जय काली और गौरा देवी कृत सेवा ॥ जय॥
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ जय॥
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी ॥ जय॥
चौमुख दीपक दर्शन सबका दुःख खोवे ॥ जय॥
कृपा करिये भैरव करिये नहीं देरी ॥ जय॥
बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत ॥ जय॥
कहे धरणीधर नर मनवाञ्छित फल पावे ॥ जय॥
