अविकारी, अविनाशी, अज, अन्तर्यामी॥
अमल, अरूप, अगोचर, अविचल, अघहारी॥
कर्ता, भर्ता, धर्ता तुम ही संहारी॥
साक्षी, परम अकर्ता, कर्ता, अभिमानी॥
सदा श्मशान विहारी, योगी बैरागी॥
चिताभस्मतन, त्रिनयन, अयन महाकाली॥
विवसन विकट रूपधर रुद्र प्रलयकारी॥
अतिकमनीय, शान्तिकर, शिवमुनि-मन-हारी॥
कालरूप केवल हर! कालातीत, विभो॥
प्रेम-सुधा-निधि, प्रियतम, अखिल विश्व त्राता॥
सब बिधि निर्मल मति कर अपना कर लीजै॥
