अतुला कालिका कृष्णा कल्याणी कामरूपिणी ॥ १॥
अनुच्चार्या च कामाक्षी क्रुद्धा कैटभहारिणी ॥ २॥
अम्बिका कामधेनुश्च कामदा चाखिलात्मिका ॥ ३॥
अरुणा चारूणक्षौमा कुपिताऽरुणलोचना ॥ ४॥
अलक्ष्मीः कालरात्रिश्च कूष्माण्डा कालरूपिणी ॥ ५॥
अव्याकृता जगन्मूर्तिश्चाविचिन्त्यमहाव्रता ॥ ६॥
अवतारत्रयाऽसङ्गा दुर्गा कामफलप्रदा ॥ ७॥
अपराऽतुल्यरूपा च नित्याऽसुरनिबर्हिणी ॥ ८॥
आद्याऽतिहारिरूपा च किरीटिनी कुलेश्वरी ॥ ९॥
अतिशुद्धगुणाऽभेद्या चानुपमपराक्रमा ॥ १०॥
विस्तारवदनाऽनन्ता कोपवत्यतिभीषणा ॥ ११॥
अर्धाम्बिकेशरूपा च कालाभ्राभाऽसिपाशिनी ॥ १२॥
जयाऽखिलजगन्माता कामेश्वर्यतिमानिनी ॥ १३॥
अतिरौद्रावतारा च घोरा चासुरघातिनी ॥ १४॥
अर्गलाऽलङ्घ्यवीर्या च ज्वलन्ती चानलात्मिका ॥ १५॥
अनघा घोररूपा च नियताऽनाथसंस्तुता ॥ १६॥
अजिताऽन्तर्हिताऽलक्ष्या गुणाश्रयाऽमितप्रभा ॥ १७॥
आर्याऽमृतकलाऽविद्या नीलवर्णाञ्जनप्रभा ॥ १८॥
अष्टादशभुजाऽपर्णा चाभीष्टफलदायिका ॥ १९॥
अष्टभुजा जगद्धात्री जगत्त्रयहितैषिणी ॥ २०॥
अनानन्दस्वरूपाऽपि नवदुर्गाऽष्टमातृका ॥ २१॥
अमलाऽब्रह्मरूपा च चण्डी चराचरेश्वरी ॥ २२॥
परमाऽखिलरूपा च चण्डमुण्डविनाशिनी ॥ २३॥
उर्ध्वमधःस्वरूपा च तिर्यग्रूपा तमोगुणा ॥ २४॥
अदितिर्देवशक्तिश्च दीनत्राणपरायणा ॥ २५॥
अनादिश्च निराधारा नयनत्रयशोभिता ॥ २६॥
एकाऽभेदमयी नैका तुष्टा कल्याणशोभना ॥ २७॥
कलाकाष्ठादिरूपा च चक्रिणी कृष्णसंस्तुता ॥ २८॥
आद्यवाक्यमयी पूज्या चार्तत्राणपरायणा ॥ २९॥
आदिविद्याऽऽत्मशक्तिश्च तुहिनाचलसंस्थिता ॥ ३०॥
आदिः कनकवर्णाभा पूर्णाऽऽनन्दपयोनिधिः ॥ ३१॥
वराऽऽपच्छमनी विद्या भद्राऽऽभरणभूषिता ॥ ३२॥
इन्दुशकलभूषा च भवती भक्तवत्सला ॥ ३३॥
इन्दिरेन्दु किरीटा च रविचन्द्राग्निलोचना ॥ ३४॥
ईश्वरी चैकवीरा च गौरीदेहसमुद्भवा ॥ ३५॥
उमा चेन्दुप्रभा पत्नी परिणामप्रदायिनी ॥ ३६॥
उन्मदा भीमरूपा च भीमादेवी च भीषणा ॥ ३७॥
उदारसंस्तुता बुद्धिर्ब्रह्माणी बोधलक्षणा ॥ ३८॥
रक्तबीजवधा रुष्टा चोल्लसद्रत्नकुण्डला ॥ ३९॥
कौमारीरूपसंस्थाना कौशिकी कान्तिशालिनी ॥ ४०॥
करुणापूरिताक्षी च तथोत्पलविलोचना ॥ ४१॥
घनस्तनी तथोत्तुङ्गस्तनी पीनपयोधरा ॥ ४२॥
धनुर्धरी च दुर्धर्षा दुर्गा च धर्मधारिणी ॥ ४३॥
लक्ष्यालक्ष्यस्वरूपा च लोकख्याता फलप्रदा ॥ ४४॥
सुकामधेनुमूर्तिश्च खड्गादिभृच्च खेचरी ॥ ४५॥
गम्भीरान्तः स्मिता सुभ्रूः स्त्रीरत्नं सुमनोहरा ॥ ४६॥
गुणमयी महावज्रा महाघोरपराक्रमा ॥ ४७॥
