कैलासशिखरे रम्ये नानापुष्पोपशोभिते ।
कल्पपादपमध्यस्थे गन्धर्वगणसेविते ॥ १ ॥
तं कदाचित् सुखासीनं भगवन्तं जगद्गुरुम् ॥ २ ॥
त्रिशूलडमरुधरं महावृषभवाहनम् ॥ ३ ॥
विभूतिभूषणं देवं नीलकण्ठं त्रिलोचनम् ॥ ४ ॥
सहस्रादित्यसङ्काशं गिरिजार्धाङ्गभूषणम् ॥ ५ ॥
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा प्राह तं शिखिवाहनः ॥ ६ ॥
देवदेव महादेव सृष्टिस्थित्यन्तकारक ।
त्वं गतिः सर्वदेवानां त्वं गतिः सर्वदेहिनाम् ॥ ७ ॥
त्वमेव जगदाधारस्त्वमेव विश्वकारणम् ॥ ८ ॥
किं गुह्यं परमं लोके किमेकं सर्वसिद्धिदम् ॥ ९ ॥
विना तीर्थेन तपसा विना वेदैर्विना मखैः ॥ १० ॥
कस्मादुत्पद्यते सृष्टिः कस्मिंश्च विलयो भवेत् ॥ ११ ॥
तदहं श्रोतुमिच्छामि कथयस्व महेश्वर ॥ १२ ॥
अस्ति गुह्यतमं पुत्र कथयिष्याम्यसंशयम् ॥ १३ ॥
ये चान्ये बहवो भूताः सर्वे प्रकृतिसम्भवाः ॥ १४ ॥
सैव संहरते विश्वं जगदेतच्चराचरम् ॥ १५ ॥
इच्छाशक्तिः क्रियारूपा ब्रह्मविष्णुशिवात्मिका ॥ १६ ॥
सृजति ब्रह्मरूपेण विष्णुरूपेण रक्षति ॥ १७ ॥
यस्य योनौ जगत्सर्वमद्यापि वर्ततेऽखिलम् ॥ १८ ॥
यां समाराध्य त्रैलोक्ये सम्प्राप्तं पदमुत्तमम् ।
तस्याः नामसहस्रं ते कथयामि शृणुष्व तत् ॥ १९ ॥
बीजं मान्मथमिन्द्रगोपसदृशं हृत्पङ्कजे संस्थितम् ।
चक्रं भालमयं शशाङ्करुचिरं बीजं तु तार्तीयकं
ये ध्यायन्ति पदत्रयं तव शिवे ते यान्ति सूक्ष्मां गतिम् ॥
कामाक्षा कामदा काम्या कामना कामचारिणी ॥ २२ ॥
कात्यायनी कलाधारा कौमुदी कमलप्रिया ॥ २३ ॥
माहेश्वरी महामाया महातेजा महेश्वरी ॥ २४ ॥
महाजिह्वा महालोला महादंष्ट्रा महाभुजा ॥ २५ ॥
महादारिद्र्यराशिघ्नी महाशत्रुविमर्दिनी ॥ २६ ॥
महाकाया महाबीजा महापातकनाशिनी ॥ २७ ॥
मानसी मानदा मान्या मनश्चक्षुरगोचरा ॥ २८ ॥
गिरिजा गिरिशा साध्वी गिरिसूर्गिरिसम्भवा ॥ २९ ॥
चर्चिका चर्चिताकारा चण्डिका चारुरूपिणी ॥ ३० ॥
यज्ञमाता यज्ञगोप्त्री यज्ञेशी यज्ञसम्भवा ॥ ३१ ॥
यज्ञप्रिया यज्ञरूपा याज्ञी यज्ञकृपालया ॥ ३२ ॥
जितेन्द्रिया जितक्रोधा जननी जन्मदायिनी ॥ ३३ ॥
घुर्घुरा वेदगर्भा च रेविका करसम्भवा ॥ ३४ ॥
चन्द्रभागा विपाशा च गण्डकी विन्ध्यवासिनी ॥ ३५ ॥
