आरती कीजै बुध देवा की...॥
चन्द्र के नन्दन रोहिणी सूत। शरण आये की राखहु पत॥
आरती कीजै बुध देवा की...॥
पीत वस्त्रा तन पर है सोहे। भक्तन के मन को तुम मोहे॥
आरती कीजै बुध देवा की...॥
कहैं 'बुध' जो शरण में आवै। सकल मनोरथ पूर्ण हो जावै॥
आरती कीजै बुध देवा की...॥
