॥ पूर्वपीठिका ॥
नाम्नां शतं महाकाल्याः कथयस्व मयि प्रभो ॥ १॥
शृणुष्वैकमना देवि भक्तानां प्रीतिवर्द्धनम् ॥ २॥
भैरवी भैरवप्रीता भवानी भवमोचिनी ॥ ३॥
महाकालरता सूक्ष्मा कौलव्रतपरायणा ॥ ४॥
गन्धचन्दनदिग्धाङ्गी सती साध्वी पतिव्रता ॥ ५॥
कामहन्त्री कामकला कामविज्ञा महोदया ॥ ६॥
कुलीना कुलसर्वस्वा कुलवर्त्मप्रदर्शिका ॥ ७॥
कन्या कुमारी गौरी तु कृष्णदेहा महामनाः ॥ ८॥
पिङ्गाक्षी कमलप्रीता काली कालपराक्रमा ॥ ९॥
उग्रतारा महोग्रा च तथा चैकजटा शिवा ॥ १०॥
नारायणप्रिया सूक्ष्मा वरदा भक्तवत्सला ॥ ११॥
दीर्घाङ्गी दीर्घकेशा च नृमुण्डधारिणी तथा ॥ १२॥
रक्तनेत्रा विशालाक्षी सिन्दूरभूषणा मही ॥ १३॥
नारसिंही महारौद्री नीलरूपा वृषासना ॥ १४॥
पूर्णेन्दुवदना भीमा प्रसन्नवदना तथा ॥ १५॥
प्रफुल्लपुण्डरीकाभलोचना भयनाशिनी ॥ १६॥
कोटराक्षी कृशग्रीवा कुलतीर्थप्रसाधिनी ॥ १७॥
बहुवाक्यामृतरसा चण्डरूपातिवेगिनी ॥ १८॥
चण्डिका कालवदना सुतीक्ष्णनासिका तथा ॥ १९॥
प्रेतभूषणसम्प्रीता प्रेतदोर्दण्डघण्टिका ॥ २०॥
श्मशानवासिनी पूर्णा पूर्णेन्दुवदना शिवा ॥ २१॥
पुण्यालया महापुण्या पुण्यदा पुण्यवल्लभा ॥ २२॥
दक्षिणा दक्षिणाप्रीता नागयज्ञोपवीतिनी ॥ २३॥
घोरासना घोररूपा सृक्प्रान्ते रक्तधारिका ॥ २४॥
कामातुरा कामसक्ता प्रमत्ता शक्तभावना ॥ २५॥
कर्षिता कर्षणप्रीता सर्वाकर्षणकारिणी ॥ २६॥
नरमुण्डसृजा गीता मालिनी माल्यभूषिता ॥ २७॥
जगन्माता जगद्धात्री जगती मुक्तिदा परा ॥ २८॥
जगज्जीवमयी हैमवती माया महाकचा ॥ २९॥
कालरात्रिर्दारुणा च चन्द्रसूर्यप्रतापिनी ॥ ३०॥
विद्याधरी वेदविद्या यक्षिणी शिवमोहिनी ॥ ३१॥
श्रुतिरूपा तथाग्नेयी महामुक्तिर्जनेश्वरी ॥ ३२॥
सिद्धिदा सिद्धिसंदात्री तथा सिद्धजनप्रिया ॥ ३३॥
तमिस्रा तामसी विज्ञा महामेघस्वरूपिणी ॥ ३४॥
चार्वङ्गी चञ्चला लोला चीनाचारपरायणा ॥ ३५॥
सरस्वती तथा लक्ष्मीर्महानीलसरस्वती ॥ ३६॥
विशिष्टा महती मान्या तथा सौम्यजनप्रिया ॥ ३7॥
वाक्यरूपा छिन्नमस्ता छिन्नासुरप्रिया सदा ॥ ३८॥
रजःप्रीता रजोरक्ता रजःसंसर्गवर्द्धिनी ॥ ३९॥
कुण्डली कुण्डलप्रीता तथा कुण्डलशोभिता ॥ ४०॥
शक्तिनी चक्रिणी पद्मा महापद्मनिवासिनी ॥ ४१॥
पद्मप्रिया पद्मरता महापद्मसुशोभिता ॥ ४२॥
पिनाकधारिणी वीणा तथा वीणावती मघा ॥ ४३॥
