मेघवर्ण अति अनूप,
सेवत चरण सुभूप,
ज्ञानी विज्ञानी॥
छबि अनूप अति विचित्र,
बरनत पावन चरित्र
सकुचत बरबानी॥
गलमें मणि-मुक्त-माल,
प्रनतपाल अति दयाल,
सेवक सुखदानी॥
मूरति सुखमाकी धाम,
सुमिरत सिद्व काम,
कहत गुण बखानी॥
इन्द्र, चन्द्र अरु दिनेश,
बिनवत श्यामा हमेश जोरि जुगल पानी॥
