सान्निध्यं कुरु मे चित्ते विष्णुवक्षःस्थलस्थिते ॥ १ ॥
ईश्वरीं सर्वभूतानां जननीं सर्वदेहिनाम् ॥ २ ॥
सुकपोलां सुकर्णाग्रन्यस्तमौक्तिककुण्डलाम् ॥ ३ ॥
अलकाग्रैरलिनिभैरलङ्कृतमुखाम्बुजाम् ॥ ४ ॥
निष्ककण्ठीं स्तनालम्बिमुक्ताहारविराजिताम् ॥ ५ ॥
शुक्लमाल्याम्बरधरां तप्तहाटकवर्णिनीम् ॥ ६ ॥
अनुरूपानवद्याङ्गीं हरेर्नित्यानपायिनीम् ॥ ७ ॥
अचिन्त्यानन्तविभवा भावाभावविभाविनी ॥ १ ॥
ब्रह्मभावं गता त्यक्तभेदा सर्वजगन्मयी ॥ २ ॥
एकयोग्याऽशून्यभावाकृतिस्तेजः प्रभाविनी ॥ ३ ॥
भावाभावमयी दिव्या भेद्यभेदकभावनी ॥ ४ ॥
पञ्चकृत्यकरी पञ्चशक्तिमय्यात्मवल्लभा ॥ ५ ॥
अपृथक्चारिणी सौम्या सौम्यरूपव्यवस्थिता ॥ ६ ॥
महाविभूतिः समतां गता ज्योतिर्गणेश्वरी ॥ ७ ॥
आज्ञासमविभक्ताङ्गी ज्ञानानन्दक्रियामयी ॥ ८ ॥
सर्वभूतेश्वरी सर्वभूतमाताऽऽत्ममोहिनी ॥ ९ ॥
विमुक्तिदायिनी भक्तिगम्या संसारतारिणी ॥ १० ॥
पञ्चव्योमपदी रक्षव्यावृतिः प्राप्यपूरिणी ॥ ११ ॥
हिरण्यवर्णा हैरण्यप्राकारा हेममालिनी ॥ १२ ॥
स्वाज्ञाकार्यमरा नित्यसुरभिर्व्योमचारिणी ॥ १३ ॥
करुणाग्रानतमुखी कमलाक्षी शशिप्रभा ॥ १४ ॥
प्रज्ञापरिमिताऽऽत्मानुरूपा सत्योपयाचिता ॥ १५ ॥
कर्तृशक्तिः सुगहना भोक्तृशक्तिर्गुणप्रिया ॥ १६ ॥
अकलङ्काऽमृताधारा महाशक्तिर्विकासिनी ॥ १७ ॥
एकस्वरूपा त्रिविधा सङ्ख्यातीता निरञ्जना ॥ १८ ॥
नित्यशान्ता निस्तरङ्गा निर्भिन्ना सर्वभेदिनी ॥ १९ ॥
निष्कामना सर्वरसाऽभेद्या सर्वार्थ साधिनी ॥ २० ॥
भयङ्करी सिद्धिरूपाऽव्यक्ता सदसदाकृतिः ॥ २१ ॥
हार्दमूर्तिर्महामूर्तिरव्यक्ता विश्वगोपिनी ॥ २२ ॥
अप्रमेयाऽक्रिया सूक्ष्मा परनिर्वाणदायिनी ॥ २३ ॥
विश्वसूतिस्तर्पयन्ती नित्यतृप्ता महौषधिः ॥ २४ ॥
त्रिवर्तिनी त्रिलोकस्था भूर्भुवःस्वरयोनिजा ॥ २५ ॥
व्योमपद्मा कृतधुरा पूर्णकामा महेश्वरी ॥ २६ ॥
लक्ष्यमाणा लक्षयन्ती जगज्ज्येष्ठा शुभावहा ॥ २७ ॥
क्रियायोगात्मिका मूर्तिः हृदब्जस्था महाक्रमा ॥ २८ ॥
आत्मानपायिनी तुल्यस्वरूपा समलक्षणा ॥ २९ ॥
प्रियचेष्टा तुल्यशीला वरदा कामरूपिणी ॥ ३० ॥
महर्धिः सत्यसङ्कल्पा बह्वृचा परमेश्वरी ॥ ३१ ॥
महाभिलाषा सावित्री प्रधाना सर्वभासिनी ॥ ३२ ॥
भूताश्रया हृषीकेश्वर्यशोका वाजिवाहिका ॥ ३३ ॥
हिरण्यगर्भा गम्भीरा गोधूलिः कमलासना ॥ ३४ ॥
धनलक्ष्मीः स्वस्तिकरी राज्यलक्ष्मीर्महासती ॥ ३५ ॥
पद्मगर्भा वेदवती विविक्ता परमेष्ठिनी ॥ ३६ ॥
पद्मेस्थिता वेदमयी कुमुदा जयवाहिनी ॥ ३७ ॥
रुद्रवन्द्या सिन्धुमती वेदमाता मधुव्रता ॥ ३८ ॥
