जय रेणुका नन्दन सहस्रार्जुन निकन्दन भृगुवरम् ॥
भृगुवंश चन्दन,जगत वन्दन, शौर्य तेज दिवाकरम् ॥
शिव परशु कर, भुज चाप शर, मद मोह माया तमहरम् ॥
जय जगतकर्ता जगतभर्ता जगत हर जगदीश्वरम् ॥
जय धर्म रक्षक, दुष्टघातक साधु सन्त अभयङ्करम् ॥
जय निर्विकार अपार गुण आगार महिमा विस्तरम् ॥
जय मोक्ष दाता, वर प्रदाता, सर्व विधि मङ्गलकरम् ॥
