राजविद्या राजपूज्या राजकोशसमृद्धिदा ॥ १॥
राज्ञां गुरुवराराध्या राजयुक्तनटाङ्गना ॥ २॥
राज्ञां कविकुलाख्याता राजरोगनिवारिणी ॥ ३॥
राज्ञां सभालङ्कृताङ्गी राजलक्षणसंयुता ॥ ४॥
राजसद्गुणनिर्दिष्टा राजमार्गरथोत्सवा ॥ ५॥
राजत्कृपा राजलक्ष्मीः राजत्कञ्चुकधारिणी ॥ ६॥
राजाज्ञा राजमातङ्गी राजयन्त्रकृतार्चना ॥ ७॥
राजमन्दिरवास्तव्या राजस्त्री राजजागरा ॥ ८॥
राजपुत्री राजमैत्री राजान्तःपुरवासिनी ॥ ९॥
राजोत्तममृगारूढा राज्ञस्तेजःप्रदायिनी ॥ १०॥
राजसूयसमाराध्या राजसाहस्रसेविता ॥ ११॥
राजार्हमणिभूषाढ्या राजच्छृङ्गारनायिका ॥ १२॥
राजपर्वतकौमारी राजशौर्यप्रदायिनी ॥ १३॥
राजमाता राजमाषप्रियार्चितपदाम्बुजा ॥ १४॥
रामचन्द्रसमाराध्या रामा राजीवलोचना ॥ १५॥
रात्रिसूक्तजपप्रीता रागद्वेषविवर्जिता ॥ १६॥
रिपुसङ्घकुलध्वान्ता रिगमस्वरभूषिता ॥ १७॥
रुग्घन्त्री रुद्रकोपाग्निशमनी रुद्रसंस्तुता ॥ १८॥
रूप्यासनप्रिया रूढा रूप्यचन्द्रशिखामणिः ॥ १९॥
रेणुका रेणुकाराध्या रेवोर्ध्वकृतचक्रिणी ॥ २०॥
रोमलम्बितविध्यण्डा रोमन्थमुनिसेविता ॥ २१॥
रोचनागरुकस्तूरीचन्दनश्रीविलेपिता ॥ २२॥
रोहिताश्वसुसम्भूता रौहिणेयानुजार्चिता ॥ २३॥
रौद्रमन्त्राभिषिक्ताङ्गी रौद्रमध्यसमीडिता ॥ २४॥
रङ्गलास्यकृतालोला रङ्गवल्ल्याद्यलङ्कृता ॥ २५॥
ललिता लड्डुकप्रीतमानसस्कन्दजन्मभूः ॥ २६॥
लक्षणा लक्षणाराध्या लक्षबिल्वार्चनप्रिया ॥ २७॥
ललाटनयनार्धाङ्गी लवङ्गत्वक्सुगन्धवाक् ॥ २८॥
लाङ्गली लालना लाला लालिका लिङ्गपीठगा ॥ २९॥
लुङ्गाफलसमासक्ता लुलायासुरघातुकी ॥ ३०॥
लृलॄवर्णस्वरूपाढ्या लेखिनी लेखकप्रिया ॥ ३१॥
लेपितश्रीचन्दनाङ्गी लैङ्गमार्गप्रपूजिजता ॥ ३२॥
लोपामुद्रार्चितपदा लोपामुद्रापतीडिता ॥ ३३॥
लोहजप्रतिमायन्त्रवासिनी लोकरञ्जिनी ॥ ३४॥
लोलजिह्वापरीताङ्गी लोकसंहारकारिणी ॥ ३५॥
लम्पटा लम्बिमालाभिनन्दिता लवलीधरा ॥ ३६॥
वधूर्वचनसन्तुष्टा वत्सला वटुभैरवी ॥ ३७॥
वनिता वर्धनी वर्ष्या वरालीरागलोलुपा ॥ ३८॥
वराङ्गी वसुधा वप्रकेलिनी वणिजा(जां)वरा ॥ ३९॥
वराहवदनाराध्या वर्णपञ्चदशात्मिका ॥ ४०॥
वशिनी वल्लकी वर्णा वर्षाकालप्रपूजिता ॥ ४१॥
