खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
तन केसरिया बागो, कुण्डल श्रवण पड़े॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
खेवत धूप अग्नि पर, दीपक ज्योति जले॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
भक्त आरती गावें, जय-जयकार करे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
कहत 'आलूसिंह' स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे॥