महोनतनया चैव अहल्या चम्पकावती ॥ ३६ ॥
द्वारावती च तीर्थेशी महाकिल्बिषनाशिनी ॥ ३७ ॥
पद्मवक्त्रा च पद्माक्षी पद्मस्था पद्मसम्भवा ॥ ३८ ॥
श्रीङ्कारी भूषणा लक्ष्मीः क्लीङ्कारी क्लेशनाशिनी ॥ ३९ ॥
हरिवक्त्रोद्भवा शान्ता हरिवक्षःस्थलस्थिता ॥ ४० ॥
विष्णुमाया विशालाक्षी विशालनयनोज्ज्वला ॥ ४१ ॥
शिवेश्वरी शिवाधारा शिवनाथा शिवप्रिया ॥ ४२ ॥ [विश्वेश्वरी]
भवेश्वरी भवाराध्या भवेशी भवनायिका ॥ ४३ ॥
भवप्रिया भवानन्दा भवानी भवमोचिनी ॥ ४४ ॥
ब्रह्मेशी ब्रह्मदा ब्राह्मी ब्रह्माणी ब्रह्मवादिनी ॥ ४५ ॥
त्रयीदा ब्रह्मदा ब्राह्मी ब्रह्माणी ब्रह्मवादिनी ॥ ४६ ॥
स्वर्गमा निर्गमा दात्री दाया दोग्ध्री दुरापहा ॥ ४७ ॥
पञ्चस्था पञ्चमी पूर्णा पूर्णापीठनिवासिनी ॥ ४८ ॥
रजःस्था च रजोरूपा रजोगुणसमुद्भवा ॥ ४९ ॥
तमोगुणसमुद्भूता सात्त्विकी राजसी तमी ॥ ५० ॥
अर्धमासा च मासा च संवत्सरस्वरूपिणी ॥ ५१ ॥
नानारत्नविचित्राङ्गी नानाभरणमण्डिता ॥ ५२ ॥
विश्वासकारिणी विश्वा विश्वशक्तिर्विचक्षणा ॥ ५३ ॥
चतुरङ्गा चतुर्बाहुश्चतुरा चारुहासिनी ॥ ५४ ॥
सर्वेश्वरी सर्वविद्या शर्वाणी सर्वमङ्गला ॥ ५५ ॥
व्यापिनी सर्वभूतेषु भवभारविनाशिनी ॥ ५६ ॥
सर्वशृङ्गारवेषाढ्या पाशाङ्कुशकरोद्यता ॥ ५७ ॥
गणेशकोटिलावण्या विष्णुकोट्यरिमर्दिनी ॥ ५८ ॥
समुद्रकोटिगम्भीरा वायुकोटिमहाबला ॥ ५९ ॥
मेरुकोटिसमुच्छ्राया गुणकोटिसमृद्धिदा ॥ ६० ॥
अशोका शोकरहिता तापत्रयविवर्जिता ॥ ६१ ॥
चित्रा विचित्रा चित्राशी हेतुगर्भा कुलेश्वरी ॥ ६२ ॥
श्रुतिस्मृतिमयी सत्या श्रुतिरूपा श्रुतिप्रिया ॥ ६३ ॥
पार्वती हिमवत्पुत्री पाशस्था पाशरूपिणी ॥ ६४ ॥
भूतधात्री च भूतेशी भूतस्था भूतभाविनी ॥ ६५ ॥
हंसाक्षी हंसरूपा च हंसस्था हंसरूपिणी ॥ ६६ ॥
षट्पत्राम्भोजमध्यस्था मणिपूरनिवासिनी ॥ ६७ ॥
अकलङ्का शशाङ्काभा षोडशारनिवासिनी ॥ ६८ ॥
डाकिनी शाकिनी चैव लाकिनी काकिनी तथा ॥ ६९ ॥
सृष्टिस्थितिविनाशा च सृष्टिस्थित्यन्तकारिणी ॥ ७० ॥
चतुःषष्टिकलाधारा मेरुदण्डसमाश्रया ॥ ७१ ॥
हिङ्गुला मङ्गलशिवा सुषुम्णामध्यगामिनी ॥ ७२ ॥
हृत्पद्मनिलया देवी भीमा भैरवनादिनी ॥ ७३ ॥
महासूक्ष्माऽभया काली भीमरूपा महाबला ॥ ७४ ॥
