भूतिभूषितसर्वाङ्ग परात्परतर प्रभो ॥ 1 ॥
आद्या या चित्स्वरूपा या निर्विकारा निरञ्जना ॥ 2 ॥
अग्राह्यातीन्द्रिया शुद्धा निरीहा स्वावभासिका ॥ 3 ॥
प्रकृतिर्जगदुत्पत्तिस्थितिसंहारकारिणी ॥ 4 ॥
नाशाय धत्ते सा देहं तत्तत्कार्यैकसाधकम् ॥ 5 ॥
विद्युत्केशहिरण्याक्षबालाकादिवधाय च ॥ 6 ॥
वाराही विकटाकारा दानवासुरनाशिनी ॥ 7 ॥
तस्याः सहस्रनामाख्यं स्तोत्रं मे समुदीरय ॥ 8 ॥
अनुग्राह्या यद्यहं स्यां तदा वद दयानिधे ॥ 9 ॥
साधु साधु वरारोहे धन्या बहुमतासि मे ।
शुश्रूषया समुत्पन्ना भक्तिः श्रद्धान्विता तव ॥ 10 ॥
तव चेन्न प्रवक्ष्यामि प्रिये कस्य वदाम्यहम् ॥ 11 ॥
विशेषतः कलियुगे न देयं यस्य कस्यचित् ।
सर्वेऽन्यथा सिद्धिभाजो भविष्यन्ति वरानने ॥ 12 ॥
ॐ वाराही वामनी वामा बगला वासवी वसुः ।
वैदेही वीरसूर्बाला वरदा विष्णुवल्लभा ॥ 13 ॥
वसुन्धरा वीतिहोत्रा वीतरागा विहायसी ॥ 14 ॥
धूम्रा कपालिनी वामा कुरुकुल्ला कलावती ॥ 15 ॥
धृतिर्लक्ष्मीर्जया तुष्टिः शक्तिर्मेधा तपस्विनी ॥ 16 ॥
लज्जा मतिः स्मृतिर्निद्रा तन्त्रा गौरी शिवा स्वधा ॥ 17 ॥
भूदारा भयहा भीरुर्भैरवी भङ्गरा भटी ॥ 18 ॥
घनाघना घर्घरा च घोणयुक्ताऽघनाशिनी ॥ 19 ॥
ऐशान्यूर्ध्वाधःस्थिता च पृष्ठदक्षाग्रवामगा ॥ 20 ॥
ऐं श्रीः ह्रीः क्लीं तीर्थगतिः प्रीतिर्धीर्गीः कलाऽव्यया ॥ 21 ॥
गदासिशक्तिचापेषुशूलचक्रर्ष्टिधारिणी ॥ 22 ॥
सत्याक्षरा निधिर्नेत्री धात्री पोत्री परा पटुः ॥ 23 ॥
मालिनी मानिनी माता माननीया मनस्विनी ॥ 24 ॥
मेदस्विनी मद्यरता मधुपा मङ्गलाऽमरा ॥ 25 ॥
महादेवी मोहहरी मञ्जुर्मृत्युञ्जयाऽमला ॥ 26 ॥
मृगाङ्का मेनका मान्या महिषघ्नी मदन्तिका ॥ 27 ॥
सिंहर्क्षमहिषव्याघ्रमृगक्रोडानना धुनी ॥ 28 ॥
धर्मध्वना ध्यानपरा धनधान्यधराप्रदा ॥ 29 ॥
कलाकाष्ठाक्षमापक्षाहस्त्रुटिश्वासरूपिणी ॥ 30 ॥
रामा रतिप्रिया रुष्टा रक्षिणी रविमध्यगा ॥ 31 ॥
रोषा रोषवती रूक्षा करिराज्यप्रदा रता ॥ 32 ॥
गङ्गा च यमुना चैव सरस्वतिस्वसूर्मधुः ॥ 33 ॥
कट्वोरगवती चारा सहस्राक्षा प्रतर्दना ॥ 34 ॥
यावनी सौरभी कुब्जा वक्रतुण्डा वधोद्यता ॥ 35 ॥
ध्यानातीताऽपरिच्छेद्या मृत्युरूपा त्रिवर्गदा ॥ 36 ॥
वृषाकपिर्वृषारूढा वृषेशी वृषवाहना ॥ 37 ॥
कोदण्डिनी नागचूडा चक्षुष्या परमार्थिका ॥ 38 ॥
दुर्गा राधा दुःखहन्त्री दुराराध्या दवीयसी ॥ 39 ॥
