ईश्वर उवाच
सहस्रनाम परमं प्रत्यङ्गिरार्थ सिद्धये ॥ 1 ॥
पराभवो न चास्यास्ति सभायां वा वने रणे ॥ 2 ॥
यथा भवति देवेशि साधकः शिव एव हि ॥ 3 ॥
सकृत्पाठेन जायन्ते प्रसन्ना प्रत्यङ्गिरा भवेत् ॥ 4 ॥
प्रत्यङ्गिरा विनियोगः सर्वसम्पत्ति हेतवे ॥ 5 ॥
एवं ध्यात्वा पठेदेतद्यदीच्छेदात्मनो हितम् ॥ 6 ॥
ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रः करतल करपृष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रां हृदयाय नमः ।
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ ह्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ ह्रैं कवचाय हुम् ।
ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ ह्रः अस्त्राय फट् ।
आशाम्बरा मुक्तकचा घनच्छवि-
-र्ध्येया सचर्मासिकरा हि भूषणा ।
दंष्ट्रोग्रवक्त्रा ग्रसिता हिता त्वया
प्रत्यङ्गिरा शङ्करतेजसेरिता ॥
देवी प्रत्यङ्गिरा दिव्या सरसा शशिशेखरा ।
सुमना सामिधेती च समस्तसुरशेमुषी ॥ 1 ॥
शम्भुसीमन्तिनी सीमा सुराराध्या सुधारसा ॥ 2 ॥
वनजाक्षी वनचरी वनी वनविनोदिनी ॥ 3 ॥
कला कलप्रिया कोली कोमला कालकामिनी ॥ 4 ॥
कुलीना कुटिला कान्ता कोकिला कलभाषिणी ॥ 5 ॥
केशिनी च कुशावर्ता कौशाम्बी केशवप्रिया ॥ 6 ॥
कुण्डली कुण्डलास्या च कुण्डलाङ्गदमण्डिता ॥ 7 ॥
कुन्दप्रिया कुन्दरुचिः कुरङ्गमदनोदिनी ॥ 8 ॥
कुसुम्भकुसुमा काञ्ची क्वणत्किङ्किणिका कटा ॥ 9 ॥
कपर्दिनी कपटिनी कण्ठिनी कालकण्ठिका ॥ 10 ॥
कुञ्जरस्था कुञ्जरता कुम्भि कुम्भस्तनद्वया ॥ 11 ॥
कुपिता कोटरस्था च कङ्काली कन्दरोदरा ॥ 12 ॥
कादम्बरी कदम्बस्था कुङ्कुमप्रेमधारिणी ॥ 13 ॥
कात्यायनी कृत्तिका च कार्तिकेयप्रवर्तिनी ॥ 14 ॥
कामरूपा क्रमावर्ती कामाक्षी काममोहिता ॥ 15 ॥
खरगा खरनाथा च खरास्या खेलनप्रिया ॥ 16 ॥
खरखण्डिनी ख्याता खण्डिता खण्डनीस्थिता ॥ 17 ॥
गङ्गा गोदावरी गौरी गोमत्यपि च गौतमी ॥ 18 ॥
गीता गीतप्रिया गोपा गण्डप्रीता गुणी गिरा ॥ 19 ॥
गोदा गोविन्दिनी गूढा निर्गूढा गूढविग्रहा ॥ 20 ॥
गिरिभूपालदुहिता गोगा गोच्छलवर्धिनी ॥ 21 ॥
घूत्कारिणी घूघकरी घुघूकपरिवारिता ॥ 22 ॥
घोररूपा च घोरा च घूती प्रतिघना घनी ॥ 23 ॥
घटस्या घटना घोघघातपातनिवारिणी ॥ 24 ॥
