सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
नारद करत निरंतर घंटा ध्वनी बाजें॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
बूढों ब्राह्मण बनके, कंचन महल कियों॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
चंद्रचूड़ एक राजा तिनकी विपत्ति हरी॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
सो फल भोग्यों प्रभूजी, फेर स्तुति किन्ही॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
श्रद्धा धारण किन्ही, तिनके काज सरें॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
मनवांछित फल दिन्हो, दीन दयालु हरि॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
ऋद्धि सिद्धी सुख संपत्ति सहज रुप पावे॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा...॥