वर्गा वरवृषारूढा वषण्मन्त्रसुसंज्ञका ॥ ४२॥
वज्राञ्चितशिरोभूषा वज्रमाङ्गल्यभूषिता ॥ ४३॥
वादिनी वागधिष्ठात्री वारुणी वायुसेविता ॥ ४४॥
वाद्यघोषप्रिया वाद्यवृन्दारम्भनटोत्सुका ॥ ४५॥
वास्तोष्पतीड्या वामाङ्घ्रिधृतनूपुरशोभिता ॥ ४६॥
वामाङ्गा वाञ्छितफलदात्री वाचालखण्डिता ॥ ४७॥
वासुकीकण्ठभूषाढ्यवामदेवप्रियाङ्गना ॥ ४८॥
विनोदवनवास्तव्या विभक्ताण्डा विधीडिता ॥ ४९॥
विश्वम्भरा विष्णुशक्तिर्विजिज्ञासाविचक्षणा ॥ ५०॥
विदिता विश्वजननी विस्तारितचमूबला ॥ ५१॥
विभाकरात्यर्बुदाभा विधात्री विन्ध्यवासिनी ॥ ५२॥
विशल्या विशिखा विघ्ना विप्ररूपा विहारिणी ॥ ५३॥
विपुला विश्वरूपाख्या विषघ्नी विश्वभामिनी ॥ ५४॥
विपरीतरतिप्रीतपतिर्विजयसंयुता ॥ ५५॥
वीरपानप्रिया वीरा वीणापुस्तकधारिणी ॥ ५६॥
वीराष्टाष्टकपरीता वीरशूरजनप्रिया ॥ ५७॥
वीरलक्ष्मीर्वीतिहोत्रनिटिला वीरभद्रका ॥ ५८॥
वृषाकपायी वृत्तज्ञा वृद्धा वृत्तान्तनायिका ॥ ५९॥
वेदिका वेदविनुता वेतण्डकृतवाहना ॥ ६०॥
वेतालनटनप्रीता वेङ्कटाद्रिनिवासिनी ॥ ६१॥
वेषिणी वैनतेयानुकम्पिनी वैरिनाशिनी ॥ ६२॥
वैजयन्तीष्टवरदा वैकुण्ठवरसोदरी ॥ ६३॥
वैकुण्ठा वैजयन्तीड्या वैयाघ्रमुनिसेविता ॥ ६४॥
वन्दिता वङ्गदेशस्था वंशगानविनोदिनी ॥ ६५॥
वन्दिताखिललोकश्रीः वक्षःस्थलमनोहरा ॥ ६६॥
शक्वरी शमिताघौघा शक्ता शतकरार्चिता ॥ ६७॥
शरभृच्छबरी शक्तिमोहिनी शणपुष्पिका ॥ ६८॥
शब्दमाता शतावृत्तिपूजिता शत्रुनाशिनी ॥ ६९॥
शनकैः पदविन्यस्तप्रदक्षिणनतिप्रिया ॥ ७०॥
शातातपमुनीन्द्रेड्या शालवृक्षकृतालया ॥ ७१॥
शार्ङ्गपाणिबला शास्तृजननी शारदाम्बिका ॥ ७२॥
शाम्भवी शाश्वतैश्वर्या शासनाधीनवल्लभा ॥ ७३॥
शार्दूलचर्मवास्तव्या शान्तिपौष्टिकनायिका ॥ ७४॥
शारिका शुकहस्तोर्ध्वा शाखानेकान्तरश्रुता ॥ ७५॥
शिवकामेश्वराङ्कस्था शिखण्डिमहिषी शिवा ॥ ७६॥
शिवसङ्कल्पमन्त्रेड्या शिवेन सह मोदिता ॥ ७७॥
शिवमार्गविदां श्रेष्ठा शिवकामेशसुन्दरी ॥ ७८॥
शिवनृत्तसदालोकमानसा शिवसाक्षिणी ॥ ७९॥
शिवागमैकरसिका शिक्षितासुरकन्यका ॥ ८०॥
शिंशपावृक्षफलवद्भिन्नानेकारिमस्तका ॥ ८१॥
शिञ्जन्नूपुरभूषात्तकृतमन्मथभेरिका ॥ ८२॥
शिरोर्ध्वनिलयासीना शिवशक्त्यैक्यरूपिणी ॥ ८३॥