चातुरी चपला चक्रचला चेला चलाऽचला ॥ 25 ॥
चापिनी चपला चम्पू चिन्ता चिन्तामणिश्चिता ॥ 26 ॥
चक्रवर्तिवधूश्चक्रा चक्राङ्गा चक्रमोदिनी ॥ 27 ॥
चाम्पेयी चम्पकप्रीतिश्चण्डी चण्डालवासिनी ॥ 28 ॥
छुरिका छत्रमध्यस्था छिद्रा छेदकरी छिदा ॥ 29 ॥
छलिनी छलदा छत्रा छिटिका छेककृत्तथा ॥ 30 ॥
जया च जयदा जाती जयस्था जयवर्धिनी ॥ 31 ॥
जम्बूप्रिया जयस्था च जङ्गमा जङ्गमप्रिया ॥ 32 ॥
जातिप्रिया जीवनस्था जीमूतसदृशच्छविः ॥ 33 ॥
जवदा जववद्वाहा जवानी ज्वरहा ज्वरा ॥ 34 ॥
झिण्टीशा झम्पकृत् झम्पा झम्पत्रासनिवारिणी ॥ 35 ॥
ठक्कुरा ठीत्कृती ठिण्ठी ठिण्ठीरवसमावृता ॥ 36 ॥
डाकिनी डामरी चैव डिण्डिमध्वनिनन्दिनी ॥ 37 ॥
तरुणी तुन्दिला तुन्दा तामसी च तपःप्रिया ॥ 38 ॥
तुरङ्गा त्वरिता त्रेता तोतुला तोदिनी तुला ॥ 39 ॥
तमालदलवच्छामा तालम्लानवती तमी ॥ 40 ॥
तटस्था तिलतैलाक्ता तरणी तपनद्युतिः ॥ 41 ॥
तिलपुष्पप्रिया तारा तारकेशी कुटुम्बिनी ॥ 42 ॥
स्थितिः स्थैर्या स्थविष्ठा च स्थापतिः स्थलविग्रहा ॥ 43 ॥
देवी देववधूर्दैत्यदमनी दन्तभूषणा ॥ 44 ॥
दन्दशूकनिभा दैत्यदारिणी देवतानना ॥ 45 ॥
दशा दीपस्थिता दोषा दोषहा दोषकारिणी ॥ 46 ॥
दुर्गन्धनाशिनी दुःस्था दुःस्वप्नशमकारिणी ॥ 47 ॥
दरहा दरदा दात्री दायादा दुहिता दया ॥ 48 ॥
धीराऽधीरा धरित्री च धर्मदा धीरमानसा ॥ 49 ॥
धूमवर्णा धूमपाना धूमला धूममोहिनी ॥ 50 ॥
नवीना नर्मदा नर्मिनेमिर्नियमनिश्चया ॥ 51 ॥
नीतिर्निरन्तरा नग्नी निर्लेपा निर्गुणा नतिः ॥ 52 ॥
नवनीतप्रिया नारी नरकार्णवतारिणी ॥ 53 ॥
निशा निद्रा नरेन्द्रस्था नमिताऽनमितापि च ॥ 54 ॥
पताकिनी पताका च पलप्रीतिर्यशस्विनी ॥ 55 ॥
पराऽपरा कलापाऽऽप्पा पाककृत्यरति प्रिया ॥ 56 ॥
पशुवृद्धिकरी पुष्टिः पोषणी पुष्पवर्धिनी ॥ 57 ॥
पुरन्दरप्रिया प्रीतिः पुरमार्गनिवासिनी ॥ 58 ॥
पटुः पटासा परशुधारिणी पाशिनी तथा ॥ 59 ॥
पिशाची च पिशाचघ्नी पिशिताशनतोषिता ॥ 60 ॥
पेया प्रसिद्धा पीयूषा पूर्णा पूर्णमनोरथा ॥ 61 ॥
पङ्किला पङ्कमग्ना च पानीया पञ्जरस्थिता ॥ 62 ॥
पञ्चमुद्रा पुण्डरीका पिकी पिङ्गललोचना ॥ 63 ॥
प्रेतासना प्रियालुस्था पाण्डुघ्नी पीतसापहा ॥ 64 ॥