अनुकूला यज्ञवती शतकोटिः सुपेशला ॥ ३९ ॥
भीमा ब्रह्मस्तुता मध्यप्रभा देवर्षिवन्दिता ॥ ४० ॥
सुवर्णरुचिरप्रख्या भोगिनी भोगदायिनी ॥ ४१ ॥
विद्वत्प्रिया पद्मचिह्ना वरिष्ठा कमलेक्षणा ॥ ४२ ॥
विश्वभूषा कान्तिमती कृष्णा वीणारवोत्सुका ॥ ४३ ॥
देवाङ्कस्था परिणतिः कामवत्सा महामतिः ॥ ४४ ॥
स्वनिष्ठा पद्मनिलया सद्गतिः पद्मगन्धिनी ॥ ४५ ॥
रतिस्नुषा पद्मधरा पूज्या त्रैलोक्यमोहिनी ॥ ४६ ॥
गन्धात्मिका सुरसिका दीप्तमूर्तिः सुमध्यमा ॥ ४७ ॥
स्मितानना चारुदती निम्ननाभिर्महास्तनी ॥ ४८ ॥
पल्लवाङ्घ्रिः पद्ममनाः पद्मबोधा महाप्सराः ॥ ४९ ॥
कम्बुग्रीवा सुजघना रक्तपाणिर्मनोरमा ॥ ५० ॥
शुभरेखा विलासभ्रूः शुकवाणी कलावती ॥ ५१ ॥
सन्ध्या बिम्बाधरा पूर्वभाषिणी स्त्रीसमाह्वया ॥ ५२ ॥
वासवी पाण्डरच्छत्रा करभोरुस्तिलोत्तमा ॥ ५३ ॥
भद्रा जयावहा चन्द्रवदना कुटिलालका ॥ ५४ ॥
दिव्यायुधा दिव्यमाल्या विशाखा चित्रवाहना ॥ ५५ ॥
सामप्रिया नम्रिताङ्गी सर्वसेव्या वराङ्गना ॥ ५६ ॥
देवजुष्टाऽऽदित्यवर्णा दिव्यगन्धा सुहृत्तमा ॥ ५७ ॥
यज्ञाशिनी महावृष्टिः सर्वपूज्या वषट्क्रिया ॥ ५८ ॥
योगिसेव्या सत्यरता योगमाया पुरातनी ॥ ५९ ॥
सुतरा संवृतज्योतिः योगिनी योगसिद्धिदा ॥ ६० ॥
संहारशक्तिः प्रबला निरुपाधिः परावरा ॥ ६१ ॥
महाश्रीरजहत्कीर्तिः योगश्रीः सिद्धिसाधनी ॥ ६२ ॥
राजश्री राजकलिता फलश्रीः स्वर्गदायिनी ॥ ६३ ॥
तमोपहाऽव्ययनिधिः लक्षणा हृदयङ्गमा ॥ ६४ ॥
सर्वोत्तमा मित्रविन्दा मैथिली प्रियदर्शना ॥ ६५ ॥
मूलप्रकृतिरीशाना शिवदा दीप्रदीपिनी ॥ ६६ ॥
गान्धारिणी परगतिस्तत्त्वगर्भा भवाभवा ॥ ६७ ॥
मदयन्ती लोकधारिण्यदृश्या सर्वनिष्कृतिः ॥ ६८ ॥
क्षीरधारा घृतमयी जुह्वती यज्ञदक्षिणा ॥ ६९ ॥
सिंहपिञ्छा महादुर्गा जयन्ती खड्गधारिणी ॥ ७० ॥
आर्या यशोदा वसुदा धर्मकामार्थमोक्षदा ॥ ७१ ॥
एकवीरा भद्रकाली स्वानन्दिन्युल्लसद्गदा ॥ ७२ ॥
यज्ञकामा लेलिहाना तीर्थकर्युग्रविक्रमा ॥ ७३ ॥
अश्वक्रान्ता रथक्रान्ता विष्णुक्रान्तोरुचारिणी ॥ ७४ ॥
दीक्षाविदा विश्वशक्तिः बीजशक्तिः सुदर्शनी ॥ ७५ ॥
अयोध्याऽच्छिन्नसन्ताना महारत्ना सुखावहा ॥ ७६ ॥
अमृतस्यन्दिनी सीमा यज्ञगर्भा समेक्षणा ॥ ७७ ॥
सोमपा माधवी नित्यकल्याणी कमलार्चिता ॥ ७८ ॥
यज्ञविद्या गुह्यविद्याऽध्यात्मविद्या कृतागमा ॥ ७९ ॥
काङ्क्षमाणा महामाया कोलकामाऽमरावती ॥ ८० ॥
सौदामिनी मेघरथा दैत्यदानवमर्दिनी ॥ ८१ ॥
मनस्यमाना तुलसी रोगनाशिन्युरुप्रदा ॥ ८२ ॥
ब्रह्मिष्ठा वह्निशमनी जुषमाणा गुणात्यया ॥ ८३ ॥
