चतुर्वर्गप्रदातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ १ ॥
परमानन्ददातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ २ ॥
लोकत्रयविधातारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ३ ॥
भवाब्धिपारकर्तारं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ४ ॥
लीलयोपात्तवपुषं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ५ ॥
सर्वाश्चर्यमयं देवं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ६ ॥
बदरीखण्डमध्यस्थं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ७ ॥
ब्रह्मानन्दचिदाभासं श्रीबद्रीशं नमाम्यहम् ॥ ८ ॥
सर्वपापविनिर्मुक्तः स शान्तिं लभते पराम् ॥ ९ ॥
