त्रिभुवन-तिमिर-निकंदन भक्त-हृदय-चन्दन॥ १ ॥
दुखहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ २ ॥
अघ-दल-दलन दिवाकर दिव्य किरण माली॥ ३ ॥
विश्व-विलोचन मोचन भव-बंधन भारी॥ ४ ॥
सेवत सहज हरत अति मनसिज-संतापा॥ ५ ॥
वृष्टि-विमोचन संतत परहित-व्रतधारी॥ ६ ॥
हर अज्ञान-मोह सब तत्वज्ञान दीजै॥ ७ ॥