शिवदर्शनसन्तुष्टा शिवमन्त्रजपप्रिया ॥ ८४॥
शिष्याचरितशैलेशा शिवगानविगायिनी ॥ ८५॥
शिवगङ्गासरस्तीरप्रत्यङ्मन्दिरवासिनी ॥ ८६॥
शिखादेवी शिवाभिन्ना शिवतत्त्वविमर्शिनी ॥ ८७॥
शिवरात्रिदिनाराध्या शिवस्य हृदयङ्गमा ॥ ८८॥
शिवार्चनरता शिल्पलक्षणा शिल्पिसेविता ॥ ८९॥
शिम्बीजश्रवणानन्दा शिमन्तर्नाममन्त्रराट् ॥ ९०॥
शीतभीरुः शीघ्रगन्त्री शीर्षका शीकरप्रभा ॥ ९१॥
शीतगङ्गाजलस्नाता शुका(क्रा)राधितचक्रगा ॥ ९२॥
शुच्यन्तरङ्गा शुद्धाङ्गी शुद्धा शुकी शुचिव्रता ॥ ९३॥
शून्यवादिमुखस्तम्भा शूरपद्मारिजन्मभूः ॥ ९४॥
भृङ्गाभिषिक्तसुशिराः शृङ्गी शृङ्खलदोर्भटा ॥ ९५॥
शोणशैलकृतावासा शोकमोहनिवारिणी ॥ ९६॥
शौरिपूज्या शौर्यवीर्या शौक्तिकेयसुमालिका ॥ ९७॥
श्रीमाता श्रीफली श्रीला श्रीवृक्षा श्रीपतीडिता ॥ ९८॥
श्रीबेरबद्धमालाढ्या श्रीफला श्रीशिवाङ्गना ॥ ९९॥
श्रूयमाणचतुर्वेदा श्रेणिहंसनटाङ्घ्रिका ॥ १००॥
श्रोणिपूज्या श्रोत्रकान्ता श्रोत्रे श्रीचक्रभूषिता ॥ १०१॥
शम्बरारातिसम्पूज्या शङ्करी शम्भुमोहिनी ॥ १०२॥
षट्शास्त्रपारसन्दर्शा षष्ठस्वरविभूषिता ॥ १०३॥
षड्रसप्रीतरसना षड्ग्रन्थिविनिभेदिनी ॥ १०४॥
षट्त्रिंशत्तत्त्वसम्भूता षण्णवत्युपशोभिता ॥ १०५॥
षाण्डदेहार्धभागस्था षाड्गुण्यपरिपूरिता ॥ १०६॥
षोढाविभक्तषोढार्णा षोढान्यासपरायणा ॥ १०७॥
सायुज्यपदवीदात्री तथा सिंहासनेश्वरी ॥ १०८॥
सुनन्दा सूक्ष्मदर्शाङ्गी सृणिपाशविधारिणी ॥ १०९॥
सेव्या सेवकसंरक्षा सैंहिकेयग्रहार्चिता ॥ ११०॥
सौःकाररूपा सौभाग्यवर्धिनी संविदाकृतिः ॥ १११॥
हकारद्वयसन्दिग्धमध्यकूटमनुप्रभा ॥ ११२॥
हादिविद्या हास्यभस्मीकृतत्रिपुरसुन्दरी ॥ ११३॥
हिरण्मयपु(प)राकोशा हिमा हीरककङ्कणा ॥ ११४॥
हुताशनमुखाराध्या हुङ्कारहतकिल्बिषा ॥ ११५॥
हृद्ग्रन्थिभेदिका हृह्लृमन्त्रवर्णस्वरूपिणी ॥ ११६॥
हैयङ्गवीनहृदया होरा हौङ्काररूपिणी ॥ ११७॥
हस्तपद्मालिङ्गिताम्रनाथाऽद्भुतशरीरिणी ॥ ११८॥
आदिभूसदनाकारजानुद्वयविराजिता ॥ ११९॥
इन्द्राक्षीष्टार्थदा चेन्द्रा चेरम्मदसमप्रभा ॥ १२०॥
उमोग्रभैरवाकारा ऊर्ध्वरेतोव्रताङ्गना ॥ १२१॥
ॠजुवादनसन्तुष्टा लृलॄवर्णमनुस्वना ॥ १२२॥