रणप्रीता रणरता रणासुरविनाशिनी ॥ ४४॥
जटायुक्ता जटापिङ्गा वज्रिणी शूलिनी तथा ॥ ४५॥
रतिभीता रतिगता महिषासुरनाशिनी ॥ ४६॥
रक्तरूपा रक्तगता रक्तखर्परधारिणी ॥ ४७॥
वृषासना वृषरता वृषासनकृताश्रया ॥ ४८॥
कामाङ्गी परमा प्रीता परासुरनिवासिनी ॥ ४९॥
तरुणप्रेमदा वृद्धा तथा वृद्धप्रिया सती ॥ ५०॥
अमोघा रुन्धती रम्या तीक्ष्णा भोगवती सदा ॥ ५१॥
मानदा मानिनी मान्या माननीया मदातुरा ॥ ५२॥
सुदीर्घा मध्यमा नन्दा विनतासुरनिर्गता ॥ ५३॥
दुष्टदैत्यनिहन्त्री च दुष्टासुरविनाशिनी ॥ ५४॥
कीर्तिर्यशस्विनी भूषा भूष्या भूतपतिप्रिया ॥ ५५॥
सगुणा निर्गुणा सीता निष्ठा काष्ठा प्रतिष्ठिता ॥ ५६॥
गुर्वी गुरुतरा धौम्या धौम्यासुरविनाशिनी ॥ ५७॥
चिन्तामणिः कल्पलता तथा शङ्करवाहिनी ॥ ५८॥
भवानी भवदा भव्या भवप्रीता भवालया ॥ ५९॥
कदलीस्तम्भसंरामा निर्मलासनवासिनी ॥ ६०॥
व्यक्ताव्यक्तानेकरूपा सर्वतीर्थास्पदा शिवा ॥ ६१॥
शिवानी शैवलप्रीता तथा शैवलवासिनी ॥ ६२॥
महाकचा महाबुद्धिर्महामाया महागदा ॥ ६३॥
देवपूज्या देवरता युवती सर्वमङ्गला ॥ ६४॥
भगप्रीता भगरता भगप्रेमरता सदा ॥ ६५॥
भगदक्षा भगाक्रान्ता भगसौभाग्यवर्द्धिनी ॥ ६६॥
दण्डप्रिया दण्डरता दण्डताडनतत्परा ॥ ६७॥
सुवेदिदण्डमध्यस्था भूर्भुवःस्वःस्वरूपिणी ॥ ६८॥
क्षेमङ्करी महाघूर्णा घूर्णनासा वशङ्करी ॥ ६९॥
मदोन्मत्ता मदरता मत्तासुरविलासिनी ॥ ७०॥
चण्डरूपा महाचण्डी चण्डिका चण्डनायिका ॥ ७१॥
नीलाकारा नीलवर्णा नीलेन्दीवरलोचना ॥ ७२॥
भीमा च भीमवदना महाभीमा भयानका ॥ ७३॥
परमेष्ठी पररता परात्परतरा परा ॥ ७४॥
नित्या नित्यप्रिया तन्द्री भवानी भवसुन्दरी ॥ ७५॥
भैरवी भैरवप्रीता तथा भैरवमोहिनी ॥ ७६॥
विषमग्ना विषरता विषभक्ष्या जया तथा ॥ ७७॥
गदिनी कामिनी खड्गमुण्डमालाविभूषिता ॥ ७८॥
आनन्दभैरवी नन्दा तथा नन्दजनप्रिया ॥ ७९॥
ललज्जिह्वा नीलपदा तथा सुमखदक्षिणा ॥ ८०॥
फलभोग्या फलरसा फलदा श्रीफलप्रिया ॥ ८१॥
फलप्रीता फलगता फलसंदानसन्धिनी ॥ ८२॥
सर्वरूपा सर्वरता सर्वसत्त्वनिवासिनी ॥ ८३॥
भयनाशा गणरता गणप्रीता महागतिः ॥ ८४॥
त्रैलोक्यमोहिनी गङ्गा स्वर्गङ्गा स्वर्गवासिनी ॥ ८५॥
सत्यगन्धा सत्यगणा सत्यरूपा महाकृतिः ॥ ८६॥
त्रिपुरा परमेशानी सुन्दरी पुरसुन्दरी ॥ ८७॥
