शिवस्वरूप मारुतनन्दन,
केसरी-सुअन कलियुग-कुठारकी॥
मुखसों राम-नाम-गुण भाखत,
सुमधुर भक्ति-प्रेम-रस चाखत,
मंगलकर मंगलाकारकी॥
दहन दनुज-बन हित, दावानल,
ज्ञानि-मुकुट-मणि, पूर्ण गुण सकल,
मंजु भूमिषु सदाचारकी॥
कलानिधान, निपुण गायक अति,
छन्द-व्याकरण-शास्त्र अमित गति,
रामभक्त अतिशय उदारकी॥
शरणागतको सब सुखदायक,
विजयी वानर-सेना-नायक,
सुगति-पोतके कर्णधारकी॥