एत्यक्षरद्वितीयाङ्ककादिविद्यास्वरूपिणी ॥ १२३॥
औषधायित साहस्रनाममन्त्रकदम्बका ॥ १२४॥
अर्हणाऽऽहवनीयाग्निमध्यगाऽहमितीरिता ॥ १२५॥
कात्यायनी कामकला कालमेघाभमूर्धजा ॥ १२६॥
कीनाशनायिका कुब्जकन्यका कुङ्कुमाकृतिः ॥ १२७॥
कूलङ्कषकृपासिन्धुः कूर्मपीठोपरिस्थिता ॥ १२८॥
केसरा केलिकासारा केतकीपुष्पभासुरा ॥ १२९॥
कोशाम्बा कोपरहिता कोमला कौस्तुभान्विता ॥ १३०॥
क्षमा क्षान्तिः क्षितीशार्च्या क्षीराब्धिकृतवासिनी ॥ १३१॥
खवासा खण्डिका खाङ्ककोटिकोटिसमप्रभा ॥ १३२॥
खण्डिता खण्डपरशुसमाश्लिष्टकलेवरा ॥ १३३॥
गणाधिपप्रसूर्गम्या गायत्री गानमालिका ॥ १३४॥
गीर्वाणीवीजनानन्दा गीतिशास्त्रानुबोधिनी ॥ १३५॥
गूढकोशान्तराराध्या गूढशब्दविनोदिनी ॥ १३६॥
गृ ग्लृ शब्दसुविज्ञात्री गेयगानविगायिनी ॥ १३७॥
गौरी गौरवत्रैपुण्ड्रा गङ्गा गन्धर्ववन्दिता ॥ १३८॥
घटिका घनसारादिनीराजनसमप्रभा ॥ १३९॥
घृघॄघ्लृ स्वरसम्पन्ना घोरसंसारनाशिनी ॥ १४०॥
ङकारा चतुरा चक्री चामुण्डा चारुवीक्षणा ॥ १४१॥
चिदानन्दा चित्रिणी चिच्चिन्त्या चिदम्बरेश्वरी ॥ १४२॥
चुलुकीकृतवाराशिमुनिसेवितपादुका ॥ १४३॥
चूलिका चूर्णिका चूर्णकुन्तला चेटिकावृता ॥ १४४॥
चोरितानेकहृत्पद्मा चौक्षा चन्द्रकलाधरा ॥ १४५॥
छान्दोग्योपनिषद्गीता छादिताण्डस्वशाम्बरी ॥ १४६॥
छायापुत्रसमाराध्या छिन्नमस्ता वरप्रदा ॥ १४७॥
जाह्नवी जातवेदाख्या जापकेष्टहितप्रदा ॥ १४८॥
जिष्णुर्जिह्वाग्रनिलया जीवनी जीवकेष्टदा ॥ १४९॥
जैत्री जैवातृकोत्तंसा जोटिं(षं)गा जोषदायिनी ॥ १५०॥
झिण्टीसुमपरप्रेम्णा( प्रीता) झिल्लिकाकेलिलालिता ॥ १५१॥
टिट्टिभासनहृत्संस्था ठवर्गचतुरानना ॥ १५२॥
तत्त्वज्ञा तरुणी सेव्या तप्तजाम्बूनदप्रभा ॥ १५३॥
तार्तीयभूपुरात्मस्वपादुका तापसेडिता ॥ १५४॥
तिथिस्तिल्लवनान्तःस्था तीक्ष्णा तीर्थान्तलिङ्गयुक् ॥ १५५॥
तृप्ता तृणीकृतारातिसेनासङ्घमहाभटा ॥ १५६॥
तोरणाङ्कितनक्षत्रा तोटकीवृत्तसन्नुता ॥ १५७॥
तन्त्रिणी तर्कशास्त्रज्ञा तर्कवार्ताविदूरगा ॥ १५८॥
थकारिणी थां थीं थों थैं कृतलास्यसमर्थका ॥ १५९॥
दशबाहुप्रिया दह्रा दशाशाशासनेडिता ॥ १६०॥
दीक्षिता दीक्षिताराध्या दीनसन्तापनाशिनी ॥ १६१॥
