जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान॥
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करें सब तब गुणगान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
गोधूलि बेला में, हर घर हर आँगन में। हो तव महिमा गान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
स्तोत्र यह मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
प्राणों का सिंचन करके, भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥
