गोधन गोपी प्रिय गोपाला,
देवप्रिय असुरनके काला,
मोहन विश्वविमोहन वरकी॥
कालियवन-कंसादि-निकन्दन,
जगदाधार अजय जगवन्दन,
नित्य नवीन परम सुन्दरकी॥
विश्वम्भर कामद करुनाकर,
अजर, अमर, मायिक, मायाहर,
निर्गुन चिन्मय गुणमन्दिरकी॥
अतुलित अहि अघ-मूषक-भक्षक,
जगन्मय जगत निरौह निरीक्षक,
ब्रह्म परात्पर परमेश्वरकी॥
अजाव्यक्त लीला-बपु-धारी,
लीलामय मनोहर लीलाविस्तारी,
मधुर राधावरकी॥