अन्तःस्था कूटबीजा च त्रिकूटाचलवासिनी ॥ ७५ ॥
विद्याधरी लोकधात्री अप्सरा अप्सरःप्रिया ॥ ७६ ॥
यशस्विनी यशःपूर्णा यशोदागर्भसम्भवा ॥ ७७ ॥
अरुन्धती शचीन्द्राणी गान्धारी गन्धमोदिनी ॥ ७८ ॥
लम्बोदरी च लम्बोष्ठा जाम्बवती जलोदरी ॥ ७९ ॥
तपस्विनी तपोनिष्ठा चापर्णा पर्णभक्षिणी ॥ ८० ॥
गुह्या गभीरा गहना गुह्यतत्त्वा निरञ्जना ॥ ८१ ॥
अमृता निष्कला भद्रा सकला कृष्णपिङ्गला ॥ ८२ ॥
पद्मरागप्रतीकाशा निर्मलाकाशसन्निभा ॥ ८३ ॥
कार्यकारणकर्त्री च पर्वाख्या रूपसंस्थिता ॥ ८४ ॥
परब्रह्मस्वरूपा च परब्रह्मनिवासिनी ॥ ८५ ॥
सिद्धिर्वृद्धिपरा वृद्धिः सत्कीर्तिर्दीप्तिसंस्थिता ॥ ८६ ॥
सरस्वती भूतमाता महाभूताधिपप्रिया ॥ ८७ ॥
कामसन्दीपिनी कामा सदाकामा कुतूहला ॥ ८८ ॥
भक्तानुकम्पिनी मैत्री शरणागतवत्सला ॥ ८९ ॥
सिद्धलक्ष्मीर्महालक्ष्मीर्वेदलक्ष्मीः सुलक्षणा ॥ ९० ॥
विश्वोदरी विश्वसृष्टा विश्वाख्या विश्वतोमुखी ॥ ९१ ॥
तरुणादित्यसङ्काशा करणानेकसङ्कुला ॥ ९२ ॥
रथिनी ध्वजिनी सेना सर्वमन्त्रमयी त्रयी ॥ ९३ ॥
जटाजूटधरा मुक्ता सूक्ष्मशान्तिर्विभीषणा ॥ ९४ ॥
त्रिशूलडमरुधरा नरमालाविभूषिणी ॥ ९५ ॥
त्रैलोक्यसाधिनी साध्या सिद्धसाधकवत्सला ॥ ९६ ॥
सुभगा सुमुखी सौम्या सुशूरा सोमभूषणा ॥ ९७ ॥
महिषी महिषारूढा महिषासुरघातिनी ॥ ९८ ॥
अग्निजिह्वा महाघोराऽघोरा घोरतरानना ॥ ९९ ॥
योगेश्वरी योगरूपा योगमाला च योगिनी ॥ १०० ॥
नागिनी नागकन्या च सुवेगा नागनायिका ॥ १०१ ॥
भीमवक्त्रा महावक्त्रा वक्त्राणां कोटिधारिणी ॥ १०२ ॥
कृष्णमूर्तिर्महामूर्तिर्घोरमूर्तिर्वरानना ॥ १०३ ॥
सर्वसङ्ग्रामजयदा सर्वप्रहरणोद्यता ॥ १०४ ॥
सर्वैश्वर्यसमुत्पत्तिः सर्वग्रहविनाशिनी ॥ १०५ ॥
मातङ्गी मत्तमातङ्गी मातङ्गगणमण्डिता ॥ १०६ ॥
अमृतद्वीपमध्यस्था प्रबला वत्सलोज्ज्वला ॥ १०७ ॥
परमानन्दमुदिता ईषत्प्रहसितानना ॥ १०८ ॥
दिग्वासा देवदूती च देवदेवादिदेवता ॥ १०९ ॥
अट्टाट्टहासिनी घोरा घोरदैत्यविनाशिनी ॥ ११० ॥
मुक्ताहारस्तनोपेता तुङ्गपीनपयोधरा ॥ १११ ॥
गण्डमण्डितताटङ्का गुञ्जाहारविभूषणा ॥ ११२ ॥
समस्तदेवमूर्तिश्च ह्यसुरक्षयकारिणी ॥ ११३ ॥
पाशिनी चक्रिणी दान्ता वज्रिणी वज्रदण्डिनी ॥ ११४ ॥
