देव देव महादेव भक्तानां प्रीतिवर्धन ।
कानि नामानि प्रोक्तानि तेन राज्ञा महात्मना ॥ १॥
वद मे देवशार्दूल भक्तास्मि सततं प्रिया ॥ २॥
साधु साधु महादेवि पृष्टं नामामृतं त्वया ।
गुह्याद्गुह्यतरं स्तोत्रं प्रवक्ष्यामि समासतः ॥ ३॥
पठनाल्लिखनाच्चैव पूजनात् किं न जायते ॥ ४॥
गङ्गास्नानफलं सद्यः प्राप्नुयान्नात्र संशयः ॥ ५॥
छन्दोऽनुष्टुप् तथा ख्यातं गङ्गा वै देवता मता ॥ ६॥
अक्षयस्वर्गकामाय विनियोगः प्रकीर्तितः ॥ ७॥
शिवशेखरसंवासा ब्रह्मणः कलशस्थिता ॥ ८॥
ब्रह्मरन्ध्रसमुद्भूता ब्रह्मरन्ध्रनिवासिनी ॥ ९॥
ब्रह्माण्डभेदनपरा परब्रह्मधरा परा ॥ १०॥
मुक्तिदा भुक्तिदानङ्गा शत्रुदावानलात्मिका ॥ ११॥
सरस्वती च सावित्री जयसेना जयात्मिका ॥ १२॥
त्रयी वेदवदान्या च मेदिनी भेदिनी घरा ॥ १३॥
दामिनी दामिनीवासा कुलिशा कुलिशप्रिया ॥ १४॥
कुलीना सुभगा भाग्या भाग्यगम्या यशोमती ॥ १५॥
षोडशी षोडशाराध्या षोढान्याससहायिनी ॥ १६॥
कालिका मुण्डमाला च कालानां शतनाशिनी ॥ १७॥
शैवी माया शिवा रुण्डा चण्डमुण्ड विनाशिनी ॥ १८॥
चण्डेश्वरी महाप्राज्ञा प्रसाधीः सिद्धिदायिनी ॥ १९॥
कौमारी शक्तिरुद्दिष्टा क्रौचदैत्यविनाशिनी ॥ २०॥
तारकस्य पराशक्तिस्तारकाणां पतिप्रिया ॥ २१॥
नारायणी दयासिन्धुः सिन्धूत्तरनिवासिनी ॥ २२॥
जलन्धरस्य जननी जलन्धरविरूपिणी ॥ २३॥
भीष्ममाता महाभीष्मा भीष्माणां प्रीतिवर्द्धिनी ॥ २४॥
तुङ्गेश्वरसहाया वदर्याश्रमवासिनी ॥ २५॥
जाह्नवी जह्नुतनया नागालयनिवासिनी ॥ २६॥
नागेश्वरसहाया च कैलासनिलया तथा ॥ २७॥
हरसङ्गरता चैव हरिपादविनिःसृता ॥ २८॥
सुरसा चाग्निभार्या च रत्नगर्भा विभावरी ॥ २९॥
अरिष्टनेमिदुहिता नहुषाङ्गणवासिनी ॥ ३०॥
मत्स्योदरी सुराराध्या सुराणां प्रीतिदायिनी ॥ ३१॥
सरस्वती शुभामोदा नन्दनाद्रिनिवासिनी ॥ ३२॥
रुद्राणी रुद्रसावित्री महाभैरवनादिनी ॥ ३३॥
केदारशिखरावासा महावलयवासिनी ॥ ३४॥
भूतभव्यपरा शर्वाखर्ववर्गा नृपेश्वरी ॥ ३५॥
शुक्रस्य जननी सौम्या व्यासमाता सुरेश्वरी ॥ ३६॥
कङ्कणा कङ्कणप्रख्या शुभकङ्कणदायिनी ॥ ३७॥
स्मरतां मुक्तिदा भुक्तिरूपा रूपविवर्जिता ॥ ३८॥
कृत्तिका कार्तिकावासा कार्तिकस्नानदायिनी ॥ ३९॥
मुनिसेव्या मुनिर्मेना मानवाकारधारिणी ॥ ४०॥
