मायातीत, महेश्वर मन-वच-बुद्धि परे॥
अतुल, अनन्त, अनामय, अमित, शक्ति-राशि॥
जय जगदीश हरे...॥
सत-चित-सुखमय, सुन्दर शिव सत्ताधारी॥
जय जगदीश हरे...॥
विश्व चराचर तुम ही, तुम ही जगभूपा॥
जय जगदीश हरे...॥
विश्वोत्पादक पालक रक्षक संहर्ता॥
जय जगदीश हरे...॥
केवल-काल कलानिधि, कालातीत, विभो॥
जय जगदीश हरे...॥
मन-मोहन मुरलीधर नित-नव नटनागर॥
जय जगदीश हरे...॥
प्रभुपद-विमुख अभागी, कलि-कलुषित तन-मन॥
जय जगदीश हरे...॥
पाप-ताप हर हरि! सब, निज-जन कर लीजै॥
जय जगदीश हरे...॥