फूत्कारकारिणी स्फारा फुल्ला फुल्लाम्बुजासना ॥ 65 ॥
बलमाया बलारातिर्बलिनी बलवर्धिनी ॥ 66 ॥
विद्या विद्याप्रदा विद्याबोधिनी बोधदायिनी ॥ 67 ॥
वरदा वारुणी वीणा वीणावादनतत्परा ॥ 68 ॥
वैद्या वैद्यचिकित्सा च विवशा विश्वविश्रुता ॥ 69 ॥
विरावा विविधारावा बिम्बोष्ठी बिम्बवत्सला ॥ 70 ॥
वेदान्तवेद्या वेद्या च वैद्या च विजयप्रदा ॥ 71 ॥
भगिनी भगमाला च भवानी भवभाविनी ॥ 72 ॥
भिल्ली भल्लधरा भीरुर्भेरुण्डा चैभभयापहा ॥ 73 ॥
भगासना भगामोदा भेरी भाङ्काररञ्जिनी ॥ 74 ॥
भारद्वाजी भोगदात्री भवघ्नी भूतिभूषणा ॥ 75 ॥
भ्रमरी भ्रामरी नीला भूपालमुकुटस्थिता ॥ 76 ॥
महालक्ष्मीर्मदाक्षीबा मदिरा मदिरालया ॥ 77 ॥
मेधा मेधाकरी मेध्या मध्या मध्यवयस्थिता ॥ 78 ॥
मुद्रा मुद्रावती माता माया महिममन्दिरा ॥ 79 ॥
महादेववधूर्मान्या मथुरा मेरुमण्डला ॥ 80 ॥
मण्डपस्था मठस्थाऽमा माला मालाविलासिनी ॥ 81 ॥
मातङ्गिनी च मातङ्गी मतङ्गतनया मधुः ॥ 82 ॥
यामिनी यामिनीनाथभूषा यावकरञ्जिता ॥ 83 ॥
यमघ्नी यमवाणी च यजमानस्वरूपिणी ॥ 84 ॥
यज्ञसूत्रप्रदा ज्येष्ठा यज्ञकर्मकरी यशा ॥ 85 ॥
रञ्जिता राजपत्नी च रमा रेखा रवी रणी ॥ 86 ॥
रागिणी राजिनी राज्या राज्यदा राज्यवर्धिनी ॥ 87 ॥
रमणी रमणीया च रामा रामवती रतिः ॥ 88 ॥
रङ्गा रङ्गवती रागा रागज्ञा रागिनी रणा ॥ 89 ॥
रक्तचर्मधरा रन्त्री रक्तस्था रक्तवाहिनी ॥ 90 ॥
रङ्गभृद्रङ्गमधुरा रोदसी रोदसीगृहा ॥ 91 ॥
वन्दी वन्दिस्तुता बन्धुर्बन्धूककुसुमाधरा ॥ 92 ॥
विङ्की विङ्कपला विङ्का विङ्कस्था विङ्कवत्सला ॥ 93 ॥
शङ्खिनी शङ्खनिलया शङ्खमालावती शमी ॥ 94 ॥
शिम्बी शरावती श्यामा श्यामाङ्गी श्यामलोचना ॥ 95 ॥
शर्मदा शमहर्त्री च शाकिनी शङ्कुशेखरा ॥ 96 ॥
शेमुषी शोषिणी शौरी शारिः शौर्या शरा शरी ॥ 97 ॥
शृङ्गिणी शृङ्गिपलभुक् शङ्करी शाङ्करी तथा ॥ 98 ॥
शवस्था शवभुक् शैवी शाववर्णा शवोदरी ॥ 99 ॥
शवाकुण्डलिनी शैवा शङ्करा शिशिरा शिरा ॥ 100 ॥
शम्पिनी शङ्कुशक्तिः शं शन्तनुः शीलदायिनी ॥ 101 ॥
साधुसिद्धिः सिद्धिदात्री सिद्धा सिद्धसरस्वती ॥ 102 ॥
सपत्नी सरसा सारा सरस्वतिकरी सुधा ॥ 103 ॥
समिद्धा समदा सम्मा सम्मोहा समदर्शना ॥ 104 ॥
सवना सवनाधारा सावना समरा समी ॥ 105 ॥