महाप्रयागनिलया तीर्थराजप्रसाधिनी ॥ ४१॥
मृगशीर्षधरा मार्गशीर्षस्नानफलप्रदा ॥ ४२॥
माघी मघायुता माध्या माघस्नाननिवासिनी ॥ ४३॥
अचला निश्चला जम्बूर्जम्बूद्वीपसहायिनी ॥ ४४॥
एकादशी द्वादशी च पुण्यापुण्यसहायिनी ॥ ४५॥
फाल्गुनी फाल्गुने सेव्या होलिका गन्धरूपिणी ॥ ४६॥
वसन्तर्तुसुसेव्या च वसन्तोत्सवदायिनी ॥ ४७॥
मकरन्दस्वरूपा च मकरन्दनिवासिनी ॥ ४८॥
माधवी माधवागारा माधवप्रीतिदायिनी ॥ ४९॥
वैशाखस्नानशुभदा पिण्डाकरनिवासिनी ॥ ५०॥
प्रपापुण्यप्रदा चैव नित्यस्नानवशीकृता ॥ ५१॥
निर्जला रूपिणी चैव तथानलशया मता ॥ ५२॥
श्रावणी श्रवणानन्दा सर्वसौख्यप्रदायिनी ॥ ५३॥
दूर्वापूजनसन्तुष्टा बीजाङ्कुरनिवासिनी ॥ ५४॥
नवमी कृष्णपक्षस्य शुक्लपक्षस्य पूर्णिमा ॥ ५५॥
अश्विनी भौमवारस्य शतरूपा ह्ययोनिजा ॥ ५६॥
प्रमोदा मोदसङ्कल्पा नानारूपा महोदरी ॥ ५७॥
अलङ्कारप्रिया चैव नानातिथिसमाश्रया ॥ ५८॥
गण्डशैलवहा चैव कामदेवधराम्बरा ॥ ५९॥
काशीप्रान्तवहा तुच्छप्रवाहा भारनाशिनी ॥ ६०॥
सतीनां प्रथमं गण्या गण्या सर्वमयी प्रभुः ॥ ६१॥
स्थितिरूपा स्थितिधरा स्थिराङ्गी कमलप्रिया ॥ ६२॥
तरङ्गिणी शैवलिनी तरङ्गशतसङ्कुला ॥ ६३॥
नानाजन्तुधरा प्रोक्ता नानाजन्तुविनाशिनी ॥ ६४॥
तीरस्थशवसञ्च्छन्ना धन्यानां शववाहिनी ॥ ६५॥
स्वर्नारीकुचकुम्भस्य कुङ्कुमारुणसुन्दरी ॥ ६६॥
मन्दाकिनी सरिच्छ्रेष्ठा सर्वदेवविगाहिनी ॥ ६७॥
तन्त्री तन्त्रस्थिता विद्या महादेवकुटुम्बिनी ॥ ६८॥
शची पुलोमजा तुङ्गा कश्यपस्य प्रिया मता ॥ ६९॥
द्वादशादित्यसदृशी प्रभा त्रैलोक्यदीपिका ॥ ७०॥
मणिप्रचयसम्पूज्या मध्याह्नार्क निवासिनी ॥ ७१॥
प्रातः सन्ध्या तथा प्रोक्ता सन्ध्या मध्याह्निकी मता ॥ ७२॥
निशीथतारका प्रख्या विद्युद्रूपा महोत्सवा ॥ ७३॥
विनोदिनी सुकल्लोला सागरस्वननिःस्वना ॥ ७४॥
नानापक्षिसमाकीर्णा जलकुक्कुटशोभिता ॥ ७ः५॥
जलजारुणसर्वाङ्गी शङ्खवत्कैरवाम्बरा ।
कुन्दश्वेता कुन्दभूषा श्वेताम्बरविराजिता ॥ ७६॥
द्रुमाम्बरा द्रुमावासा वृहद्रुमविदारिणी ॥ ७७॥
लक्ष्मी श्यामा वरारोहा वराङ्गी भुवनेश्वरी ॥ ७८॥
छिन्नमस्ता च नक्षत्रा योगिनी योगसेविता ॥ ७९॥
योगमार्गरता साध्या साधकाभीष्टदायिनी ॥ ८०॥
साधिका साधना तुष्टा साधकानां प्रियङ्करी ॥ ८१॥