नानाभरणदीप्ताङ्गी नानामणिविभूषणा ॥ ११५ ॥
त्रैलोक्यनमिता पूज्या चिन्मयाऽऽनन्दरूपिणी ॥ ११६ ॥
घोराग्निदाहशमनी राजदैवादिशालिनी ॥ ११७ ॥
रागादिदोषरहिता जरामरणवर्जिता ॥ ११८ ॥
सर्वदेवैः स्तुता देवी सर्वसिद्धिनमस्कृता ॥ ११९ ॥
स्वस्तिः स्वस्तिमती बाला मलयाचलसंस्थिता ॥ १२० ॥
रुद्राणी रुद्ररूपा च रौद्री रौद्रार्तिहारिणी ॥ १२१ ॥
अनाहता त्रिनयना निर्भरा निर्वृतिः परा ॥ १२२ ॥
मन्त्रात्मिका मन्त्रगम्या मन्त्रमाता समन्त्रिणी ॥ १२३ ॥
धरणी धारिणी पृथ्वी धरा धात्री वसुन्धरा ॥ १२४ ॥
श्रीगतिः श्रीमती श्रेष्ठा श्रीकरी श्रीविभावनी ॥ १२५ ॥
उमा शारङ्गिणी कृष्णा कुटिला कुटिलालका ॥ १२६ ॥
अमृता सत्यसङ्कल्पा सत्याशा ग्रन्थिभेदिनी ॥ १२७ ॥
सुन्दराङ्गी सुवर्णाभा सुरासुरनमस्कृता ॥ १२८ ॥
ईशानी भुवनेशानी भुवना भुवनेश्वरी ॥ १२९ ॥
अचिन्त्यशक्तिमहिमा चिन्त्याचिन्त्यस्वरूपिणी ॥ १३० ॥
अमिता घोररूपा च सुधाधारा सुधावहा ॥ १३१ ॥
अनसूया क्षमा लज्जा दुर्लभा भुवनान्तिका ॥ १३२ ॥
शीलस्था शीलरूपा च शीला शीलप्रदायिनी ॥ १३३ ॥
विद्योतिनी विचित्रात्मा विद्युत्पटलसन्निभा ॥ १३४ ॥
रोगिणी रोगशमनी महारोगभयापहा ॥ १३५ ॥
कृष्णाङ्गवाहिनी चैव कृष्णा कृष्णसहोदरी ॥ १३६ ॥
विश्वोदरी विश्वमाता योगमुद्रा च योगिनी ॥ १३७ ॥
कौलिकानन्दकन्या च शृङ्गारपीठवासिनी ॥ १३८ ॥
धूम्रवक्त्रा धूम्रनेत्रा धूम्रकेशी च धूसरा ॥ १३९ ॥
तपिनी तापिनी दक्षा विष्णुविद्या त्वनाथिता ॥ १४० ॥
पशुघ्नी पशुरूपा च पशुदा पशुवाहिनी ॥ १४१ ॥
चन्द्रमा चन्द्ररेखा च चन्द्रकान्तिविभूषणा ॥ १४२ ॥
शुक्लाम्बरधरा देवी वीणापुस्तकधारिणी ॥ १४३ ॥
रक्ताम्बरा च रक्ताङ्गी रक्तपद्मविलोचना ॥ १४४ ॥
आकाशलिङ्गसम्भूता भुवनोद्यानवासिनी ॥ १४५ ॥
अनौपम्यगुणोपेता सदा मधुरभाषिणी ॥ १४६ ॥
दुस्तरी तारिणी तारा तरुणी ताररूपिणी ॥ १४७ ॥
भगेश्वरी भगाराध्या भगिनी भगिनीप्रिया ॥ १४८ ॥
भगेश्वरी भगरूपा भगगुह्या भगावहा ॥ १४९ ॥
सर्वसङ्क्षोभिणीशक्तिः सर्वविद्राविणी तथा ॥ १५० ॥
भेरुण्डा चण्डिका ज्योत्स्ना विश्वचक्षुस्तपोवहा ॥ १५१ ॥
उन्मादिनी महारूपा दिव्यरूपा सुरार्चिता ॥ १५२ ॥
