Lord Budha (Mercury)

बुध चालीसा

(Budha Chalisa)

Also known as kanakamaya tana subhaga vapu buddhi subuddhi

A Hindi chalisa to Budha which is as much a portrait of a planet as of a god. The opening dohas give the parentage all the Mercury hymns turn on, son of the Moon and of Rohini, and the body then fixes the iconography: water-pot and book and rosary in the hands, a pearl garland at the neck, tilaka on the forehead, a white body on a white seat with green cloth over it. The offerings are named just as exactly, green mung and durva grass, sandal and unbroken rice. From there it turns practical in a way few chalisas are, addressing its petitioners by occupation: the merchant who meditates on him profits in trade, the student who recites passes the examination, the one with a defect of speech recovers, the keeper of the Wednesday fast is relieved. It closes on what happens when Budha's period comes round in a birth chart.

Read In:

Script: Devanagari (देवनागरी) — also the script of Hindi, Marathi, Nepali and Konkani.

॥ दोहा ॥
कनकमय तन सुभग वपु, बुद्धि सुबुद्धि प्रदाता।
जय जय जय बुध देव जी, शरण तुम्हारी आता॥
बुध ग्रह दोष निवारणा, विघ्न हरण सुखकार।
चन्द्र सुत रोहिणी-नन्दन, करहुं भक्त उद्धार॥
॥ चौपाई ॥
जय बुध देव बुद्धि के दाता।
जय जय जय बुध देव विधाता॥
तुम हो प्रभु चन्द्र के नन्दन।
रोहिणी सुत हो देव निरंजन॥
बुध ग्रह रूप में तुम हो सोहे।
रूप देखि सुर नर मुनि मोहे॥
ज्योतिष शास्त्र के तुम हो स्वामी।
अन्तर्यामी हो गुणधामी॥
हाथ कमण्डल पुस्तक माला।
गले सुशोभित मुक्ता-माला॥
मस्तक तिलक सोहे सुहावन।
दर्शन कर होते हैं पावन॥
श्वेत वर्ण तन श्वेत आसन।
हरित वस्त्र मन मोहन दर्शन॥
हरी मूंग दूर्वा प्रिय तुमको।
चंदन अक्षत अर्पण हमको॥
जो जन तुमको ध्याते हैं।
मनवांछित फल पाते हैं॥
बुद्धिहीन को बुद्धि देते।
निर्धन को तुम धन दे देते॥
व्यापारी जो तुमको ध्यावे।
व्यापार में वह लाभ पावे॥
विद्यार्थी जो पाठ करे।
परीक्षा में वह पार तरे॥
वाणी दोष जो कोई पावे।
तेरा ध्यान धरे सुध जावे॥
बुधवार जो व्रत है करता।
उसके दुःख प्रभु तुम हो हरता॥
मूंग दाल का दान जो देवे।
बुध देव का आशीष लेवे॥
सोम पुत्र सौम्य गुण खानी।
बोध विचार पटु बुध वाणी॥
तारा नन्दन बुध बलशाली।
करते दूर सभी दुःख काली॥
जन्म कुण्डली जहाँ विराजे।
उस भाव का शुभ फल बाजे॥
ग्रह दशा जब बुध की आवे।
जो भक्त ध्यान धर पाठ कराये॥
संकट टलें दोष सब हारें।
बुध देव भक्तन को उबारें॥
नारायण के तुम हो प्यारे।
भक्तों के हो भाग्य सितारे॥
शिक्षा ज्ञान बुद्धि के दाता।
ग्रह दोष हरो हो जगत-त्राता॥
सुर नर मुनि सब मिल ध्यावें।
बुध देव की महिमा गावें॥
जो यह चालीसा नित गाये।
बुध देव की कृपा वह पाये॥
जय जय जय बुध देव दयाला।
करहुं भक्त को मालामाला॥
बुध चालीसा जो नित पढ़े।
ज्ञान-बुद्धि-धन सदा बढ़े॥
॥ दोहा ॥
बुध चालीसा जो पढ़े, भक्ति भाव मन लाय।
उसकी बुद्धि बढ़े सदा, सब दुःख दूर हो जाय॥
सोम-नन्दन बुध देव जी, करहुं कृपा अपार।
विद्या बुद्धि धन-यश दो, उतरे भव से पार॥

Explore More