नारद उवाच –
श्रुतिस्मृतिपुराणानां रहस्यं त्वन्मुखाच्छ्रुतम् ॥ 1 ॥
केन वा ब्रह्मविज्ञानं किं नु वा मोक्षसाधनम् ॥ 2 ॥
ऐहिकामुष्मिकफलं केन वा पद्मलोचन ॥ 3 ॥
श्रीनारायण उवाच–
साधु साधु महाप्राज्ञ सम्यक् पृष्टं त्वयाऽनघ ॥ 4 ॥
नाम्नां शुभानां दिव्यानां सर्वपापविनाशनम् ॥ 5 ॥
अष्टोत्तरसहस्रस्य ऋषिर्ब्रह्मा प्रकीर्तितः ॥ 6 ॥
हलोबीजानि तस्यैव स्वराः शक्तय ईरिताः ॥ 7 ॥
अथ ध्यानं प्रवक्ष्यामि साधकानां हिताय वै ॥ 8 ॥
रक्तां रक्तनवस्रजं मणिगणैर्युक्तां कुमारीमिमाम् ।
गायत्रीं कमलासनां करतलव्यानद्धकुण्डाम्बुजां
पद्माक्षीं च वरस्रजं च दधतीं हंसाधिरूढां भजे ॥ 9 ॥
अमृतार्णवमध्यस्थाप्यजिता चापराजिता ॥ 10 ॥
अजराजापराधर्मा अक्षसूत्रधराधरा ॥ 11 ॥
अञ्जनाद्रिप्रतीकाशाप्यञ्जनाद्रिनिवासिनी ॥ 12 ॥
अन्तर्बहिःस्थिताविद्याध्वंसिनी चान्तरात्मिका ॥ 13 ॥
अर्धमात्रार्थदानज्ञाप्यरिमण्डलमर्दिनी ॥ 14 ॥
आदिलक्ष्मीश्चादिशक्तिराकृतिश्चायतानना ॥ 15 ॥
आचार्यावर्तनाचाराप्यादिमूर्तिनिवासिनी ॥ 16 ॥
आधारनिलयाधारा चाकाशान्तनिवासिनी ॥ 17 ॥
आदित्यमण्डलगता चान्तरध्वान्तनाशिनी ॥ 18 ॥
इरावती चेन्द्रपदा चेन्द्राणी चेन्दुरूपिणी ॥ 19 ॥
इन्द्रनीलसमाकारा चेडापिङ्गलरूपिणी ॥ 20 ॥
उमा चोषा ह्युडुनिभा उर्वारुकफलानना ॥ 21 ॥
ऊर्ध्वा चाप्यूर्ध्वकेशी चाप्यूर्ध्वाधोगतिभेदिनी ॥ 22 ॥
ऋतं चर्षिरृतुमती ऋषिदेवनमस्कृता ॥ 23 ॥
ऋद्धिदा ऋजुमार्गस्था ऋजुधर्मा ऋजुप्रदा ॥ 24 ॥
लूतारिवरसम्भूता लूतादिविषहारिणी ॥ 25 ॥
ऐन्द्री ह्यैरावतारूढा चैहिकामुष्मिकप्रदा ॥ 26 ॥
और्वा ह्यौषधसम्पन्ना औपासनफलप्रदा ॥ 27 ॥
कात्यायनी कालरात्रिः कामाक्षी कामसुन्दरी ॥ 28 ॥
करिकुम्भस्तनभरा करवीरसुवासिनी ॥ 29 ॥
कुरुविन्ददलाकारा कुण्डली कुमुदालया ॥ 30 ॥
कमनीयगुणा कान्तिः कलाधारा कुमुद्वती ॥ 31 ॥
कौमारी करुणापाङ्गी ककुवन्ता करिप्रिया ॥ 32 ॥
कालिन्दी कालिका काञ्ची कलशोद्भवसंस्तुता ॥ 33 ॥
कुमारी कुण्डनिलया किराती कीरवाहना ॥ 34 ॥
कमण्डलुधरा काली कर्मनिर्मूलकारिणी ॥ 35 ॥
कस्तूरीतिलका कम्प्रा करीन्द्रगमना कुहूः ॥ 36 ॥
कूटस्था कुधरा कम्रा कुक्षिस्थाखिलविष्टपा ॥ 37 ॥
खट्वाङ्गधारिणी ख्याता खगराजोपरिस्थिता ॥ 38 ॥
खण्डेन्दुतिलका गङ्गा गणेशगुहपूजिता ॥ 39 ॥
