जय दुर्गे खप्पर वाली ।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥
भीर पड़ी है भारी ।
करके सिंह सवारी ॥
दस भुजाओं वाली ।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥
बड़ा ही निर्मल नाता ।
माता ना सुनी कुमाता ॥
अमृत बरसाने वाली ॥
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥
न चाँदी न सोना ।
इक छोटा सा कोना ॥
लाज बचाने वाली ।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ॥