दुरत्यया दुराराध्या दुर्गा दुःखनिवारिणी ॥ १६२॥
दृष्टान्तरहिता देवमाता दैत्यविभञ्जिनी ॥ १६३॥
दौर्भाग्यनाशिनी दौती दौवारिकनिधिद्वयी ॥ १६४॥
दर्भारण्यकृतावासा दह्रविद्याविलासिनी ॥ १६५॥
धेनुमुद्रा धेनुपूज्या धैर्या धौम्यनुतिप्रिया ॥ १६६॥
नकुली नाभिनालाग्रा नाभावष्टदलाब्जिनी ॥ १६७॥
निगमाश्वरथारूढा नीललोहितनायिका ॥ १६८॥
नुतकल्याणवरदा नूतना नृपपूजिता ॥ १६९॥
नैगमज्ञानसंसेव्या नैगमज्ञानदुर्लभा ॥ १७०॥
नन्दिविद्या नन्दिकेशविनुता नन्दनानना ॥ १७१॥
नर्मदा परमाद्वैतभाविता परिपन्थिनी ॥ १७२॥
पथ्या परब्रह्मपत्नी पतञ्जलिसुपूजिता ॥ १७३॥
पयस्विनी परेशाना पद्मनाभसहोदरी ॥ १७४॥
पातञ्जलाख्यकल्पोक्तशिवावरणसंयुता ॥ १७५॥
पिञ्छा(ञ्जा)विलेपसुमुखा पितृतुल्या पिनाकिनी ॥ १७६॥
पुण्डरीकपुरीमध्यवर्तिनी पुष्टिवर्धिनी ॥ १७७॥
पृच्छामात्रातिशुभदा पृथ्वीमण्डलशासिनी ॥ १७८॥
पौषी पौण्ड्रेक्षुकोदण्डा पञ्चपञ्चाक्षरी मनुः ॥ १७९॥
फणाधिपसमाराध्या फणामणिविभूषिता ॥ १८०॥
बालार्कमण्डलाभासा बाला बालविनोदिनी ॥ १८१॥
बीजापूरफलासक्ता बीभत्सावहदृक्त्रयी ॥ १८२॥
बृहती बृहदारण्यनुता बृहस्पतीडिता ॥ १८३॥
बोद्ध्री बोधायना बौद्धदर्शना बन्धमोचनी ॥ १८४॥
भित्तिका भिन्नदैत्याङ्गा भिक्षाटनसहानुगा ॥ १८५॥
भूतघ्नी भूतदमनी भूतेशालिङ्गनोत्सुका ॥ १८६॥
भृङ्गिनाट्यविनोदज्ञा भैरवप्रीतिदायिनी ॥ १८७॥
भौमपूज्या भण्डहन्त्री भग्नदक्षक्रतुप्रिया ॥ १८८॥
मत्स्याक्षी मधुरावासा मन्वश्रहृदयाश्रया ॥ १८९॥
माया मारप्रिया मारसखीड्या माधुरीमनाः ॥ १९०॥
मीनाक्षी मीनसंसृष्टा मीमांसाशास्त्रलोचना ॥ १९१॥
मूषिकारूढजननी मूढभक्तिमदर्चिता ॥ १९२॥
मेधाप्रदा मेखलाढ्या मेघवाहनसेविता ॥ १९३॥
मैत्री मैनाकभगिनी मोहजालप्रणाशिनी ॥ १९४॥
मौहूर्तलग्नवरदा मञ्जीरा मञ्जुभाषिणी ॥ १९५॥
यातनारहिता याना यामिनीपूजकेष्टदा ॥ १९६॥
(यक्षराजसखान्तरा)
रथिनी रजनी रत्नगर्भा रक्षितभूरुहा ॥ १९७॥
रक्ता रसा रती रथ्या रणन्मञ्जीरनूपुरा ॥ १९८॥
रसज्ञा रसिका रक्तदन्ता रक्षणलम्पटा ॥ १९९॥
रत्नद्वीपवनान्तःस्था रजनीशकलाधरा ॥ २००॥
रजनीमुखसम्पूज्या रत्नसानुस्थिता रयिः ॥ २०१॥