गौतमी गामिनी गाधा गन्धर्वाप्सरसेविता ॥ 40 ॥
गन्धर्वी गह्वरी गोत्रा गिरीशा गहना गमी ॥ 41 ॥
गुर्वी गुणवती गुह्या गोप्तव्या गुणदायिनी ॥ 42 ॥
गर्वापहारिणी गोदा गोकुलस्था गदाधरा ॥ 43 ॥
घर्मदा घनदा घण्टा घोरदानवमर्दिनी ॥ 44 ॥
घण्टारवप्रिया घ्राणा घृणिसन्तुष्टकारिणी ॥ 45 ॥
ज्ञानधातुमयी चर्चा चर्चिता चारुहासिनी ॥ 46 ॥
चतुर्भुजा चारुदन्ता चातुरी चरितप्रदा ॥ 47 ॥
चन्द्रहासा चारुदात्री चकोरी चन्द्रहासिनी ॥ 48 ॥
चञ्चद्वाग्वादिनी चन्द्रचूडा चोरविनाशिनी ॥ 49 ॥
चारुमध्या चारुगतिश्चन्दिला चन्द्ररूपिणी ॥ 50 ॥
चन्द्रमण्डलमध्यस्था चन्द्रमण्डलदर्पणा ॥ 51 ॥
चित्स्वरूपा चन्द्रवती चन्द्रमाश्चन्दनप्रिया ॥ 52 ॥
छत्रयाता छत्रधरा छाया छन्दःपरिच्छदा ॥ 53 ॥
छन्दोऽनुष्टुप्प्रतिष्ठान्ता छिद्रोपद्रवभेदिनी ॥ 54 ॥
जननी जन्मरहिता जातवेदा जगन्मयी ॥ 55 ॥
जम्बूद्वीपवती ज्वाला जयन्ती जलशालिनी ॥ 56 ॥
जातरूपमयी जिह्वा जानकी जगती जरा ॥ 57 ॥
ज्वालामुखी जपवती ज्वरघ्नी जितविष्टपा ॥ 58 ॥
ज्वलन्ती जलदा ज्येष्ठा ज्याघोषास्फोटदिङ्मुखी ॥ 59 ॥
झिञ्झिका झणनिर्घोषा झञ्झामारुतवेगिनी ॥ 60 ॥
टङ्कबाणसमायुक्ता टङ्किनी टङ्कभेदिनी ॥ 61 ॥
टङ्कारकारिणी देवी ठठशब्दनिनादिनी ॥ 62 ॥
डामरीतन्त्रमार्गस्था डमड्डमरुनादिनी ॥ 63 ॥
ढुण्ढिविघ्नेशजननी ढक्काहस्ता ढिलिव्रजा ॥ 64 ॥
त्रिगुणा त्रिपदा तन्त्री तुलसी तरुणा तरुः ॥ 65 ॥
तरुणादित्यसङ्काशा तामसी तुहिना तुरा ॥ 66 ॥
त्रिशक्तिस्त्रिपुरा तुङ्गा तुरङ्गवदना तथा ॥ 67 ॥
तन्त्रमन्त्रविशेषज्ञा तनुमध्या त्रिविष्टपा ॥ 68 ॥
ताटङ्किनी तुषाराभा तुहिनाचलवासिनी ॥ 69 ॥
तिलहोमप्रिया तीर्था तमालकुसुमाकृतिः ॥ 70 ॥
तलोदरी तिलाभूषा ताटङ्कप्रियवादिनी ॥ 71 ॥
तप्तकाञ्चनसङ्काशा तप्तकाञ्चनभूषणा ॥ 72 ॥
तर्पणा तृप्तिदा तृप्ता तामसी तुम्बुरुस्तुता ॥ 73 ॥
थात्कारी थारवा थान्ता दोहिनी दीनवत्सला ॥ 74 ॥
देवरीतिर्दिवारात्रिर्द्रौपदी दुन्दुभिस्वना ॥ 75 ॥
दामोदरप्रिया दीप्ता दिग्वासा दिग्विमोहिनी ॥ 76 ॥
देववन्द्या दिविषदा द्वेषिणी दानवाकृतिः ॥ 77 ॥
धात्री धनुर्धरा धेनुर्धारिणी धर्मचारिणी ॥ 78 ॥
धर्मशीला धनाध्यक्षा धनुर्वेदविशारदा ॥ 79 ॥
धूमावती धूमकेशी धर्मशास्त्रप्रकाशिनी ॥ 80 ॥
नर्मदा नलिनी नीला नीलकण्ठसमाश्रया ॥ 81 ॥
