जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय॥
महिमा अमित न जाय बखानी॥
दियो विष्णु तुमको सनमाना,
जग में छायो सुयश महाना॥
तिहूँ लोक की हो सुखखानी॥
भगवत पूजा कर जो कोई,
बिना तुम्हारे सफल न होई॥
उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा॥
करे सदा जो तव नित सुमिरन,
तेहिके काज होय सब पूरन॥
ताको जानत सब संसारा॥
तव पूजन जो करैं कुंवारी,
पावै सुन्दर वर सुकुमारी॥
सुख सम्पत्ति से होय सुखारी॥
वृद्धा नारी करै जो पूजन,
मिले भक्ति होवै पुलकित मन॥
भवनिधि से तर जावै सोई॥
कथा भागवत यज्ञ करावै,
तुम बिन नहीं सफलता पावै॥
ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी॥
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन,
सकल काज सिधि होवै क्षण में॥
सब जग में तव यश विख्याता॥
देव रिषी मुनि औ तपधारी,
करत सदा तव जय जयकारी॥
महिमा अगम पार नहिं पाया॥
नमो नमो जै जै सुखकारनि,
नमो नमो जै दुखनिवारनि॥
नमो नमो अघ काटन छेनी॥
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी,
नमो नमो दुष्टन मद छेनी॥
नमो नमो परलोक सुधारनि॥
नमो नमो निज भक्त उबारनि,
नमो नमो जनकाज संवारनि॥
नमो नमो सुख उपजावनि॥
जयति जयति जय तुलसीमाई,
ध्याऊँ तुमको शीश नवाई॥
बिगड़े कारज आप बनाओ॥
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी,
पूरण आशा करहु हमारी॥
निशदिन तेरे ही गुण गाऊं॥
क्रहु मात यह अब मोपर दाया,
निर्मल होय सकल ममकाया॥
सकल मनोरथ पूर्ण कीजै॥
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा,
छमहु मात अपराध हमारा॥
ता सम जग में और न दूजा॥
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे,
फिर सुन्दर स्नान करावे॥
धूप दीप नैवेद्य लगावे॥
करे आचमन गंगा जल से,
ध्यान करे हृदय निर्मल से॥
अस्तुति करे मात तुलसा की॥
यह विधि पूजा करे हमेशा,
ताके तन नहिं रहै क्लेशा॥
सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं॥
है यह कथा महा सुखदाई,
पढ़े सुने सो भव तर जाई॥
तुम्हरी महिमा सब जग जानी॥
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे,
गा गाकर मां तुझे रिझावे॥
गोविन्द सो फल पावही, जो मन इच्छा होय॥