सुवेणी रमणी श्यामा मृगव्याधार्घतापिनी ॥ 40 ॥
कपर्दिनी कामकामा कमनीया कलोज्ज्वला ॥ 41 ॥
कर्कशा कारणा कान्ता कल्पाऽकल्पा कटङ्कटा ॥ 42 ॥
तत्प्रिया तत्परा राया स्वर्भानुः कालवञ्चिनी ॥ 43 ॥
व्यङ्गा शुभाङ्गा वामाङ्गा नीलाङ्गाऽनङ्गरूपिणी ॥ 44 ॥
भद्रा सुभद्रा भद्राक्षी सिंहिका विनताऽदितिः ॥ 45 ॥
चर्चिका भोगवत्यम्बा सारसी शबरी नटी ॥ 46 ॥
निम्नगा निम्ननाभिश्च सहिष्णुर्जागृती लिपिः ॥ 47 ॥
दीपिनी दाविनी धात्री दक्षकन्या दम्या दरत् ॥ 48 ॥
दानप्रिया दोषहन्त्री दुःखदारिद्र्यनाशिनी ॥ 49 ॥
दर्वीकरी दुर्वलिता दुर्युगाऽद्वयवादिनी ॥ 50 ॥
तारिणी तारकान्तारा परमात्माब्जलोचना ॥ 51 ॥
ईशनन्दा नदी नागी यक्षिणी सर्पिणी वरी ॥ 52 ॥
जननी प्रीतिभागेशी साम्राज्ञी संविदुत्तमा ॥ 53 ॥
चामुण्डा प्लाविनी हाला बृहज्ज्योतिरुरुक्रमा ॥ 54 ॥
नभस्या माधवी ज्येष्ठा शिशिरा ज्वालिनी रुचिः ॥ 55 ॥
पृषदश्वा नभोयोनिः सुप्रतीका विभावरी ॥ 56 ॥
गन्धर्वी गणिका गुन्द्रा गारुडी गोपिकाऽग्रगा ॥ 57 ॥
गर्जिता गाननी गोना गोरक्षा गोविदां गतिः ॥ 58 ॥
पारस्करी पाञ्चनदा बहुरूपा विरूपिका ॥ 59 ॥
यज्ञविग्रहिणी यज्ञा यायजूका यशस्विनी ॥ 60 ॥
पुण्डरीकाऽश्वमेधश्च राजसूयश्च नाभसः ॥ 61 ॥
विश्वजिद्ब्रह्मयज्ञश्च प्राजापत्यः शिलायवः ॥ 62 ॥
सूर्यक्रान्ता गजक्रान्ता बलिभिन्नागयज्ञकः ॥ 63 ॥
आदित्यामय गोदोह गवामय मृगामया ॥ 64 ॥
अग्निविद्द्वादशाहस्वोपांशुः सोम विधो हनः ॥ 65 ॥
सर्वस्वदक्षिणो दीक्षा सोमाख्या समिदाह्वयः ॥ 66 ॥
दण्डा पुरुष मेधश्च श्येनो वज्र इषुर्यमः ॥ 67 ॥
ज्योतिष्टोमः गुदो दर्शो नन्द्याख्यः पौर्णमासिकः ॥ 68 ॥
सौभाग्यकृच्च कारीषो बैदलायनरामठौ ॥ 69 ॥
वैनतेयोच्चाटनौ च वशीकरण मारणे ॥ 70 ॥
शङ्खचूडो गजच्छायो रौद्राख्यो विष्णुविक्रमः ॥ 71 ॥
श्रौषट् वौषट् वषट्कारः पाकसंस्था परिश्रुती ॥ 72 ॥
सौत्रामणी च भारुन्दा बार्हस्पत्यो बलङ्गमः ॥ 73 ॥
हविःसंस्था सोमसंस्था पाकसंस्था गरुत्मती ॥ 74 ॥
चपलो मन्थनी मेढी यूपः प्राग्वंशकुञ्चिका ॥ 75 ॥
आप्तोर्यामो द्रोणकलशो मैत्रावरुण आश्विनः ॥ 76 ॥
प्रतिप्रस्थानशुक्रौ च सामिधेनी समित्समा ॥ 77 ॥
आग्नीध्रोऽच्छावकाष्टावग्ग्रावस्तुत्प्रतर्दकः ॥ 78 ॥
प्रस्तोता प्रतिप्रस्थाता यजमानो ध्रुवन्त्रिका ॥ 79 ॥
जुहुद्घ्रावोपभृद्ब्रह्मा त्रयी त्रेता तरस्विनी ॥ 80 ॥