निराधारा निरुपमा नित्यशुद्धा निरञ्जना ॥ 82 ॥
नृसिंहिनी नगधरा नृपनागविभूषिता ॥ 83 ॥
निरवद्या निराकारा नारदप्रियकारिणी ॥ 84 ॥
नवसूत्रधरा नीतिर्निरुपद्रवकारिणी ॥ 85 ॥
नवनीतप्रिया नारी नीलजीमूतनिस्वना ॥ 86 ॥
नामावलिर्निशुम्भघ्नी नागलोकनिवासिनी ॥ 87 ॥
नूपुराक्रान्तचरणा नरचित्तप्रमोदिनी ॥ 88 ॥
नन्दनोद्याननिलया निर्व्यूहोपरिचारिणी ॥ 89 ॥
पञ्चकोशविनिर्मुक्ता पञ्चपातकनाशिनी ॥ 90 ॥
पूर्णिमा परमा प्रीतिः परतेजः प्रकाशिनी ॥ 91 ॥
पातालतलनिर्मग्ना प्रीता प्रीतिविवर्धिनी ॥ 92 ॥
प्रजापतिः परिश्रान्ता पर्वतस्तनमण्डला ॥ 93 ॥
पद्मपत्रा पद्मपदा पद्मिनी प्रियभाषिणी ॥ 94 ॥
पुष्कला पुरुषा पर्वा पारिजातसुमप्रिया ॥ 95 ॥
प्रज्ञावतीसुता पौत्री पुत्रपूज्या पयस्विनी ॥ 96 ॥
पुराणी पुण्यशीला च प्रणतार्तिविनाशिनी ॥ 97 ॥
पुण्डरीकपुरावासा पुण्डरीकसमानना ॥ 98 ॥
प्रवालशोभा पिङ्गाक्षी पीतवासाः प्रचापला ॥ 99 ॥
पञ्चवर्णा पञ्चवाणी पञ्चिका पञ्जरस्थिता ॥ 100 ॥
पराकाष्ठा परेशानी पावनी पावकद्युतिः ॥ 101 ॥
पीताङ्गी पीतवसना पीतशय्या पिशाचिनी ॥ 102 ॥
पञ्चभक्षप्रियाचारा पूतनाप्राणघातिनी ॥ 103 ॥
पञ्चाङ्गी च पराशक्तिः परमाह्लादकारिणी ॥ 104 ॥
प्राणप्रिया पञ्चशिखा पन्नगोपरिशायिनी ॥ 105 ॥
पुराणन्यायमीमांसा पाटली पुष्पगन्धिनी ॥ 106 ॥
प्रवालशोभा पूर्णाशा प्रणवा पल्लवोदरी ॥ 107 ॥
फणीन्द्रभोगशयना फणिमण्डलमण्डिता ॥ 108 ॥
बलभद्रप्रिया वन्द्या बडवा बुद्धिसंस्तुता ॥ 109 ॥
बान्धवी बोधिता बुद्धिर्बन्धूककुसुमप्रिया ॥ 110 ॥
बृहस्पतिस्तुता बृन्दा बृन्दावनविहारिणी ॥ 111 ॥
बहुनेत्रा बहुपदा बहुकर्णावतंसिका ॥ 112 ॥
बिन्दुनादकलातीता बिन्दुनादस्वरूपिणी ॥ 113 ॥
बृन्दारका बृहत्स्कन्धा बृहती बाणपातिनी ॥ 114 ॥
बद्धपद्मासनासीना बिल्वपत्रतलस्थिता ॥ 115 ॥
बाला बाणासनवती बडबानलवेगिनी ॥ 116 ॥
भवानी भीषणवती भाविनी भयहारिणी ॥ 117 ॥
भैरवी भीषणाकारा भूतिदा भूतिमालिनी ॥ 118 ॥
भूतवासा भृगुलता भार्गवी भूसुरार्चिता ॥ 119 ॥
भामिनी भोगिनी भाषा भवानी भूरिदक्षिणा ॥ 120 ॥
भजनीया भूतधात्रीरञ्जिता भुवनेश्वरी ॥ 121 ॥
माता माया मधुमती मधुजिह्वा मधुप्रिया ॥ 122 ॥
मायातीता मधुमती मधुमांसा मधुद्रवा ॥ 123 ॥
मधुकैटभसंहर्त्री मेदिनी मेघमालिनी ॥ 124 ॥
