निरुपाधिमहामाया शारदा प्रणवात्मिका ॥ १ ॥
नादातीता ब्रह्मविद्या मूलविद्या परात्परा ॥ २ ॥
मूलाधारस्थगणपदक्षिणाङ्कनिवासिनी ॥ ३ ॥
सर्वाधारा साक्षिभूता ब्रह्ममूला सदाश्रया ॥ ४ ॥
स्वानन्दयोगसंलभ्या निदिध्यासस्वरूपिणी ॥ ५ ॥
भक्त्यादिकिङ्करीजुष्टा स्वानन्देशसमन्विता ॥ ६ ॥
तमस्तिरोधानकरी स्वानन्देशप्रदर्शिनी ॥ ७ ॥
रागादिदोषशमनी कर्मज्ञानप्रदायिनी ॥ ८ ॥
अनाहतैकनिलया गुणसत्त्वप्रकाशिनी ॥ ९ ॥
विशुद्धिस्थाननिलया हृदयग्रन्धिभेदिनी ॥ १० ॥
आज्ञाचक्रसमासीना निर्गुणब्रह्मसम्युता ॥ ११ ॥
द्वादशान्तैकनिलया स्वस्वानन्दप्रदायिनी ॥ १२ ॥
इक्षुसागरमध्यस्था निजलोकनिवासिनी ॥ १३ ॥
सुधामूर्तिः सुधावर्णा केवला हृद्गुहामयी ॥ १४ ॥
विकचाम्भोरुहदललोचना ज्ञानरूपिणी ॥ १५ ॥
रत्नदर्पणसङ्काशकपोला निर्गुणात्मिका ॥ १६ ॥
कम्बुकण्ठी सुबिम्बोष्ठी वीणापुस्तकधारिणी ॥ १७ ॥
कैवल्यज्ञानसुखदपदाब्जा भारती मतिः ॥ १८ ॥
विघ्नेशबद्धमाङ्गल्यसूत्रशोभितकन्धरा ॥ १९ ॥
वागीश्वरी लोकमाता महाबुद्धिः सरस्वती ॥ २० ॥
कटाक्षकिङ्करीभूतकेशबृन्दसमन्विता ॥ २१ ॥
पञ्चचित्तवृत्तिमयी तारमन्त्रस्वरूपिणी ॥ २२ ॥
ब्रह्मशक्तिर्महामाया जगद्ब्रह्मस्वरूपिणी ॥ २३ ॥
यः पठेद्भक्तिभावेन विद्यां बुद्धिं श्रियं बलम् ।
सम्प्राप्य ज्ञानमतुलं ब्रह्मभूयमवाप्नुयात् ॥ २४ ॥
