भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
मंगल रूप अनूप छबीले अखिल भुवनके तुम भोगी ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
रुण्ड-माल गल व्याल भाल-शशि नीलकंठ शोभा साने ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
ग्राह मगर बहु कच्छप छाये मार्ग कहो कैसे सूझै ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
किंकरकी विनती सुन स्वामी सब अपराध क्षमा करियो ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
द्रोह-मोह-मद संग न छोड़े आन देत नहिं तुम ताँई ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
तुम ही गगन मगन पुनि पृथिवी पर्वतपुत्रीके प्यारे ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
वृषभारूढ़ गूढ़ गुरु गिरिपति गिरिजावल्लभ निष्कामी ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
दीप्त ललाट लाल दोउ लोचन उर आनत ही दुख भाजै ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
सबकी इच्छा पूरन करते नाथ सनातन हर देवा ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
अष्टसिद्धि-नवनिधि सुखसम्पति स्वामिभक्ति मुक्ती पावै ॥
भोलेनाथ भक्त-दुखगंजन भवभंजन शुभ सुखकारी ॥