महासप्तदशी षष्ठी सप्तमी चाष्टमी तथा ॥ ८८॥
द्वादशी परमा दिव्या नीलरूपा त्रयोदशी ॥ ८९॥
त्रिपुरा त्रिपुरेशी च तथा त्रिपुरमर्दिनी ॥ ९०॥
चामरी चामरप्रीता चमरासुरमर्दिनी ॥ ९१॥
नितम्बिनी नितम्बाढ्या नितम्बगुरुशोभिता ॥ ९२॥
कर्पूरचन्द्रवदना कुङ्कुमद्रवशोभिता ॥ ९३॥
रत्नवेदिः सुरेशा च सुरेशी सुरमोहिनी ॥ ९४॥
उर्वशी शमनी काली महाकालस्वरूपिणी ॥ ९५॥
शिवा शैवा च रुद्राणी तथा शिवनिनादिनी ॥ ९६॥
योगिनी डाकिनी चैव तथा महेश्वरी परा ॥ ९७॥
गृध्ररूपा ब्रह्मयोनिर्महानन्दा महोदया ॥ ९८॥
वरारोहा महावल्ली महात्रिपुरसुन्दरी ॥ ९९॥
लिङ्गाभिधायिनी देवी महामाया महास्मृतिः ॥ १००॥
लिङ्गमाला लिङ्गभूषा भगमालाविभूषणा ॥ १०१॥
भगलिङ्गार्चनप्रीता भगलिङ्गस्वरूपिणी ॥ १०२॥
स्वयम्भूकुसुमरता लतालिङ्गनतत्परा ॥ १०३॥
सुरापानमहातीक्ष्णा सर्वागमविनिन्दिता ॥ १०४॥
कुण्डगोलोद्भवप्रीता कुण्डगोलोद्भवात्मिका ॥ १०५॥
महालक्ष्मीर्महेशानी महाविष्णुप्रभाविनी ॥ १०६॥
विष्णोर्वक्षःस्थलस्था च विष्णुरूपा च वैष्णवी ॥ १०७॥
धृतिर्मेधा तथा तुष्टिः पुष्टिरूपा चिता चितिः ॥ १०८॥
सर्वविज्ञजया गौरी गौरवर्णा शची शिवा ॥ १०९॥
पुनर्वसुस्तथा पुष्या तेजस्वी सिन्धुवासिनी ॥ ११०॥
शुक्रपूज्या शुक्रवन्द्या शुक्रभोग्या पुलोमजा ॥ १११॥
शुक्रमूर्तिः शुक्रदेहा शुक्राङ्गी शुक्रमोहिनी ॥ ११२॥
सर्वप्रियङ्करी भोग्या भोगरूपा भगाकृतिः ॥ ११३॥
भगसंमर्दनप्रीता भगोपरि निवेशिता ॥ ११४॥
दक्षकन्या महादक्षा सर्वदक्षा प्रदन्तिका ॥ ११५॥
दण्डभीता दण्डगता दण्डसंमर्दने रता ॥ ११६॥
आद्या दुर्गा जया सूक्ष्मा सूक्ष्मरूपा जयाकृतिः ॥ ११७॥
विशालावयवा मेध्या त्रिवलीवलया शुभा ॥ ११८॥
मधुकैटभसंहन्त्री निशुम्भासुरमर्दिनी ॥ ११९॥
चण्डोग्रा च चतुर्वर्गा तथा चण्डावती शिवा ॥ १२०॥
नित्यानित्यप्रिया भद्रा भवानी भवसुन्दरी ॥ १२१॥
मातङ्गी कमला लक्ष्मीः षोडशी भीषणातुरा ॥ १२२॥
काकपक्षधरा नित्या सर्वविस्मयकारिणी ॥ १२३॥
योगीश्वरी योगरता योगानन्दस्वरूपिणी ॥ १२४॥
नलिनी ललना शुभ्रा शुभाननविराजिता ॥ १२५॥
बलिभक्ता बलिरता बलिभोग्या महारता ॥ १२६॥
फलिनी फलसंरक्ता फलाफलनिवारिणी ॥ १२७॥
फलोन्मुखी सर्वसत्त्वा महासत्त्वा च सात्त्विका ॥ १२८॥
महारूपा महाभागा महामेघस्वरूपिणी ॥ १२९॥
सद्गतिः सत्कृतिः साक्षात् सदासनगता शुभा ॥ १३०॥