प्रद्युम्नाङ्गा सुप्रद्युम्ना वराभयकरा तथा ॥ ८२॥
वनेचरगणाधीशा वनेचरजनप्रिया ॥ ८३॥
सुखदा सुखसेव्या च सुभागा शतसंयुता ॥ ८४॥
बलाराध्या बला वृष्टिर्बालानां प्रीतिवर्द्धिनी ॥ ८५॥
रमणीया सुरम्याङ्गी तथा श्रीरमणप्रिया ॥ ८६॥
रतिरूपधरा सुभ्रूर्नारदी नारदेरिता ॥ ८७॥
पणवा पणवाकारा पणवेरितशब्दिका ॥ ८८॥
रससारा रसाकारा शतसारसशोभिता ॥ ८९॥
सन्धिस्वरूपदुर्गम्या स्वरसन्धिस्थिता प्रिया ॥ ९०॥
युष्मदस्मत्स्वरूपा च कारका कारकप्रिया ॥ ९१॥
धातुवादरता चैव धातूनां सन्धिरूपिणी ॥ ९२॥
चतुः प्रमाणगम्या च द्रव्यरूपा गुणेश्वरी ॥ ९३॥
समवायस्थिता भावरूपा सर्वप्रियङ्करी ॥ ९४॥
मीमांसाशास्त्रनिरता तथा मीमांसकप्रिया ॥ ९५॥
साङ्ख्या साङ्ख्यपरा सङ्ख्या साङ्ख्यसूत्रप्रमोदिनी ॥ ९६॥
स्पर्शिनी स्पर्शरूपा च स्पर्ध्या चुम्बकलोहवत् ॥ ९७॥
वेदान्तिनी वेदगम्या वेदान्तप्रतिपादिनी ॥ ९८॥
अद्वैतरूपिणी चैव अद्वैतप्रविवादिनी ॥ ९९॥
वृथा सर्वप्रपञ्चा च संसारशतसङ्कुला ॥ १००॥
धर्मिष्ठा धर्मनिरता धर्मशास्त्रप्रबोधिनी ॥ १०१॥
अश्वमेधादियज्ञानां जननी जानकीप्रिया ॥ १०२॥
यज्ञवाटस्थिता यज्ञा हविर्दात्री प्रभञ्जिनी ॥ १०३॥
ललना सरला पूर्वा दक्षिणा वारुणी तथा ॥ १०४॥
मारुती नन्दिनी चैव नन्दनारण्यवासिनी ॥ १०५॥
राजनीतिर्दण्डनीतिस्त्रयीवार्तापरायणा ॥ १०६॥
नारिकेलप्रिया खर्जूरप्रिया रोगविनाशिनी ॥ १०७॥
भद्रकालस्वरूपा च मधुकैटभनाशिनी ॥ १०८॥
नित्यानन्दस्वरूपा च सुधामात्रा त्रिधात्मिका ॥ १०९॥
वनौकसारा सवना अलका चामरावती ॥ ११०॥
ईर्ष्यासूया तथा निन्दा तितिक्षा क्षान्तिरार्जवम् ॥ १११॥
चन्द्रानना चन्द्रवती तथा त्रिपुरसुन्दरी ॥ ११२॥
त्रिपुरध्वंसिनी चित्रा नित्यक्लिन्ना भगेश्वरी ॥ ११३॥
सुवासिन्यर्चनप्रीता सुवासाः सुमनोहरा ॥ ११४॥
रजोगुणविनिर्मुक्ता निर्मुक्ता मुक्तिदायिनी ॥ ११ः५॥
निःप्रकाशा निराधारा साधारा गुणसंयुता ।
गम्भीरवेदिनी सौरी तपनी तपनप्रिया ॥ ११६॥
नादिनी सुनदा नन्दी अम्बिका अम्बिकेश्वरी ॥ ११७॥
त्रिनन्दा त्रिप्रिया चैव अनसूया त्रिमालिनी ॥ ११८॥
मन्त्रज्ञा मन्त्रनिलया मन्त्रसाधनतत्परा ॥ ११९॥
रक्तदन्ती रक्ततुण्डा रक्तबीजविनाशिनी ॥ १२०॥
रक्ततृप्ता रक्तहरा रक्तस्य वृद्धिदायिनी ॥ १२१॥