महालक्ष्मीर्महाकाली महाकन्या महेश्वरी ॥ 125 ॥
मञ्जुमञ्जीरचरणा मोक्षदा मञ्जुभाषिणी ॥ 126 ॥
मेधा मरकतश्यामा मागधी मेनकात्मजा ॥ 127 ॥
मातृका मिहिराभासा मुकुन्दपदविक्रमा ॥ 128 ॥
मृगाक्षी महिषारूढा महिषासुरमर्दिनी ॥ 129 ॥
यौवनी युद्धमध्यस्था यमुना युगधारिणी ॥ 130 ॥
यात्रा यानविधानज्ञा यदुवंशसमुद्भवा ॥ 131 ॥
यामिनी योगनिरता यातुधानभयङ्करी ॥ 132 ॥
रौद्री रौद्रप्रियाकारा राममाता रतिप्रिया ॥ 133 ॥
राकेशी रूपसम्पन्ना रत्नसिंहासनस्थिता ॥ 134 ॥
राजहंससमारूढा रम्भा रक्तबलिप्रिया ॥ 135 ॥
रुरुचर्मपरीधाना रथिनी रत्नमालिका ॥ 136 ॥
रामचन्द्रपदाक्रान्ता रावणच्छेदकारिणी ॥ 137 ॥
लज्जाधिदेवता लोला ललिता लिङ्गधारिणी ॥ 138 ॥
लज्जा लम्बोदरी देवी ललना लोकधारिणी ॥ 139 ॥
वाराही विरजा वर्षा वरलक्ष्मीर्विलासिनी ॥ 140 ॥
वारुणी वेणुसम्भूता वीतिहोत्रा विरूपिणी ॥ 141 ॥
विष्णुपत्नी विष्णुमती विशालाक्षी वसुन्धरा ॥ 142 ॥
वेदाक्षरपरीताङ्गी वाजपेयफलप्रदा ॥ 143 ॥
व्यासप्रिया वर्मधरा वाल्मीकिपरिसेविता ॥ 144 ॥
शातोदरी शुभाचारा शुम्भासुरविमर्दिनी ॥ 145 ॥
शोणा शुभाशया शुभ्रा शिरःसन्धानकारिणी ॥ 146 ॥
शरभा शूलिनी शुद्धा शबरी शुकवाहना ॥ 147 ॥
शर्वाणी शर्वरीवन्द्या षड्भाषा षडृतुप्रिया ॥ 148 ॥
षडङ्गरूपसुमती सुरासुरनमस्कृता ॥ 149 ॥
सामगानप्रिया सूक्ष्मा सावित्री सामसम्भवा ॥ 150 ॥
सर्वैश्वर्यप्रिया सिद्धिः साधुबन्धुपराक्रमा ॥ 151 ॥
सर्वज्ञा सान्द्रकरुणा समानाधिकवर्जिता ॥ 152 ॥
सरधा सूर्यतनया सुकेशी सोमसंहतिः ॥ 153 ॥
क्षौमवस्त्रपरीताङ्गी क्षीराब्धितनया क्षमा ॥ 154 ॥
वेदगर्भा वरारोहा श्रीगायत्री पराम्बिका ॥ 155 ॥
पुण्यदं सर्वपापघ्नं महासम्पत्तिदायकम् ॥ 156 ॥
अष्टम्यां च विशेषेण पठितव्यं द्विजैः सह ॥ 157 ॥
यस्मै कस्मै न दातव्यं गायत्र्यास्तु विशेषतः ॥ 158 ॥
भ्रष्टेभ्यः साधकेभ्यश्च बान्धवेभ्यो न दर्शयेत् ॥ 159 ॥
चञ्चलापिस्थिरा भूत्वा कमला तत्र तिष्ठति ॥ 160 ॥
पुण्यप्रदं मनुष्याणां दरिद्राणां निधिप्रदम् ॥ 161 ॥
रोगाद्वै मुच्यते रोगी बद्धो मुच्येत बन्धनात् ॥ 162 ॥
गुरुतल्पगतो वापि पातकान्मुच्यते सकृत् ॥ 163 ॥
पाखण्डानृतमुख्येभ्यः पठनादेव मुच्यते ॥ 164 ॥
ब्रह्मसायुज्यदं नॄणां सत्यं सत्यं न संशयः ॥ 165 ॥