महानन्दा सदानन्दा नित्या सत्यस्वरूपिणी ॥ १३१॥
महाशुक्रा शुक्ररता शुक्रसृष्टिविधायिनी ॥ १३२॥
साधकाभीष्टदा नित्यं साधकप्रेमसेविता ॥ १३३॥
मल्लिका मालती जातिः सप्तवर्णा महाकचा ॥ १३४॥
गगना गगनप्रीता तथा गगनवासिनी ॥ १३५॥
गुह्यकाली भद्रकाली शिवरूपा सतांगतिः ॥ १३६॥
क्षीणोदरी महावेगा वेगानन्दस्वरूपिणी ॥ १३७॥
पञ्चमी पञ्चमप्रीता तथा पञ्चमभूषणा ॥ १३८॥
ककारवर्णरूपा च ककाराक्षररूपिणी ॥ १३९॥
ऋवर्णरूपप्रभवा ऋवर्णा सर्वरूपिणी ॥ १४०॥
सर्वेश्वरी सर्वसारा सर्वेच्छा सर्वमोहिनी ॥ १४१॥
महेशजननी मोहा विद्या विद्योतनी विभा ॥ १४२॥
धर्मरूपा धर्मरता धर्माचरणतत्परा ॥ १४३॥
स्वधा स्वाहा वषट्कारा श्रौषट् वौषट् स्वधात्मिका ॥ १४४॥
पद्मयोनिः पद्मसंस्था चतुर्वर्गफलप्रदा ॥ १४५॥
महाभीमा चारुकेशी गन्धमादनसंस्थिता ॥ १४६॥
गन्धर्वनिरता देवी सुरभी सुगन्धा तथा ॥ १४७॥
कालदिग्धा कालरता महिषासुरमर्दिनी ॥ १४८॥
विद्याप्रदा महावाणी महाभैरवरूपिणी ॥ १४९॥
माहेश्वरी गजारूढा गजेन्द्रगमना तथा ॥ १५०॥
गजेन्द्रमन्दगमना महाविद्या महोज्ज्वला ॥ १५१॥
बालक्रीडारता बाला बलासुरविनाशिनी ॥ १५२॥
विशिष्टयौवना काली कृष्णदुर्गा सरस्वती ॥ १५३॥
चण्डमुण्डधरा देवी मधुकैटभनाशिनी ॥ १५४॥
रुद्रकाली विशालाक्षी भैरवी कालरूपिणी ॥ १५५॥
कुलश्रीः कुलसंकीर्णा कुलगर्भनिवासिनी ॥ १५६॥
कुलदर्भग्रहा चैव कुलगर्तप्रदायिनी ॥ १५७॥
शिवसक्ता शिवप्राणा महादेवकृतालया ॥ १५८॥
मत्तामत्तजनप्रेमधात्री विभववर्द्धिनी ॥ १५९॥
मत्तप्रमत्तवदना मत्तचुम्बनतत्परा ॥ १६०॥
मदातुरा मदगता विपरीतरतातुरा ॥ १६१॥
इति ते कथितं सर्वं कालीनामसहस्रकम् ॥ १६२॥
गाणपत्यप्रदं राज्यप्रदं षट्कर्मसाधकम् ॥ १६३॥
यः पठेत् पाठयेद्वापि शृणोति श्रावयेदथ ॥ १६४॥
ब्रह्महत्या सुरापानं सुवर्णहरणं तथा ॥ १६५॥
सर्वमेतत्पुनात्येव सत्यं सुरगणार्चिते ॥ १६६॥
स शिवः सत्यवादी च भवत्येव न संशयः ॥ १६७॥
सर्वैश्वर्ययुतो भूत्वा महाराजत्वमाप्नुयात् ॥ १६८॥
शिवभक्ताय शान्ताय प्रियभक्ताय वा पुनः ॥ १६९॥
अस्मात् परतरं नास्ति तन्त्रमध्ये सुरेश्वरि ॥ १७०॥
न भेदः परमेशानि भेदकृन्नरकं व्रजेत् ॥ १७१॥
उभयोरेवमेकत्वं भेदबुद्ध्या न तां भजेत् ।
स योगी परमेशानि समो मानापमानयोः ॥ १७२॥