हंसी हंसगतिर्हंसा हंसोज्ज्वलनिचोलयुक् ॥ 106 ॥
हेला हेलावती ह्रेषा ह्रेषस्था ह्रेषवर्धिनी ॥ 107 ॥
हुङ्कारी हन्तकृद्धङ्का हीहा हाहा हताहिता ॥ 108 ॥
होरी होत्री होलिका च होम्या होमा हविर्हरिः ॥ 109 ॥
लम्बोदरी लम्बकर्णा लम्बिका लम्बविग्रहा ॥ 110 ॥
ललामलोचना लोच्या लोलाक्षी लक्षणा लटा ॥ 111 ॥
लतिका लङ्घिका लङ्घा लघिमा लघुमध्यमा ॥ 112 ॥
लोमभृल्लोमलोम्नी च लुलुती लुलुलुम्पिनी ॥ 113 ॥
लक्ष्मीर्लक्ष्मीप्रदा लक्ष्या लक्ष्यबलगतिप्रदा ॥ 114 ॥
क्षामा क्षामोदरी क्षोणी क्षोणिभृत् क्षत्रियाङ्गना ॥ 115 ॥
क्षीणङ्करी क्षयकरी क्षयभृत् क्षयदा क्षतिः ।
क्षरन्ती क्षुद्रिका क्षुद्रा क्षुत्क्षामा क्षरपातका ॥ 116 ॥
मातुः सहस्रनामेदं प्रत्यङ्गिरासिद्धिदायकम् ॥ 1 ॥
अनाचान्तः पठेन्नित्यं स चापि स्यान्महेश्वरः ।
मूकः स्याद्वाक्पतिर्देवी रोगी नीरोगतां भवेत् ॥ 2 ॥
वन्ध्यापि सूते तनयान् गावश्च बहुदुग्धदाः ॥ 3 ॥
अरयः सङ्क्षयं यान्ति मनसा संस्मृता अपि ॥ 4 ॥
कर्ता हर्ता स्वयंवीरो जायते नात्रसंशयः ॥ 5 ॥
दुरितं न च तस्यास्ति नास्ति शोकः कदाचन ॥ 6 ॥
एकाकी निर्भयो धीरो दशावर्तं नरोत्तमः ॥ 7 ॥
विना सहस्रनाम्नां यो जपेन्मन्त्रं कदाचन ॥ 8 ॥
कुजवारे श्मशाने च मध्याह्ने यो जपेत्तथा ॥ 9 ॥
रोगार्तो यो निशीथान्ते पठेदम्भसि संस्थितः ॥ 10 ॥
अर्धरात्रे श्मशाने वा शनिवारे जपेन्मनुम् ॥ 11 ॥
सहस्रनाममेत्तद्धि तदा याति स्वयं शिवा ॥ 12 ॥
तदा यदि न भीतिः स्यात्ततो देहीति वाग्भवेत् ॥ 13 ॥
यथेष्टं च वरं दत्त्वा याति प्रत्यङ्गिरा शिवा ॥ 14 ॥
कुङ्कुमप्रथमाभ्यां तु लिखितं भूर्जपत्रके ॥ 15 ॥
कृतसम्पातनात्सिद्धं धार्यन्तद्दक्षिणेकरे ॥ 16 ॥
तदायं प्रणमेन्मन्त्री क्रुद्धः सम्रियते नरः ॥ 17 ॥
दुष्टश्वापदजन्तूनां न भीः कुत्रापि जायते ॥ 18 ॥
मोहन स्तम्भनाकर्षमारणोच्चाटनानि च ॥ 19 ॥
नीलवस्त्रे विलिखितं ध्वजायां यदि तिष्ठति ॥ 20 ॥
एतज्जप्तं महाभस्म ललाटे यदि धारयेत् ॥ 21 ॥
राजपत्न्योऽपि वश्याः स्युः किमन्याः परयोषितः ॥ 22 ॥
पण्डितश्च महावादी जायते नात्रसंशयः ॥ 23 ॥
इहलोके सुखं भुक्त्वा परत्र त्रिदिवं व्रजेत् ॥ 24 ॥
गोप्यं गुह्यतमं लोके गोपनीयं स्वयोनिवत् ॥ 25 ॥