गृहवृद्धिप्रदा सारा सुपथा गरुडासना ॥ ४८॥
गुह्येश्वरी महाविद्या गुह्यगोप्त्री प्रकीर्तिता ॥ ४९॥
गुह्यातिगुह्यगोप्त्री च पूजिता प्रमदोत्तमा ॥ ५०॥
चण्डघाती च चामुण्डा सृष्टिश्चित्तकृपामयी ॥ ५१॥
सीता चञ्चलापाङ्गी सिता चित्रविभूषणा ॥ ५२॥
देवेशी चिन्मयानन्दा सा चतुर्वक्त्रसंस्तुता ॥ ५३॥
चित्रकोद्भासिभाला च चित्राम्बरा महासुरी ॥ ५४॥
जयाख्या जगतां धात्री जातिरूपा प्रदर्शिनी ॥ ५५॥
छत्रेश्वरी शताक्षी च शत्रुभयविवर्धिनी ॥ ५६॥
पुष्टिर्जगत्प्रतिष्ठा च पावना जगदम्बिका ॥ ५७॥
सर्वा जगत्समस्तस्त्री भैरवी जम्भनादिनी ॥ ५८॥
सा जगत्पालिका श्रद्धा शाम्भवी शूलधारिणी ॥ ५९॥
तुङ्गकुचा त्रिनेत्रा च ताम्राम्भोजनिवासिनी ॥ ६०॥
तीक्ष्णनखा च निष्कीला नवशक्तिस्तनूदरी ॥ ६१॥
तृष्णा तपोज्वलन्ती च पूतना तलवासिनी ॥ ६२॥
दिवाकरनिभा राष्ट्री दैत्यदर्पविनाशिनी ॥ ६३॥
नयनत्रययुक्ता च दारुणा दशनोज्ज्वला ॥ ६४॥
दशवक्त्रा च दुष्प्रेक्ष्या दंष्ट्राङ्कितवरानना ॥ ६५॥
स्तुता दंष्ट्राकराली च भवसागरनौः क्षमा ॥ ६६॥
दशभुजा महामारी दशपादा दशानना ॥ ६७॥
दुर्गार्तिनाशिनी क्षान्तिर्दुराचारविघातिनी ॥ ६८॥
भर्त्री दानवहन्त्री च सा दुष्टदमनी तथा ॥ ६९॥
रूद्ररूपा च रुद्राणी भवानी भवभामिनी ॥ ७०॥
वाणी धृतेन्दुलेखा च सा दक्षदुहिता सुखा ॥ ७१॥
दुर्गा धूर्जटिपत्नी च नानारत्नोपशोभिता ॥ ७२॥
नन्दगोपगृहोत्पन्ना वेदगर्भा व्रजेश्वरी ॥ ७३॥
नारायणी महालक्ष्मीर्नीलोत्पलविलोचना ॥ ७४॥
नानाभरणशोभाढ्या निशुम्भासुरघातिनी ॥ ७५॥
नवनवस्वरूपा च नागाधीश्वरविष्टरा ॥ ७६॥
सा नीरजकरा दुर्गा नादापूर्णदिगम्बरा ॥ ७७॥
सा पुण्डरीकमध्यस्था प्रकृतिः पुत्रदायिनी ॥ ७८॥
पापापहारिणी दुर्गा नादापूरितदिङ्मुखा ॥ ७९॥
नारसिंही भयत्रात्री निशुम्भमर्दिनी तथा ॥ ८०॥
मातङ्गी नीलजङ्घोरुर्निशुम्भमथिनी तथा ॥ ८१॥
प्रतिष्ठा पर माया पार्वती पापनाशिनी ॥ ८२॥
प्रसादसुमुखी दुर्गा सुप्रसन्नानना तथा ॥ ८३॥
प्रेतसंस्था च भीमाक्षी पद्महस्ता हरिप्रिया ॥ ८४॥
पापेश्वरी महामोहा पीनस्तनी समस्तनी ॥ ८५॥
प्रतिमा परिपूर्णा च परधामनिवासिनी ॥ ८६॥
परशिवा च शर्वाणी सा शम्भुगृहिणी तथा ॥ ८७॥
ब्रह्मस्तुता च सावित्री बुद्धिरूपा च भारती ॥ ८८॥
ब्रह्मशक्तिश्च यज्ञिया, सुष्टुता फलदायिका ॥ ८९॥
बाधाप्रशमनी दुर्गा बीजरूपा च बाभ्रवी ॥ ९०॥
ब्रह्मादिरूपिणी दुर्गा मङ्गला ब्रह्मचारिणी ॥ ९१॥
भक्तकामदुघा दुर्गा सा बाधाहारिणी तथा ॥ ९२॥