मदिरानन्दकैवल्या मदिराक्षी मदालसा ॥ १५३ ॥
सिद्धार्चिता सिद्धमाता सिद्धसर्वार्थसाधिका ॥ १५४ ॥
परेशी पारगा पारा पारसिद्धिः परा गतिः ॥ १५५ ॥
वेदवेदाङ्गजननी सर्वशास्त्रविशारदा ॥ १५६ ॥
सर्वज्ञानमयी देवी सर्वधर्ममयीश्वरी ॥ १५७ ॥
त्रैलोक्याकर्षिणी देवी सर्वाद्यानन्दरूपिणी ॥ १५८ ॥
सर्वसङ्क्षोभिणी देवी सर्वमङ्गलकारिणी ॥ १५९ ॥
त्रैलोक्यजयिनी देवी सर्वोन्मादस्वरूपिणी ॥ १६० ॥
सर्वार्थसाधिनी देवी सर्वसम्पत्तिदायिनी ॥ १६१ ॥
सर्वसिद्धिप्रदा देवी सर्वदुःखविमोचिनी ॥ १६२ ॥
सर्वाङ्गसुन्दरी माता सर्वसौभाग्यदायिनी ॥ १६३ ॥
सर्वज्ञानमयी देवी सर्वव्याधिविनाशिनी ॥ १६४ ॥
सर्वानन्दमयी देवी सर्वरक्षास्वरूपिणी ॥ १६५ ॥
सर्वदुःखप्रशमनी परमानन्ददायिनी ॥ १६६ ॥
त्रैविद्या चैव त्रिस्मारा त्रैलोक्यत्रिपुरेश्वरी ॥ १६७ ॥
त्रिधात्री त्रिदशा त्र्यक्षा त्रिघ्नी त्रिपुरवाहिनी ॥ १६८ ॥
श्रीमत्त्रिपुरसुन्दर्या मन्त्रनामसहस्रकम् ॥ १६९ ॥
गोपनीयं प्रयत्नेन पठनीयं प्रयत्नतः ॥ १७० ॥
नातः परतरं स्तोत्रं नातः परतरा गतिः ॥ १७१ ॥
यः पठेत्परया भक्त्या शृणुयाद्वा समाहितः ॥ १७२ ॥
फलार्थी लभते कामान् धनार्थी लभते धनम् ॥ १७३ ॥
कन्यार्थी लभते कन्यां सुतार्थी लभते सुतम् ॥ १७४ ॥
मूर्खोऽपि लभते शास्त्रं चौरोऽपि लभते गतिम् ॥ १७५ ॥
पठेद्वा पाठयेद्वापि शृणुयाद्वा समाहितः ॥ १७६ ॥
स मुक्तः सर्वपापेभ्यः कामेश्वरसमो भवेत् ॥ १७७ ॥
तस्या वश्यं भवेद्दास्ये त्रैलोक्यं सचराचरम् ॥ १७८ ॥
पन्नगा गरुडं दृष्ट्वा सिंहं दृष्ट्वा यथा मृगाः ॥ १७९ ॥
कीटवत्प्रपलायन्ते तस्य वक्त्रावलोकनात् ॥ १८० ॥
पातका विविधाः सन्ति मेरुमन्दरसन्निभाः ॥ १८१ ॥
एकधा पठनादेव सर्पपापक्षयो भवेत् ॥ १८२ ॥
नश्यन्ति सहसा रोगा दशधाऽऽवर्तनेन च ॥ १८३ ॥
सहस्रदशकं यस्तु पठेद्भक्तिपरायणः ॥ १८४ ॥
लक्षं पूर्णं यदा पुत्र स्तवराजं पठेत्सुधीः ॥ १८५ ॥
सर्वतीर्थेषु यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु यत्फलम् ॥ १८६ ॥
तत्फलं कोटिगुणितं सकृज्जप्त्वा लभेन्नरः ॥ १८७ ॥
देहान्ते परमं स्थानं यत्सुरैरपि दुर्लभम् ॥ १८८ ॥
स यास्यति न सन्देहः स्तवराजप्रकीर्तनात् ॥ १८९ ॥
