कहां उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो,
लेत होत सब काम॥
बारम्बार...॥
कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती,
कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥
बारम्बार...॥
चारु चक्रधर श्याम।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर,
शोभा लखहि ललाम॥
बारम्बार...॥
दया-दया तब नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल
शरण रूप तब धाम॥
बारम्बार...॥
श्री क्लीं कमला काम।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी,
वर दे तू निष्काम॥
बारम्बार...॥