भुक्तिप्रदायिनी दुर्गा भद्रकाली सनातनी ॥ ९३॥
भ्रान्तिरूपा महोत्साहा भास्वद्देहलता तथा ॥ ९४॥
भक्तिस्मृता सुगन्धा च भ्रामरी भूमिसम्भवा ॥ ९५॥
सा भिन्नाञ्जनसङ्काशा भोगस्वर्गापवर्गदा ॥ ९६॥
भाषाक्षरा सुमाता दुर्गा भूतार्तिहारिणी ॥ ९७॥
मातृरूपा सुरूपा च संहर्त्री भवतारिणी ॥ ९८॥
माहेश्वरी शरण्या च दुर्गा भेदप्रदर्शिनी ॥ ९९॥
सा महाकालिका माता मधुकैटभघातिनी ॥ १००॥
मोहरात्रिश्च वाराही सुमधुमदमाधुरी ॥ १०१॥
मालाधरी च सर्वाद्या महाशक्तिधरा तथा ॥ १०२॥
दुर्गा महीस्वरूपा च महाकारुण्यरूपिणी ॥ १०३॥
महिषासुरनिर्णोशी दुर्गा मृगप्रतिस्थिता ॥ १०४॥
मुक्तिप्रदायिनी दुर्गा सुभगा महिषासना ॥ १०५॥
सा मुण्डमथना दुर्गा शुभा महिषमर्दिनी ॥ १०६॥
साक्षिणी यमघण्टा च महादुर्गविनाशिनी ॥ १०७॥
दुर्गा योगेश्वरी शान्तिः शूलिनी मधुमर्दिनी ॥ १०८॥
सा रुचिराक्षमाला च सत्वरा मन्त्ररूपिणी ॥ १०९॥
महाविलासिनी दुर्गा मोहिनी मुनिमोहिनी ॥ ११०॥
वैष्णवी रथमारूढा रत्नभूता यशस्विनी ॥ १११॥
वारुणी रक्तवस्त्रा च दुर्गा रक्ताम्बरा तथा ॥ ११२॥
साकारा रक्तमध्या च रक्तसर्वाङ्गभूषणा ॥ ११३॥
सा रक्तदशना दुर्गा रक्ततीक्ष्णनखा तथा ॥ ११४॥
सा दुर्गा रक्तकेशा च रणत्कङ्कणनूपुरा ॥ ११५॥
रसभावितवृत्ता च दुर्गा रत्नविभूषिता ॥ ११६॥
दुर्गा लज्जास्वरूपा च सा लोकवरदा तथा ॥ ११७॥
दुर्गा विज्ञानरूपा च तथा वृत्तपयोधरा ॥ ११८॥
व्याप्तलोकत्रया दुर्गा वराभीतिप्रधारिणी ॥ ११९॥
सा दुर्गा विष्णुमाया च व्याप्तस्थावरजङ्गमा ॥ १२०॥
विश्वोपरतिशक्ता च दुर्गा वेधस्स्तुता तथा ॥ १२१॥
सा दुर्गा व्याप्तिदेवी च विश्वविभ्रामिका तथा ॥ १२२॥
वरदाभीतिहस्ता च दुर्गा विस्तारितानना ॥ १२३॥
वृत्रप्राणहरा दुर्गा विन्ध्याचलनिवासिनी ॥ १२४॥
सा दुर्गा वैष्णवी शक्तिर्विश्वबीजं त्रिलोचना ॥ १२५॥
दुर्गा विवेकदीपा च वीणापुस्तकधारिणी ॥ १२६॥
सा विश्वधारिणी दुर्गा तथैव वैरिविनाशिनी ॥ १२७॥
दुर्गा विश्वेशवन्द्या च दुर्गा च वित्तदायिनी ॥ १२८॥
वागीश्वरी तथा दुर्गा सा विद्याकारिणी तथा ॥ १२९॥
सा विश्वमोहिनी दुर्गा तथैव विश्वरूपिणी ॥ १३०॥
विश्वमाता तथा दुर्गा तथैव वज्रधारिणी ॥ १३१॥
विख्यातिगा तथा दुर्गा तथैव वागधीश्वरी ॥ १३२॥
सा विकटस्वरूपा च दुर्गा विधिवधूस्तथा ॥ १३३॥
विवसना तथी दुर्गा सा शिरोमालिका तथा ॥ १३४॥
श्रीस्तथा श्यामलाङ्गी च दुर्गा श्रीसुन्दरी तथा ॥ १३५॥
श्वेतरूपधरा दुर्गा तथा शोकविनाशिनी ॥ १३६॥
सा शत्रुभयरूपा च शुम्भदैत्यार्दिनी तथा ॥ १३७॥
