक्ति प्रेम से हवन करावै॥
निश्चय सुख- संपति सब होई॥
ताके गृह सुख- सम्पत्ति भरई॥
निश्चय वाको रिपु सब छीजै॥
तेहि के वश में राजा होई॥
ताको सकल बन्ध कट जावै॥
बीजमन्त्र तुम्हरो उच्चरहीं॥
तेहि कर मिटत सकल सन्तापा॥
साधक जाप करै तहँ सोई॥
जामे नहिं कछु संशय लावे॥
साधक जाप करै मन लाई॥
सकल काज तेहि कर सिधि होई॥
ताकर होय सुयश विस्तारा॥
अल्पकाल महँ रिपुहिं नसाई॥
वाको पूरन हो सब कामा॥
व्याधि रहित ताकर तन होई॥
पवै पुत्रादिक फल चारी॥
धरे ध्यान होवै कल्याना॥
नाम सदा शुभ मंगलकारी॥
तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा॥
हरिद्वार मण्डल बसूँ, धाम हरिपुर ग्राम॥
चालीसा रचना कियौं, तव चरणन को दास॥