अग्निजिह्वा दर्भरोमा ब्रह्मशीर्षा महोदरी ॥ 81 ॥
ओङ्कारिणी चतुर्वेदरूपा श्रुतिरनुल्बणा ॥ 82 ॥
भीमवक्त्रा महावक्त्रा कीर्तिराकृष्णपिङ्गला ॥ 83 ॥
घोरानना घोरजिह्वा घोररावा महाव्रता ॥ 84 ॥
सुरभी सौलभी वीची छाया सन्ध्या च मांसला ॥ 85 ॥
त्रासिनी मोहिनी द्वेष्या मृत्युरूपा भयापहा ॥ 86 ॥
अभया पृथिवी साध्वी केशिनी व्याधिजन्महा ॥ 87 ॥
कन्यादेवी सुरादेवी भीमादेवी मदन्तिका ॥ 88 ॥
वीरभद्रा महाभद्रा महादेवी महासुरी ॥ 89 ॥
कपालहस्ता खट्वाङ्गी खड्गिनी शूलिनी हली ॥ 90 ॥
धूम्रकेतुर्महास्यायुर्युगानां परिवर्तिनी ॥ 91 ॥
वेताली ब्रह्मवेताली महावेतालिका तथा ॥ 92 ॥
भूतं भव्यं भविष्यं च साङ्ख्यं योगस्तपो दमः ॥ 93 ॥
घण्टारवा विरूपाक्षी शिखिविच्छ्रीचयप्रिया ॥ 94 ॥
मातङ्गी मत्तमातङ्गी कौशिकी ब्रह्मवादिनी ॥ 95 ॥
जया च विजया चैव विनता कद्रुरेव च ॥ 96 ॥
दमनी धर्मिणी दम्या छेदिनी तापिनी तपी ॥ 97 ॥
हरिणी हारिणी हन्त्री धरिणी धारिणी धरा ॥ 98 ॥
रेवती कालकर्णी च सिद्धिर्लक्ष्मीररुन्धती ॥ 99 ॥
व्युष्टिः ख्यातिः सिनीवाली कुहूः ऋतुमती मृतिः ॥ 100 ॥
भ्रमणी भ्रामणी भ्रामा भ्रमरी भ्रामरी भ्रमा ॥ 101 ॥
विद्युज्जिह्वा वर्षिणी च हिरण्याक्षनिपातिनी ॥ 102 ॥
प्रधाना तारका तारा हितात्मा हितभेदिनी ॥ 103 ॥
वारुणी व्यरुणी वाणी वीणा वेणी विहङ्गमा ॥ 104 ॥
अजरा लोहिता लाक्षा प्रतप्ता विश्वभोजिनी ॥ 105 ॥
चतुर्वेदा चतुर्भारा चतुरन्ता चरुप्रिया ॥ 106 ॥
निर्लेपा निष्प्रपञ्चा च प्रशान्ता नित्यविग्रहा ॥ 107 ॥
निष्कलङ्का निरालम्बा निर्द्वन्द्वा निष्परिग्रहा ॥ 108 ॥
निरिन्द्रिया निराभासा निर्मोहा नीतिनायिका ॥ 109 ॥
मुण्डा विरूपा विकृता पिङ्गलाक्षी गुणोत्तरा ॥ 110 ॥
परमात्मा परेशानी परा पारा परन्तपा ॥ 111 ॥
विस्मया दुर्जया दक्षा दनुहन्त्री दयालया ॥ 112 ॥
एवमुड्डामरातन्त्रान्मयोद्धृत्य प्रकाशितम् ॥ 113 ॥
यदीच्छसि द्रुतं सिद्धिमैश्वर्यं चिरजीविताम् ॥ 114 ॥
नाम्नां सहस्रं वाराह्याः मया ते समुदीरितम् ॥ 115 ॥
अश्वमेधसहस्रस्य वाजपेयशतस्य च ॥ 116 ॥
पठतः सर्वभावेन सर्वा स्युः सिद्धयः करे ॥ 117 ॥
घनसारायते वह्निरगाधोब्धिः कणायते ॥ 118 ॥
हारायन्ते महासर्पाः सिंहः क्रीडामृगायते ॥ 119 ॥
तस्मान्नाम्नां सहस्रेण स्तुता सा जगदम्बिका ।
प्रयच्छत्यखिलान् कामान् देहान्ते परमां गतिम् ॥ 120 ॥