सा दुर्गा शान्तिरूपा च सा शब्दज्ञानरूपिणी ॥ १३८॥
सा दुर्गा शुभहेतुश्च सा शून्याशून्यसाक्षिणी ॥ १३९॥
सा दुर्गा शक्तिहस्ता च सा शूलचक्रभृत्तथा ॥ १४०॥
शिवदूती तथा दुर्गा सा शुम्भमर्दिनी तथा ॥ १४१॥
सा परमायुधा दुर्गा तथैव शववाहना ॥ १४२॥
श्रीशाम्भवी तथा दुर्गा तथैव शिखिवाहना ॥ १४३।
सा दुर्गा श्रीमहाविद्या दुर्गा शूलेश्वरी तथा ॥ १४४॥
शक्तिधरी तथा दुर्गा सकलोद्धारिणी तथा ॥ १४५।
सकलशब्दरूपा च सा भक्तिरसभाविता ॥ १४६॥
स्फुरत्कान्तिस्तथा दुर्गा सर्वरूपमयी तथा ॥ १४७॥
संसारबन्धहेतुश्च तथा सर्वेश्वरेश्वरी ॥ १४८॥
स्वरात्मिका तथा दुर्गा समुत्पन्ना तथा स्वयम् ॥ १४९॥
स्थितिरूपा तथा दुर्गा सदाभ्युदयदा तथा ॥ १५०॥
सम्मानिता तथा दुर्गा तथा सैरिभमर्दिनी ॥ १५१॥
सिंहस्कन्धाधिरूढा च दुर्गा सर्वाश्रया तथा ॥ १५२॥
सा समस्तजगद् हेतुः स्मृतिभीतिहरा तथा ॥ १५३॥
सा सर्वव्यापिनी दुर्गा तथा समरनिष्ठुरा ॥ १५४॥
स्मृतिरूपा तथा दुर्गा सहस्रनयना तथा ॥ १५५॥
दुर्गा स्त्रीरत्नभूता च साक्षसूत्रकमण्डलुः ॥ १५६॥
सा सर्वज्ञेश्वराङ्कस्था सर्वेशक्तिसमन्विता ॥ १५७॥
सा दुर्गा सर्वभूता च सर्वयोगसमन्विता ॥ १५८।
सृष्ट्यादिशक्तिभूता च स्वर्गापवर्गदा तथा ॥ १५९॥
सा सर्वभीतिपात्री च सिंहस्था सर्वमङ्गला ॥ १६०॥
दुर्गा सर्वस्वरूपा च सर्वकामप्रदायिनी ॥ १६१॥
सम्पूजिता तथा दुर्गा सर्वशत्रुविनाशिनी ॥ १६२॥
सा सौभाग्यप्रतिष्ठा च दुर्गा सप्तशती तथा ॥ १६३।
सुरासुरशिरोरलनिघृष्टचरणा तथा ॥ १६४॥
सा सहस्रभुजा दुर्गा सुचित्रजघना तथा ॥ १६५॥
सर्वदेवमयी दुर्गा सर्वदेवशरीरजा ॥ १६६॥
सर्वाङ्गभूषणा दुर्गा सर्वानन्दपयोनिधिः ॥ १६७॥
सुकर्कशस्तनी दुर्गा सुश्वेतस्तनमण्डला ॥ १६८॥
सुखमयी तथा दुर्गा तथैव सुरमोहिनी ॥ १६९॥
सिद्धिप्रदा तथा दुर्गा तथैव सा सुधामयी ॥ १७०॥
हंसयुक्तविमानस्था हिमाचलकृताश्रया ॥ १७१॥
हिमाचलसुता दुर्गा त्रिशूलवरधारिणी ॥ १७२॥
हृत्पुण्डरीकमध्यस्था दुर्गा हस्ताम्बुजा तथा ॥ १७३॥
क्षुधारूपा तथा दुर्गा त्रिधामात्रात्मिका तथा ॥ १७४॥
दुर्गा त्रिजगदाधारा त्रिंशल्लोचनमालिका ॥ १७५॥
त्रैलोक्यत्राणयुक्ता च त्रिशूलचन्द्रधारिणी ॥ १७६॥
सा ज्ञानचिन्मयातीता स्वयञ्च ज्ञानचिन्मयी ॥ १७७॥
मधुरं मधुरानन्दे सहस्रमपि कल्पताम् ॥ १७८॥
हर्षोल्लासविनोदमोदकरुणासन्तानसङ्काशिका ।
सुप्रीता मुदिता स्तुता विनयिता सम्पूजिता वन्दिता
माङ्गल्यं वितनोतु लोकजननी स्तोतुः सहस्रात्मिका ॥ १७९॥