अक्षोभ्या सर्वतोभद्रा वयस्या स्वस्तिदक्षिणा ॥ ८४ ॥
प्रत्यग्वरा वारणवत्यनसूया दुरासदा ॥ ८५ ॥
मृत्युञ्जया त्रासहरी निर्भया शत्रुसूदिनी ॥ ८६ ॥
सकृद्विभाता सर्वार्तिसमुद्रपरिशोषिणी ॥ ८७ ॥
सर्वमन्त्रात्मिका विद्युत्सुवर्णा सर्वरञ्जिनी ॥ ८८ ॥
सुषेणा लोकविदिता कामसूर्जगदादिभूः ॥ ८९ ॥
सहस्रशक्तिरावृत्तिः सुस्थिरा श्रेयसां निधिः ॥ ९० ॥
सूर्या कन्याप्रिया विश्वभावनी सुविभाविनी ॥ ९१ ॥
मोक्षलक्ष्मीर्जगद्योनिः व्योमलक्ष्मीः सुदुर्लभा ॥ ९२ ॥
लोकस्वामिन्यच्युतार्था पुष्कला जगदाकृतिः ॥ ९३ ॥
प्राणिनी प्राणदा विश्वा विश्वब्रह्माण्डवासिनी ॥ ९४ ॥
श्रयन्ती श्रीयमाणा क्ष्मा विश्वरूपा प्रसादिनी ॥ ९५ ॥
सुप्रतीका पृश्निमती निवृत्तिर्विविधा परा ॥ ९६ ॥
स्थूला सर्वाकृतिः स्थेमा निम्नगर्भा तमोनुदा ॥ ९७ ॥
शक्त्यात्मिका शब्दशक्तिर्विशिष्टा वायुमत्युमा ॥ ९८ ॥
व्याली सङ्कर्षिणी द्योता महादेव्यपराजिता ॥ ९९ ॥
अजिता कर्षिणी नीतिर्गरुडा गरुडासना ॥ १०० ॥
मही शुद्धविधा पृथ्वी सन्तानिन्यंशुमालिनी ॥ १०१ ॥
सम्बोधिनी शब्दपुर्णा विजयांशुमती कला ॥ १०२ ॥
दीक्षा भक्तार्तिहा रक्षा परीक्षा यज्ञसम्भवा ॥ १०३ ॥
धन्या मान्या पद्मनेमी भार्गवी वंशवर्धनी ॥ १०४ ॥
सञ्ज्ञा निःसंशया पूर्वा वनमाला वसुन्धरा ॥ १०५ ॥
सर्वा नित्योदितोदारा जृम्भमाणा महोदया ॥ १०६ ॥
बाला कुमारी युवतिः करुणा भक्तवत्सला ॥ १०७ ॥
दुर्मर्षणी सुचरिता बोधा शोभा सुवर्चला ॥ १०८ ॥
गोदा गोदावरी चन्द्रभागा कावेर्युदन्वती ॥ १०९ ॥
वृद्धिः स्थितिर्ध्रुवा बुद्धिस्त्रिगुणा गुणगह्वरा ॥ ११० ॥
विभूतिर्निष्कला रम्भा रक्षा सुविमला क्षमा ॥ १११ ॥
अमोघा शान्तिदा स्तुत्या ज्ञानदोत्कर्षिणी शिखा ॥ ११२ ॥
प्रज्ञा रामा परा सन्ध्या सुभद्रा सर्वमङ्गला ॥ ११३ ॥
काष्ठा कामेश्वरी निष्ठा काम्या रम्या वरा स्मृतिः ॥ ११४ ॥
शान्तिर्दान्तिः स्तुतिः सिद्धिः विरजाऽत्युज्ज्वलाऽव्यया ॥ ११५ ॥
स्वधा स्वाहा रतिरुषा वसुविद्या धृतिः सहा ॥ ११६ ॥
रत्नावली भारतीडा धीरधीः केवलाऽऽत्मदा ॥ ११७ ॥
परधुर्यास्पदा ह्रीर्भूः कामिनी शोकनाशिनी ॥ ११८ ॥
अर्कप्रभा रथेभाश्वनिलयेन्दुप्रभाऽद्भुता ॥ ११९ ॥
भोगप्रिया भोगवती भोगीन्द्रशयनासना ॥ १२० ॥
सर्वलक्षणलक्षण्या सर्वलोकप्रियङ्करी ॥ १२१ ॥
वेदान्तस्था ब्रह्मनीतिः ज्योतिष्मत्यमृतावहा ॥ १२२ ॥
सर्वातिशायिनी प्रीतिः सर्वभूतस्थिता द्विजा ।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्या दृष्टादृष्टफलप्रदा ॥ १२३ ॥