हरिद्वारससम्पूज्या हरिद्राङ्गी हरित्स्थिता ॥ १२२॥
कर्बुराङ्गी कर्बुरा च कर्बुराम्भःप्रपूजिता ॥ १२३॥
कामरूपस्थिता विद्या कामरूपनिवासिनी ॥ १२४॥
स्वर्णपीठासना पीठा सर्वपीठप्रपूजिता ॥ १२५॥
कुबेरगृहसम्पच्च यज्ञगन्धर्वसेविता ॥ १२६॥
यज्ञविद्या देवविद्या दैत्यविद्या विदेहिका ॥ १२७॥
सञ्जीवनामृता विद्या कचगा कचसेविता ॥ १२८॥
सुरा सर्पिस्तथा माध्वी मदविह्वललोचना ॥ १२९॥
छन्दोमाता पिङ्गलाक्षी सूत्रपिङ्गलदीपिका ॥ १३०॥
जगती पृथ्वी आर्या अनुष्टुप् त्रिष्टुबुष्णिका ॥ १३१॥
निर्ममा निरहङ्कारा निर्मोहा मोहवर्जिता ॥ १३२॥
मोहिनी मोहवलया महावलयसुन्दरी ॥ १३३॥
सुमेरुमालिनी सुन्दा सुमुखी सुमुखप्रिया ॥ १३४॥
मुक्ताम्बरा मुक्तकेशी मत्तमातङ्गगामिनी ॥ १३५॥
जलपूरितसर्वाङ्गी जलेश्वरप्रपूजिता ॥ १३६॥
वृन्दा वृन्दाधिपा वृन्दसेविका वृन्दवृक्षिका ॥ १३७॥
मीना मीनसहाया च मीनध्वजविमर्दिनी ॥ १३८॥
पारिजातप्रसूनाभा पारिजातप्रपूरिता ॥ १३९॥
भेरुण्डा गरुडा गौडी गुडनैवेद्यवासिनी ॥ १४०॥
कालिन्दी कालतनया कला षोडशिका तथा ॥ १४१॥
युद्धश्रीर्विजया नाम युद्धाङ्गणनिवासिनी ॥ १४२॥
शिवदा मथुरा वन्द्या काञ्ची द्वारावती तथा ॥ १४३॥
प्रद्युम्नपूजिता चुञ्चुचन्द्रिका चण्डसुन्दरी ॥ १४४॥
चञ्चत्तरङ्गा सर्वाद्या सर्वब्राह्मणपूजिता ॥ १४५॥
यज्ञोपवीतिनी विप्रा कुमारी वृहदानना ॥ १४६॥
गुरुप्रीतिर्गुरोर्विद्या गुरुपूजनतत्परा ॥ १४७॥
पञ्चक्रोशी पञ्चहीना पञ्चमी पञ्चसुन्दरी ॥ १४८॥
पञ्चपाण्डवमाता च कुन्ती कुन्तधराकरा ॥ १४९॥
स्वतन्त्रकीर्तिः कार्यघ्न्नी द्वितीया कर्मसंस्थिता ॥ १५०॥
अपादाने पञ्चमी च तथा सम्बन्धषष्ठिका ॥ १५१॥
प्रतिबन्धस्य जननी औषधी वैद्यजीवनी ॥ १५२॥
हुंसेनी हुंकृतिर्हुंवा गौरार्या वृषभात्मिका ॥ १५३॥
रेणुका रेणुतनया रजोनाशनतत्परा ॥ १५४॥
जया रिक्ता सुषेणा च केदारपथगामिनी ॥ १५५॥
पितृमाता पितृपूज्या पितृणां स्वर्गदायिनी ॥ १५६॥
सागरस्वर्गदा चैव सर्वसंसारगामिनी ॥ १५७॥
नाम्नां सहस्रमाख्यातं गङ्गायाः सर्वकामदम् ।
यस्तु वै पठते नित्यं मुक्तिभागी भवेन्नरः ॥ १५८॥
विद्यार्थी लभते विद्यां वाचस्पतिसमो भवेत् ॥ १५९॥
दुर्गता अपि पितरो मुक्तिं गच्छन्त्यनामयाः ॥ १६०॥
पठते प्रत्यहं देवि तस्य मुक्तिर्न संशयः ॥ १६१॥
